मानव लिंग का आकार एक रिपोर्ट



एक प्रसिद्ध ब्रिटिश वैज्ञानिक रिचर्ड लिन ने मानव (पुरुष) के लिंग के आकार पर एक शोधपत्र प्रकाशित किया। इस शोध में 113 देशों के पुरुषों के प्राइवेट पार्ट के साइज का विश्लेषण किया गया है। इस आधार पर देशों की एक लिस्‍ट भी बनाई गई है। इस लिस्‍ट में भारत 110वें स्थान पर है। लिस्‍ट में 7.1 इंच के औसत 'साइज' के साथ कांगो सबसे ऊपर है। कोरिया और कंबोडिया (3.9 इंच) सबसे नीचे हैं। भारत इन्‍हीं दो देशों से ऊपर है। भारतीय पुरुषों का 'औसत साइज' 4 इंच बताया गया है। लेकिन इस पर सवाल उठ रहे हैं।
साल 2006 में भारत में कंडोम का साइज तय करने के लिए किए गए 'साइज सर्वे' की रिपोर्ट आई थी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा कराए गए सर्वे 'स्डटी ऑन प्रापर लेंथ एंड ब्रेड्थ स्पेसिफिकेसंस फॉर कंडोम बेस्ड एंथ्रोपोमेट्रिक मेजरमेंट' के बाद यह नतीजा निकला था कि भारतीय बाजार में मिलने वाले कंडोम पुरुषों के लिंग के साइज के अनुपात में बड़े होते हैं। आईसीएमआर के लिए सर्वे करने वाले डॉ. शर्मा ने अपनी शोध रिपोर्ट साल 2006 में भारत सरकार को सौंप दी थी।
हालांकि इसके बाद कंडोम बनाने वालों के लिए कोई भी दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए थे। ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट 1940 के अनुच्छेद 'आर' के मुताबिक भारत में कंडोम का साइज कम से कम 6.7 इंच रखना अनिवार्य है। बहरहाल, सर्वे में 1400 पुरुषों का डाटा लिया गया था जिसमें 18-50 आयुवर्ग के पुरुष शामिल थे। इससे पहले साल 2001 तक मुंबई में इकट्ठा किए गए (200 लोगों के) डाटा के मुताबिक 60 प्रतिशत भारतीय पुरुषों के प्राइवेट पार्ट की औसत लंबाई 4.4 से 4.9 इंच के बीच और 30 प्रतिशत की लंबाई 4 से 4.9 इंच बताई गई
रिचर्ड के सर्वे पर सवाल
डॉ. रिचर्ड द्वारा जारी डाटा के मुताबिक भारतीय पुरुषों के लिंग की औसत लंबाई चार इंच है। उन्‍होंने अपनी रिपोर्ट का आधार आईसीएमआर के सर्वे को बनाया है। इसलिए इस सर्वे को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। द ओपेन मैग्जीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईसीएमआर द्वारा कराए गए सर्वे के नतीजे ही विश्वसनीय नहीं थे। तो फिर इसे आधार बना कर किया गया कोई और सर्वे कैसे विश्‍वसनीय हो सकता है?
आईसीएमआर के सर्वे को बेहतर रेस्पांस नहीं मिल पाया था क्योंकि भारत में कोई भी पुरुष इस तरह के सर्वे के लिए तैयार हो जाये यह बात भी आसान नहीं है। आईसीएमआर के लिए सर्वे करने वाले डॉ० आर०एस० शर्मा के मुताबिक सर्वे के लिए आंकड़े इकट्ठा करने में उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। डॉ० शर्मा ने साल 2001 में आँकड़े इकट्ठा करना शुरू किया था। उन्हें इसमें पाँच साल लग गये थे। डॉ० शर्मा कहते हैं-"भारतीय पुरुषों के लिंग का औसत साइज निकालना बाकी देशों से भिन्न है क्योंकि यहाँ अलग-अलग जाति और नस्लों के लोग रहते हैं।" डॉ० शर्मा की टीम ने सात सेंटरों- पटना, गुवाहाटी, कटक, चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई और हुबली में पुरुषों के प्राइवेट पार्ट के साइज के सैंपल इकट्ठे किये थे।
सर्वे और उसकी मुश्किलें
चंडीगढ़ में डॉ० एस के सिंह ने यह सर्वे किया था। डॉ० सिंह 220 पुरुषों का सैंपल लेने में कामयाब रहे थे। पुरुषों के अंग का साइज मापने के लिए एक किट बनाई गई थी जो अंग की मोटाई और लंबाई मापती थी। इसमें दो पेपर स्ट्रिप थी जिनसे माप लिया जाता था। एक पुरुष के कम से कम तीन माप लिए जाते थे और फिर औसत को अंतिम माप मान लिया जाता था।
पुरुषों के अंग का माप लेना भी एक बड़ी समस्या थी। पहले आईआईटी खड़गपुर के एक प्रोफेसर ने अंग का माप लेने के लिए एक डिजिटल कैमरा विकसित किया लेकिन महँगा होने के कारण इसे अपनाया नहीं गया था। कई व्‍यावहारिक दिक्‍कतें भी पेश आई थीं। पहले तो पुरुषों को सर्वे में शामिल होने के लिए तैयार करना ही मुश्किल था। अगर किसी तरह तैयार भी किया जाता था तो माप देते वक्‍त वे सहज नहीं हो पाते थे। उन्‍हें इसके लिए बोल्‍ड मैग्‍जीन आदि दिखा कर तैयार किया जाता था। शादीशुदा पुरुषों को अपनी पत्नी को साथ लाने की इजाजत दी गई थी। इसके बावजूद सही माप लेने में कई मुश्किलें आती थीं। चंडीगढ़ में सर्वे करने वाले डॉ० सिंह तो पुरुषों को सर्वे में शामिल होने के लिए देशहित तक का वास्ता देते थे।
सर्वे में शामिल अहम देशों का औसत साइज
रिपब्लिक ऑफ कांगो - 7.1 इंच,
इक्वाडोर- 7 इंच,
घाना - 6.8 इंच,
कोलंबिया - 6.7 इंच,
आइसलैंड - 6.5 इंच,
इटली - 6.2 इंच,
दक्षिण अफ्रीका - 6 इंच,
स्वीडन - 5.9 इंच,
ग्रीस - 5.8 इंच,
जर्मनी - 5.7 इंच,
न्यूजीलैंड - 5.5 इंच,
यू०के० - 5.5 इंच,
कनाडा - 5.5 इंच,
स्पेन - 5.5 इंच,
फ्रांस - 5.3 इंच,
ऑस्ट्रेलिया - 5.2 इंच,
रूस - 5.2 इंच,
यूएसए - 5.1 इंच,
आयरलैंड - 5 इंच,
रोमानिया - 5 इंच,
भारत- 5 इंच,
चीन - 4.3 इंच,
थाइलैंड - 4 इंच,
दक्षिण कोरिया - 3.8 इंच,
उत्तर कोरिया - 3.8 इंच
कोच्चि की अलग कहानी
कोच्चि में भी औसत साइज मापने के लिए एक सर्वे किया गया था। इसमें 301 लोग शामिल हुए थे और इसके नतीजे सन 2007 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंपोटेंस रिसर्च में प्रकाशित हुए थे। इस सर्वे को सेक्स रोग विशेषज्ञ डॉ० के० प्रोमुदु ने किया था। डॉ० प्रोमुदु के सर्वे के मुताबिक औसत साइज 5.8 इंच लंबा पाया गया। हालांकि उन्होंने सर्वे सिर्फ केरल में किया था इसलिए इसे समूचे भारत का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि डॉ० प्रोमुदु के सर्वे को यदि मानक माना जाए तो इस सूची में भारत चीन समेत कई देशों से ऊपर हो जाता है।
इस तरह डॉ० लिन की रिसर्च में कई खामियाँ नजर आती हैं। लेकिन उनकी रिपोर्ट इस बात पर रोशनी जरूर डालती है कि दुनिया के अलग-अलग इलाकों के पुरुषों के 'साइज' में इतना फर्क क्यों हैं। उन्‍होंने इसे मानव जाति के विकास से जोड़ा है। उनके मुताबिक प्राचीन काल में पुरुषों में महिलाओं को गर्भवती कर अपनी नस्ल के विकास की होड़ रहती थी। इस होड़ में अपेक्षाकृत लंबे प्राइवेट पार्ट वाले पुरुष बाजी मार लेते थे। लेकिन जैसे-जैसे पुरुष जाति ने अफ्रीका से यूरोप, एशिया और अन्य द्वीपों में पलायन किया, उनके बीच महिलाओं को गर्भवती करने की होड़ कम हो गई। इस कारण से पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरॉन नाम का हारमोन भी कम होता गया। नतीजतन साइज छोटा होता चला गया।
डॉ० लिन की शोध के मुताबिक नीग्रॉयड्स का 'औसत साइज' 6.3 इंच होता है। ये अफ्रीका में ही रहने वाले पुरुषों के वंशज हैं जबकि कोकसॉड्स पुरुषों के मामले में यह आँकड़ा 5.4 इंच और मंगोलॉयड्स के मामले में 4.7 इंच है। ये उन पुरुषों के वंशज है जो अफ्रीका को छोड़कर यूरोप और एशिया में बस गए थे.
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लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कितना सही ?


1. लिंग बाहर निकल कर वीर्य स्खलन गर्भ से बचने का अचूक तरीका है
ये तरीका साधारण है, स्खलन से ठीक पहले लिंग बाहर खींच लिया जाये ताकि योनि के अंदर वीर्य न पहुंचेI ये तरीका कारगर तो हो सकता है लेकिन सौ फीसदी कामयाब नहींI
जब इससे तरीके का प्रयोग सही तरीके से किया जाये तब भी 100 में से 4 महिलाओं को गर्भ ठहर ही जाता हैI और जिन लोगों ने इस काम में दक्षता हासिल नहीं की है, उन् लोगों में गर्भ ठहरने का हर साल का प्रतिशत 27 तक पाया गयाI यदि पुरुष सही समय पर लिंग बाहर खींच भी ले तो भी गर्भ ठहरने की पूरी सम्भावना को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि सेक्स के दौरान संभव है की थोड़ी मात्रा में वीर्य का रिसाव हो रहा हो और आप अनभिज्ञ होंI यही छोटी मात्रा का रिसाव गर्भ की वजह बन सकता हैI

2 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना आसान क्रिया है
यह सुनने में आसान भले ही लगता हो, लेकिन असल में उतना आसान नहीं है, खासकर उनके लिए जो हाल ही मैं ये तरीका अपनाने लगे हैंI इसके लिए दोनों साथियों में सही तालमेल की ज़रूरत होती हैI अनचाहे गर्भ के खतरे से सुरक्षा के लिए ज़रूरी है की आप कोई और विश्वसनीय तरीका अपनाएंI

3 : सही समय पर लिंग खींच लेने के लिए पुरुषों पर भरोसा किया जा सकता है
वो जोड़े जिनमे आत्म-नियंत्रण, अनुभव और विश्वास हो, इस तरीके का उपयोग सही तरीके से कर सकते हैंI अगर तीनो में से एक भी चीज़ की कमी हो तो बेहतर है की कोई और तरीका अपनाया जायेI जो पुरुष इस तरीके का प्रयोग करते हैं, उन्हें इस बात का सही अंदाज़ा होना चाहिए की कब उनका स्खलन होने वाला है, क्यूंकि गलती की गुंजाइश बहुत काम हैI इसलिए यह तरीका अनुभवहीन या शीघ्रपतन से जूझ रहे पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं हैI क्यूंकि अगर सही समय पर लिंग बाहर न निकला जाये तो गर्भ ठहर सकता हैI

4 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कारगर नहीं है
इस तरीके को अक्सर असरदार तरीका नहीं मन जाता जबकि सच ये है की 60 प्रतिशत जोड़ों ने इसका प्रयोग कभी न कभी ज़रूर किया हैI
हालाँकि गटमाकर संस्थान, न्यू यॉर्क द्वारा की गयी रिसर्च से पता चलता है की अगर लिंग को सही समय बाहर निकल लिया जाये तो अनचाहे गर्भ से 96 फ़ीसदी तक बचा जा सकता हैI कंडोम की मदद से इस बचाव की संख्या है 98 फीसदीI ज़्यादा फर्क नहीं, है ना?
सही तरीके से अंजाम दिया जाये तो ये अवश्य एक कारगर तरीका हो सकता हैI बात ये है की हर बार इसे सही अंजाम देना शायद आसान नहीं हैI लेकिन फिर भी, कोई तरीका इस्तेमाल ना करने से बेहतर ये तरीका ही हैI

5 : इसका प्रयोग सिर्फ गैर ज़िम्मेदार लोग करते हैं
हाल ही के एक अमरीकी अध्यन से पता चलता है की 5 फीसदी लोग गर्भ से बचाव के लिए केवल इसी तरीके का प्रयोग करते हैं, 15-44 साल की 60 फीसदी महिलाओं ने इस तरीके का इस्तेमाल कभी ना कभी किया हैI कहानी का सार ये है कि हर उम्र के लोग गर्भ से बचने के लिए इसका प्रयोग करते हैंI

6 : रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु नहीं होते
हर पुरुष को जाने अनजाने में थोड़ा वीर्य का रिसाव हो सकता हैI कई रिसर्च इस बात कि पुष्टि करती हैं कि रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु मौजूद नहीं होते, लेकिन ये रिसाव पहले के बचे हुए वीर्य के साथ बाहर आकर गर्भ का कारण बनने में सक्षम अवश्य हैI इसलिए बेहतर है कि सेक्स से पहले पेशाब किया जाये और लिंग को अच्छी तरह धोकर साफ़ किया जायेI

7 : इस तरीके के इस्तेमाल से सेक्स संक्रमण का खतरा नहीं है
नहीं! इस तरीके से सेक्स संक्रमण का खतरा पूरी तरह से हैI कंडोम ही सेक्स संक्रमण से बचने का सही तरीका हैI

8 : किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं
किताबी तौर पर तो किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं हैI लेकिन फिर भी, सेक्स से पहले यह बेहतर होगा कि पेशाब के ज़रिये बचा खुचा शुक्राणु वाला वीर्य फ्लश कर दिया जायेI लिंग को साफ़ कर लिया जायेI यदि स्खलन महिला के शरीर के ऊपर किया गया है तो उसे भी अच्छी तरह से साफ़ कर लेना ज़रूरी है.
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छोटे या बड़े स्तनों की समस्या


अधिकतर महिलाएं छोटे या बड़े स्तनों की समस्या को लेकर परेशान रहती हैं आइए जानें इनसे जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में

कारण
हॉर्मोन्स में गड़बड़ी होना, अनियमित मासिक धर्म, आनुवांशिकता, कुपोषण, लंबी बीमारी, आर्थिक समस्या, परदे में रहना, भय, अत्यधिक शारीरिक श्रम, कम उम्र में शादी हो जाना आदि कारणों से स्तन छोटे रह जाते हैं। वहीं अधिक सेक्स चिंतन, अश्लील पुस्तकें पढ़ना, अश्लील फिल्में देखना छोटी उम्र में शारीरिक संबंध स्थापित कर लेना आदि कारणों से स्तन बड़े हो जाते हैं।
स्तनपान की सही वैज्ञानिक विधि की जानकारी न होने पर शिशु को गलत तरीके स्तनपान कराने वाली महिलाओं के स्तनों का आकार भी बिगड़ जाता है और स्तन ढीले होकर लटक जाते हैं। ब्रा का चयन गलत होने पर भी स्तन के आकार-प्रकार पर प्रभाव पड़ता है। स्तन के निपल के आस-पास का भाग श्याम रंग की संवेदनशील त्वचा से ढका होता है। उचित देखभाल के अभाव में इस हिस्से पर मृत कोशिकाएं एकत्रित हो जाती हैं, जिसकी वजह से यहां की त्वचा कड़ी और खुरदरी हो जाती है और स्तनों का सारा सौंदर्य नष्ट हो जाता है।

घ्यान दें
स्तन छोटे रह जाने पर उन्हें बड़ा करने के लिए विटामिन युक्त संतुलित पौष्टिक आहार लें।
तैरना, रस्सी कूटना, रॉड पकड़कर झूलना स्तन के संतुलित विकास के लिए व्यायाम है।
सही नाप की ब्रा पहनें। ब्रा न अधिक ढीली हो न ही अधिक कसी हुई हो।
गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि वे सही नाप से एक नंबर बड़े आकार की ब्रा पहनें।
रात को सोते समय ब्रा को अवश्य उतार दें ताकि स्तन दिन भर के कसाव से मुक्त हो सकें।
नायलॉन या टेरीकॉट की ब्रा पहनने से बचें। इससे स्तनों पर संक्रमण होने का खतरा रहता है। हमेशा सूती कपड़े की ब्रा ही पहनें।
गहरे व काले रंग की ब्रा न पहनें। इससे कैंसर होने की संभावना रहती है।
शिशु को स्तनपान कराते समय उसके सिर को हथेली पर रख लें, जिससे स्तन पर खिंचाव न पड़े।
स्तन को दबा-दबाकर दूध निकालकर न पिलाएं। इससे स्तन ढीले हो जाते हैं।
शिशु को दूध पिलाने के बाद निपल को पानी से धो लें, जिससे किसी प्रकार का संक्रमण होने का डर न रहे।
स्तनों को दबाकर स्वयं जांच करती रहें कि कोई गांठ तो नहीं उभर रही है। यदि गांठ दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
स्तनों के आकार-प्रकार और रंग में तेजी से कोई परिवर्तन दिखाई देने पर भी तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सौंदर्य के उपाय
स्तनों पर ठंडे पानी की बौछारें दें। इससे स्तनों की कोशिकाओं में रक्त संचार अच्छी तरह होगा और स्तनों का विकास सही ढंग से होगा।
स्तनों को गुनगुने पानी से धोएं। इसके तुरंत बाद ठंडे पानी से धोएं। ऎसा पांच-छह बार करें। तापमान के जल्दी से बदलने से स्तनों की कोशिकाओं में तेजी से रक्त संचार होता है और स्तन विकसित होते हैं।
रात्रि में सोते समय बादाम या जैतून के तेल की स्तनों पर गोल-गोल घुमाकर मालिश करें। बादाम या जैतून के तेल में पाए जाने वाल तžव विटामिन ए, ई, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और एमिनो एसिड स्तनों को पुष्ट बनाते हैं। उनका विकास करते हैं और स्तनों की त्वचा को सुंदर व मुलायम बनाए रखते हैं।
दो चम्मच भैंस के गाढ़े दूध में एक चम्मच बादाम का तेल मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। इससे स्तनों की मालिश करें। मालिश उंगलियों के पोरों से बहुत धीरे-धीरे गोलाई में नीचे से ऊपर की ओर उंगलियां घुमाते हुए करें।
निपल के पास की त्वचा कड़ी व खुरदरी हो जाने पर एक चम्मच गुड़, आधा चम्मच मलाई, आधा चम्मच जैतूून का तेल और गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को कड़ी और खुरदरी त्वचा पर लगाएं। सूख जाने पर ठंडे पानी से धो लें। यह उपचार सप्ताह में दो बार करें। यह पेस्ट निपल के आस-पास जमी मृत कोशिकाओं को आसानी से निकालकर खुरदरापन दूर कर देता है और त्वचा मुलायम व खुबसूरत बनाता है।
किसी-किसी महिला के स्तनों के निपल अंदर की ओर रह जाते हैं। ऎसी स्थिति में प्लास्टिक की एक बोतल में गरम पानी भरें। फिर इसे खाली कर दें। बोतल में भाप रह जाएगी। अब बोतल के मुंह में निपल को डालकर, बोतल को इस तरह से दबाकर रखें, जिससे बाहर की हवा अंदर न जा सके। जैसे-जैसे बोतल की भाप ठंडी होती जाएगी, वैसे-वैसे निपल बाहर की ओर खिंचता जाएगा। बोतल ठंडी होने पर हटा दें पांच-छह बार ऎसा करें यह उपाय नियमित करने से अंदर की ओर धंसे निपल बाहर निकल आते हैं.....
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सेक्स का पहाड़ा पढ़ने वाले पुरुष इसे भी जाने क्या चाहती है स्त्री


सुबह की पहली किरण के साथ शुरू और और चन्द्र की अंतिम विदाई तक ही सेक्स का पहाड़ा पढ़ने वाले पुरुष इसे भी जाने क्या चाहती है स्त्री
पुरुष की उर्जा का केंद्र मूलाधार चक्र ( कामकेंद्र) होता है ,स्त्री का उर्जा केंद्र ह्दय होता है , पुरुष की अपेक्षा स्त्री काम केंद्र से तीन चक्र उपर होती है , स्त्री की मांग हमेशा प्रेम की ही होती और पुरुष की मांग हमेशा काम की होती है ,पुरुष की उर्जा स्थूल होती है इसीलिए पुरुष हमेशा स्थूल वस्तु को एक ही झटके में उठाना , धक्का मारना ,उसके लिए सरल होता है स्त्री के लिए ममता प्रेम जैसे कार्य सरल होते है , स्त्री की साधना ह्दय से उपर उठने की होती है और पुरुष की साधना काम से ह्दय की ओर उठने की होती है वे मुर्ख गुरु है जो पुरुषो की साधना स्त्रियों को कराते है ! एसा भी नही की स्त्री भी काम केंद्र स्थिर नही होती होती है लेकिन उसकी संख्या कम और पुरुषो की स्थति ठीक विपरीत होती है ! जो स्त्री काम केंद्र पर स्थिर होती है उसे हमेशा पर पुरुष अच्छे लग सकते है इसी लिए किसी भी स्त्री को परपुरुष गमन अपवित्र समझा है और पुरुष हमेशा परस्त्री की ही ताक में बेठे हुए होते है अपनी पत्नी चाहे कितनी भी सुंदर हो लेकिन कामुक स्त्री की और ज्यादा आकर्षित होंगे क्योकि उसका काम आवेग वह कामुक स्त्री ही बढ़ा सकती है
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कंडोम हमेशा जरूरी, उसे ना मत कहें


पुरुषों के पास कंडोम का इस्‍तेमाल न करने के सौ बहाने होते हैं। अधिकांश पुरुष यह सोचते हैं कि कंडोम के इस्‍तेमाल से सेक्‍स का मज़ा फीका पड़ जाता है। लेकिन यदि आप गर्भधारण नहीं चाहती हैं और आपका ब्‍वॉयफ्रेंड कंडोम के इस्‍तेमाल से इनकार करता है, तो आप क्‍या करेंगी।
क्‍या उसकी बातों में आ जाएंगी? नहीं कतई नहीं। जब आपका ब्‍वॉयफ्रेंड कंडोम से इनकार करे, तो आपके पास उसकी सारी बातों के जवाब होने चाहिए।
सबसे पहले वो कहेगा कि कंडोम से सेक्‍स का मूड नहीं बनता, तब आप कहिए, "बिना कंडोम के मेरा मूड नहीं बनेगा, क्‍योंकि उसके बिना मैं असुरक्षित महसूस करूंगी"। जब ब्‍वॉयफ्रेंड कहे कि मुझे उससे मज़ा नहीं आता, तो आप कहिए, "मुझे तब तक अच्‍छा नहीं लगेगा, जब तक यह सुनिश्चित नहीं कर लूंगी कि हम दोनों सुरक्षित हैं।"
यदि वो यह कहे कि इससे वो असहज महसूस करता है, तो आपका जवाब होगा, "अपने साइज़ का कंडोम लेकर आओ।" यदि वो कहे कि मैंने कभी कंडोम के साथ सेक्‍स नहीं किया, तो आप कहें, "तो फिर तुम्‍हें एचआईवी एड्स जैसी यौन संक्रमित बीमारियों का खतरा ज्‍यादा है।" यदि वो यह कहे कि तुम गर्भनिरोधक गोली खा लेना, तो आपका जवाब होना चाहिए, "गर्भनिरोधक गोलियां यौन संक्रमित बीमारियों को नहीं रोकतीं।" वो कहे कि मुझ पर विश्‍वास करो कुछ नहीं होगा, तो आप का जवाब होगा, "मैं कैसे विश्‍वास करुं, क्‍या होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं।"
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गर्भ कैसे ठहरता है? गर्भाधान या फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया क्या है?


गर्भ की प्रक्रिया समझने के लिये स्त्री के प्रजनन अंगों को समझना जरुरी है। स्त्री के प्रजनन अंगों को चार भागों में बांटा गया है- ओवरी, डिम्बवाहिनी नली, गर्भाशय और योनि। ओवरी बादाम की तरह और लगभग उसी के आकार की दो ग्रथियां होती हैं। स्त्रियों में मौजूद इन्हीं ओवरियों में मनुष्य को जन्म देने वाले लगभग चार लाख जीवित अण्डे किशोरावस्था के आने तक सुप्त अवस्था में पड़े रहते हैं। प्रथम मासिक-धर्म के शुरू होते ही इस बात की सूचना मिल जाती है कि लड़की अब किशोरी हो गई है। इसके साथ ही उसके संपूर्ण संतानोत्पादक अंग सचेत होकर अपने-अपने कार्य में जुड़ जाते हैं। किशोरावस्था के आरंभ होते ही ओवरी में सोए हुए अंडे सचेत होकर बाहर निकलने का प्रयास करने लगते हैं। साधारणः लगभग 28 दिनों के अंतराल से दोनों ओवरियों में से किसी एक ओवरी में एक साथ कई अंडे पकने शुरू हो जाते हैं, लेकिन अंतिम रूप से केवल एक ही अंडा पककर बाहर निकलने योग्य हो पाता है, बाकी सब सूखकर बेकार हो जाते हैं
मासिक धर्म के बाद लगभग 10 दिनों तक यह अंडा ओवरी के अंदर अपनी छोटी सी पुटिका में बंद होकर पुटिका सहित बढ़ता रहता है। अंत में यह ओवरी के ऊपरी सतह पर उभरकर एक छोटा सा छाला बनकर दिखता है। पक जाने पर यह पुटिका फट जाती है और पका हुआ अंडा ओवरी से अलग हो जाता है। स्त्री की संपूर्ण आयु में लगभग 30 वर्षों तक प्रति माह एक अंडा (डिम्ब) ओवरी से बाहर निकलता है। इस प्रकार ओवरी के अंदर कुल चार लाख अंडों में से केवल 400 या 445 अंडे ओवरी से बाहर निकलते हैं। बाकी अंडे पूरी तरह न पक सकने के कारण नष्ट हो जाते हैं या उनके पकने की कभी बारी ही नहीं आती।
यह निश्चित करना असंभव है कि किस ओवरी से अंडा पककर बाहर निकलेगा। एक माह में दोनों ओवरियों से साथ-साथ अलग-अलग अंडे पककर निकल सकते हैं। प्रत्येक ओवरी के निकट ऊपर की ओर मांस की एक पतली सी नली होती है- लगभग साढ़े पांच इंच लंबी। इसे डिम्बवाहिनी नली या फेलोपिन ट्यूब कहते हैं। इन नलियों का एक-एक सिरा ओवरी के समीप होता है। इसके साथ ही इन सिरों में से अनेक रेशे जैसे लटकते रहते हैं। इन नलियों के दूसरे सिरे कुछ पतले होकर गर्भाशय के ऊपर की ओर आकर दाएं-बाए मिल जाते हैं। ओवरी से ज्यों ही पका हुआ अंडा बाहर निकलता है, डिम्बवाहिनी के सिरे पर झूमते हुए रेशे उस अंडे को हाथी की सूंड की तरह पकड़कर नली के मुख छिद्र में डालकर अंदर धकेल देता है
अब यह डिम्ब लहराती हुई नली से रोमाभ (रोम की तरह बाल के रेशे) की पकड़ में आ जाता है। यह रोमाभ इस नए मेहमान को आदर सहित धीरे-धीरे धकेलकर नली के दूसरी ओर गर्भाशय में प्रवेश कराने के लिए आगे बढ़ाते रहते हैं। डिम्बवाहिनी नली की यात्रा पूर्ण करने में प्रायः 3 से 6 दिन तक का समय लग सकता है। ओवरी के अंदर रहकर ज्यों-ज्यों अंडे का विकास होता रहता है, स्त्री की कामवासना दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है। जिस दिन डिम्ब, ओवरी को फोड़कर बाहर निकलता है, उस दिन विशेष रूप से कुछ अधिक बेचैनी अनुभव होती है जो प्रायः 2-3 दिन में ठंडी पड़ जाती है
इसका कारण यह है कि पके हुए अंडे यानी डिम्ब में पूर्णता प्राप्त करने के लिए पुरुष के वीर्य में उपस्थित स्पर्म से मिलने की इच्छा होती है जो स्त्री की कामुक भावना से स्पष्ट होती है। मासिक-धर्म के प्रायः 10 दिन बाद डिम्ब ओवरी से बाहर निकलता है जिसे ओवूलेशन क्रिया कहते हैं। इस दिन यदि वह स्त्री किसी पुरुष से समागम करती है तो पुरुष के वीर्य में उपस्थित करोड़ों स्पर्म किसी न किसी तरह गर्भाशय के मुख छिद्र में प्रवेश कर ऊपर डिम्बवाहिनी नलियों में पहुंच कर वहां पहले से उपस्थित पके हुए डिम्ब से मिल जाने का प्रयत्न करते हैं। इन शुक्राणुओं का शरीर बहुत सूक्ष्म धागे की तरह होता है। इसके 2 भाग होते हैं- एक सिर तथा दूसरा पूंछ।
यह शुक्राणु इतने छोटे और चंचल होते हैं कि इनके लिए 5 या 6 इंच की यह छोटी सी यात्रा कठिन प्रतीत होती है। इस कठिन परिस्थिति में एक शुक्र के शायद जीवित बचने की आशा करना व्यर्थ है। इस बात को ध्यान में रखकर प्रकृति भी इस कठिनतम परीक्षा के लिए एक साथ करोड़ों शुक्राणुओं को निमंत्रण देती है। जीवन-मरण की इस दौड़ में शायद एक या दो शुक्राणु सफल हो पाते हैं क्योंकि योनि से लेकर डिम्बवाहिनी नली तक के मार्ग में अनेक बाधाएं इन नन्हे यात्रियों के प्राण ले लेती हैं।
सबसे पहले समागम के समय ही योनि के अंदर चारों तरफ की दीवारों में छिपी ग्रंथियों से एक तरल व चिकना पानी जैसा द्रव निकला करता है। इस द्रव में तेजाब के गुण होते हैं। वीर्य के साथ जो शुक्राणु योनि में आ जाते हैं, उन्हें यहां आते ही सबसे पहले तेजाब सागर में गोते लगाने पड़ते हैं जिससे अधिकांश शुक्राणु तो यहीं मौत के घात उतर जाते हैं जो थोड़े बहुत किसी तरह जीवित बच जाते हैं, वे शीघ्रता से गर्भाशय के मुख छिद्र द्वारा अंदर प्रवेश कर जाते हैं। इन शुक्राणुओं को डिम्बवाहिनी नली तक पहुचने के लिए चारों ओर चिपचिपी दीवार, पहाड़-पहाड़ियों की तरह उभरी हुई मांस की गद्दियों और चिपचिपे तरल पदार्थों की झीलों को पार करना पड़ता है।
इस शुक्राणुओं को अंडे तक पहुंचने में डेढ़-दो दिन का समय लग जाता है। यदि ओवूलेशन क्रिया के बाद के 1-2 दिन में ही स्त्री किसी पुरुष से मिलाप नहीं कर पाती तो गर्भाधान का प्रश्न नहीं उठता, क्योंकि बाद में डिम्ब में अपनी नली से निकलकर गर्भाशय में पहुंचकर शुक्राणुओं से मिलने की शक्ति नहीं रहती। जैसे ही कोई शुक्राणु नली के इस छोर पर इंतजार करते हुए अंडे के पास पहुंचता है, वैसे ही वे दोनों अपनी परस्पर आकर्षक शक्ति के कारण इतनी व्याकुलता और व्यग्रता से आलिंगन करते हैं कि देखते ही नन्हा-सा शुक्राणु अपने तीर जैसे नुकीले सिरे को डिम्ब की खाल में गड़ाकर किसी तरह घूम-घूमकर दीवार में छेद करता हुआ अंदर घुस जाता है। अंडा शुक्राणु को अपने में आत्मसात कर लेता है। बस इस क्रिया को गर्भाधान या अंग्रेजी में फर्टिलाइजेशन कहते हैं। अब इस गर्भित अंडे में अनेक नए परिवर्तन होने लगते हैं और तब यह अंडा शीघ्रता से एक जगह जमकर बैठने के लिए उपयुक्त स्थान की खोज करता हुआ डिम्बवाहिनी नली से बाहर निकलकर गर्भाशय में प्रवेश करता है।
गर्भाशय के चारों ओर मुलायम मांस की रस भरी गद्दियां बनकर बिछ जाती हैं ताकि गर्भिक अंडे को कहीं भी जमकर अंकुरित होने की सुविधा मिल सके। इसके अतिरिक्त ओवरियों को भी गर्भाधान की सूचना तुरंत मिल जाती है। जिससे इन ओवरियों में अगले 9 महीने अंडे का पककर निकलना बंद हो जाता है और न ही कोई शुक्राणु अंदर आ पाता है। मासिक-धर्म का क्रम भी रुक जाता है। स्त्री गर्भवती हो जाती है
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शादी के बाद ये बाते कभी भी भूल के न करे अपने पति या प्रेमी से शेयर



आज आपसी रिश्तों का टूटना आम हो गया हैं. इसलिए एक रिश्ता टूटने के बाद अगर किसी और से रिश्ता बनता है या कोई और व्यक्ति आपके जीवन में आता हैं तो अपने दूसरे पार्टनर को पहले वाले रिलेशनशिप के बारे में सोच समझकर बताएं.
क्योंकि अगर आपने पहले वाले पार्टनर कि तारीफ कर दी तो इससे आपकी छवि पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है या आपकी छवि खराब हो सकती हैं.
अपने पहले के समय के बारे में सबकुछ बताने से बचें. आपको अपने पूर्व प्रेमी के बारे में खुलकर बात करने की जरुरत नहीं है.
रिश्तों की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि निम्न तीन बातों के बारे में अपने वर्तमान प्रेमी से कभी कोई बात शेयर ना करें.

कितने लोगों के साथ डेट किया है
जब आप अपने प्रेमी के साथ घूमने गए है तो इस बात का जिक्र बिल्कुल न करें कि आप इससे पहले कितने लोगों के साथ घूमने जा चुकी हैं. क्योंकि अगर आपने उसे अपने भूतकाल के बारे में बताया तो आपका ब्वॉयफ्रेंड यह सोचेगा कि आप अपने रिश्तों के प्रति गंभीर नहीं है और मिलने के बहाने टाइम पास करती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि इस विषय पर किसी तरह कि चर्चा न करे. अपने नए प्रेमी के साथ नई जगहों पर घूमने जाएं.

शारीरिक संबंधों की बात करने से बचें
अपने ब्वॉयफ्रेंड से कभी भी उसके भूतपूर्व प्रेमी के साथ बिताए गए अंतरंग पलों की चर्चा कभी न करें. अपनी पूर्व की खूबियों का बखान करने से बचें. ऐसा इसलिए जरुरी हैं क्योंकि ऐसा सुन कर आपका प्रेमी भड़क सकता है और इससे उसका विश्वास भी टूट सकता है. अपने प्यार को परखने के बाद ही कुछ कदम बढाएं.

दोस्तों से ज्यादा हैंडसम हो तुम
अगर आप अपने प्रेमी की तारीफ करती हैं तो उनका मोरल बूस्टअप होता है. इसलिए अपने प्रेमी की तारीफ करना कभी न भूले और न ही उसके तारीफ करने में कोई कसर न छोड़े. अपने प्रेमी की तुलना उसके दोस्तों से करें और उसकी तारीफ करते हुए कहें कि अपने दोस्तों में वहीं सबसे हॉट और सेक्सी है इसलिए आपने उससे दोस्ती की है. इगो मसाज से बिगड़ते रिश्ते वापस बन जाते है. कभी भी आपने एक्स ब्वॉयफ्रेंड की तारीफ न करें. इसके अलावा उसके पहनावे और कपड़ों की भी तारीफ न करें. हो सके तो अपने पूर्व प्रेमी के दोस्तों से भी कोई रिश्ता न रखे.

ये बातें पति से छुपाएं ...
रिश्ता चाहे कोई भी हो, इसकी डोर बेहद नाजुक होती है और इसे न सिर्फ टूटने से बल्कि इसमें गांठ पडने से भी बचाना जरूरी होता है। और बात जब पति-पत्नी जैसे अहम्र रिश्ते की हो, तो यह डोर और भी नाजुक हो जाती है। एक बार प़डी गांठ कभी नहीं खुलती, हमेशा की तकलीफ का सबब बन जाती है। इस तकलीफ से बचने का एक तरीका ये है कि कुछ राज की बातें हमेशा अपने सीने में ही दफन रखें, उन्हें अपने पति से कभी शेयर न करें।

सहेली के राज
आप अपनी पक्की दोस्त यानी सहेली की जिंदगी की रहस्य की बातें कभी अपने पति को न बताएं। इससे आप सहेली का सम्मान और दोस्ती की विश्वसनीयता बनाए रखती हैं। वैसे भी आपकी सहेली के निजी मसलों से आपके पति का कोई लेना-देना नहीं होता है। बेवजह सब कुछ बता देने की ईमानदारी के चक्कर में न प़डें। आपके पति भी अपने करीबी दोस्तों के राज आपसे छुपा कर रखते हैं। दूसरी तरफ, अपनी सबसे अच्छी सहेली के राज पति से शेयर करने से नुकसान आपको ही होता है। आपका साथी सोच सकता है कि आपमें एक भरोसेमंद दोस्त के गुण नहीं है।

मंगेतर को बताऊं या नही
ऎसे मामलों में आप अपने दोस्त का भरोसा कभी न तोडें। सहेली ने आप पर विश्वास करके अपने राज आपसे शेयर किए हैं। दूसरी बात, आपके मंगेतर या पति अपने दोस्तों को ये बात बता सकते हैं और बात फैल सकती है। तीसरी बात, आपके पति/मंगेतर के मन में आपकी सबसे अच्छी सहेली के प्रति गलत भावना बैठ सकती है और वे संभवत:आपकी सबसे अच्छी दोस्त को सम्मान की नजर से देखना बंद कर दें, जो आपके लिए भी बेहद तकलीफदेह होगा और अंतत: इसका असर आप दोनों के आपसी संबंधों पर पडने लगेगा।

प्रभावित होते आपसी रिश्ते
अगर आपको लगता है कि अपने पति/मंगेतर की नजर में आप तो अच्छी-भली हैं, इसलिए आपके दोस्तों की जिंदगी के रहस्यों से आप दोनों पर भला क्या असर पडेगाक् तो आप गलत हैं। कई बार, कुछ महिलाएं या ल़डकियां अपने पति/मंगेतर की नजर में अपनी किसी खास सहेली का आकर्षण कम करने के लिए भी इस रास्ते का सहारा लेने की कोशिश करती हैं, यह पूरी तरह गलत है। ऎसा कभी न करें। इससे आपके पति/मंगेतर की नजर में खुद आपका सम्मान घट सकता है जिसका असर आप दोनों के आपसी रिश्ते पर पडेगा।

राज ही रहें परिवार के राज
इस तकलीफ से बचने और अपने रिश्ते को ऎसी खरोंच लगने से बचाने का तरीका यही है कि आप इस बात को समझें कि हर परिवार के कुछ अपने रहस्य होते हैं जिन्हें राज ही रहने दिया जाता है। आप दो परिवारों के बीच की एक कडी हैं और आपको दोनों परिवारों की राज की बातों को अलग-अलग ही रखना है। याद रखें, आप दोनों भी एक परिवार की शुरूआत करने जा रहे हैं और आगे चलकर इस तीसरे परिवार के भी कुछ अपने रहस्य होंगे। इसलिए बेहर यही होगा कि आप इसी तीसरे परिवार की फिक्र करें। यानी अपने पति/मंगेतर के साथ रिश्ते की मधुरता को बनाए रखें। हर परिवार के कुछ अपने राज होते हैं। मान लीजिए, आपके किन्हीं दो रिश्तेदारों के बीच बोलचाल बंद है तो आपको पति से सिर्फ इतना ही कहना चाहिए कि दोनों आपस में बात नहीं करते। वजह न बताएं, ताकि किसी पारिवारिक कार्यक्रम में उनसे मुलाकात होने की स्थिति में आपके पति उनके साथ सहजता से पेश आ सकें। इससे अपने पति को खुद ही राय बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही आपके पारिवारिक सदस्यों से पहली मुलाकात में आपके पति को किसी असहजता का सामना नहीं करना पडेगा।

पैसे का राज
अनुसंधान बताते हैं कि पति-पत्नी के बीच होने वाले झग़डों में 60 प्रतिशत से ज्यादा झगडे पैसे की वजह से होते हैं। इसलिए उपचार से परहेज भला की तर्ज पर आप पहले से ही अपने पैसों का हिसाब-किताब अलग रखें।

अलगाव की स्थिति
अपने पीआईएन नंबर या पासवर्ड एक-दूसरे को बताने में कोई तकलीफ नहीं है। आपको अपने साथी पर पूरी तरह विश्वास है, फिर भी कुछ कॉन्फिडेंशियल चीजें सिर्फ अपने तक ही रहनी चाहिए। यह मामले की कॉन्फीडेन्शियल चीजों की सूची में आता है। कई बार रिश्ता टूटने की नौबत भी आ जाती है। ऎसे में आपकी आर्थिक सुरक्षा में खुद आपका साथी ही सेंध लगा सकता है। दंपतियों में अलगाव होने के कई मामलों में ऎसा देखा गया है।

कारोबारी राज
आप एक कामकाजी महिला हैं तो निश्चित रूप से कुछ कारोबारी राज भी आपके पास होंगे। एक प्रोफेशनल को अपने-अपने काम की गोपनीय बातों को अपने तक ही रखें, पति से शेयर न करें।

अतीत का इश्क
कई बार जिंदगी ऎसे रंग भी दिखाती है कि जिससे आपने प्यार किया, उससे शादी नहीं हुई। ऎसे में अपने मंगेतर या पति से अतीत के राज बताने या छुपाने की जद्दोजहद खडी होती है। इस कशमकश में न पडें। बीता हुआ वक्त वापस नहीं आता और अतीत मुर्दे के समान होता है। बेहतरी इसी में है कि गडे मुर्दे न उखाडे जाएं, वरना अतीत का असर वर्तमान और उससे भी ज्यादा भविष्य को बर्बाद कर सकता है। वर्तमान में जीएं वर्तमान ही सच है-इस तथ्य को सीने से लगा लें। हो सकता है, आप मानती हों कि अपने साथी से कोई भी राज नहीं छुपाना अच्छा होता है,पर इसका नतीजा आपसी गलतफहमी और रिश्ते की पेचीदगी में इजाफा कर सकता है। चाहे अपना साथी आपके कितना भी करीब हो, अतीत के प्रेम-प्रसंग उससे हमेशा छुपा कर ही रखें। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आपने कल क्या किया था, बल्कि यह है कि आप दोनों का आज और आने वाला कल हमेशा सुखद बना रहे। इसलिए अतीत की छाया को अपने और अपने साथी के वर्तमान और भविष्य पर न पडने दें।

पर-पुरूष के प्रति आकर्षण
कई बार ऎसा भी होता है कि आप अपने पति या प्रेमी के किसी दोस्त की तरफ खास आकर्षण महसूस करते हैं। यह बात अपने पति, या मंगेतर से कभी न कहें। आप उनके प्रति चाहे जितना समर्पित हों, उनके किसी दोस्त की खूबसूरती की तारीफ करने का एक ही अर्थ होगा कि आप उस शख्स की तरफ आकर्षित हैं, यह बात आपके पति या मंगेतर को पसंद नहीं आएगी और आप दोनों के बीच तनाव तो बढेगा ही, हो सकता है कि उन दोनों की दोस्ती भी खतरे में पड जाए।

पति के दोस्त की तारीफ न करें
पति या मंगेतर के किसी दोस्त की तारीफ का वे एक ही अर्थ लेते हैं कि कहीं आप उनके दोस्त के प्रति आकर्षित तो नहीं हैक् यह उन्हें असुरक्षित और कमतरी का एहसास कराता है जो आपके वैवाहिक जीवन के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। कुल मिलाकर,आखिर आपके मंगेतर या पति भी यही तो चाहते हैं कि आप दोनों का साथ हमेशा अटूट,सुरक्षित और सुखद बना रहे। इसमें उनका सहयोग कीजिए और ये राज की 6 बातें उनसे कभी शेयर मत कीजिए ताकि एक-दूसरे के साथ आप दोनों पूरी जिंदगी भरपूर प्यार से बिता सकें।

ये बातें जरूर बताएं
जहां चंद मुलाकातों में ही अपने साथी को अपनी तमाम निजी बातें बताना बिल्कुल जरूरी नहीं है, वहीं कुछ बातें ऎसी भी हैं जिन्हें किसी शुभ मुहूर्त का इंतजार किए बगैर आप तुरन्त बता दें (वरना हो सकता है कि आप खुद को दोषी महसूस करने लगें) खासकर तब, जब आप दोनों ने एक साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया हो-

अपनी तात्कालिक और आनुवांशिक बीमारियों के बारे में (क्योंकि आगे चलकर आप दोनों को बच्चो भी पैदा करने हैं) क गायनेकोलॉजिकल समस्याएं, जैसे-एसटीडी, पॉलिसिस्टिक ओवेेरियन सिन्ड्रोम आदि।
जो दवाएं आप नियमित रूप से लेती हैं और इमरजेंसी में आपके पार्टनर को क्या करना चाहिए, यह जरूर उन्हें बता दें।
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महिलाओं से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें


 
कामेच्छा में कमी- 
बहुत-सी महिलाओं को सेक्स की चाहत ही नहीं होती। अगर वे पार्टनर के कहने पर तैयार होती हैं तो भी बिल्कुल ऐक्टिव नहीं हो पातीं। बस अपनी ड्यूटी समझकर 'काम' निबटा देती हैं। बच्चे होने के बाद यह समस्या ज्यादा होती है। 

वजह : डिप्रेशन, थकान या तनाव की वजह से यह दिक्कत हो सकती है। कई बार बचपन की किसी बुरी घटना की वजह से भी सेक्स में दिलचस्पी खत्म हो जाती है। इसके अलावा कुछ और वजहें भी सकती हैं, मसलन पार्टनर जिस तरह छूता है, वह पसंद नहीं आना, उसके शरीर की महक नापसंद होना, उसे बहुत ज्यादा पसीना आना, उसके मुंह से पान-तंबाकू वगैरा की बदबू आना आदि। कई महिलाओं को शरीर के कुछ खास हिस्सों पर हाथ लगाने से दर्द महसूस होता है या अच्छा नहीं लगता। इससे भी वे सेक्स से बचने लगती हैं। 

इलाज : पार्टनर को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि साथी महिला को क्या पसंद है और क्या नापसंद। उसी के मुताबिक आगे बढ़ना चाहिए। फोरप्ले में ज्यादा वक्त बिताना चाहिए। इससे महिला मानसिक और शारीरिक रूप से अच्छी तरह तैयार हो जाती है। जब एक्साइटमेंट ज्यादा हो, तभी आगे बढ़ना चाहिए। अगर डिप्रेशन की वजह से दिक्कत है तो पहले उसका इलाज कराएं। डिप्रेशन से मुक्त होने पर ही कामेच्छा जागेगी। 'सेंसेट फोकस एक्सरसाइज' या 'प्लेजरिंग सेशन' से काफी फायदा हो सकता है। इस सेशन में स्पर्श पर सारा फोकस होता है और सहवास की मनाही होती है। इसका तरीका यह है कि बारी-बारी से स्त्री व पुरुष एक-दूसरे को प्यार से सहलाएं और एक-दूसरे के शरीर पर उत्तेजना केंद्र खोजें। दोनों एक-दूसरे को बताएं कि उन्हें कहां अच्छा लगता है। इससे महिलाओं की झिझक भी कम होती है। साथ ही परफॉर्मेंस का प्रेशर नहीं होता। वे कपल जिन्हें कोई दिक्कत नहीं है, वे भी तीन-चार महीनों में अगर एक हफ्ते इस सेशन को करें और सहवास से परहेज रखें तो सेक्स लाइफ को ज्यादा इंजॉय कर सकते हैं। 

लुब्रिकेशन की कमी- 
स्त्री जनन अंग में लुब्रिकेशन (गीलापन) को उत्तेजना का पैमाना माना जाता है। कुछ महिलाओं को इसमें कमी की शिकायत हो सकती है। ऐसे में सहवास काफी तकलीफदेह हो जाता है। 

वजह :  लुब्रिकेशन में कमी तीन वजहों से हो सकती है। इन्फेक्शन, हार्मोंस में गड़बड़ी या फिर तरीके से फोरप्ले न होना। अगर जनन अंग में खुजली हो, खून आता हो, कपड़े पर धब्बे पड़ जाते हों या बहुत बदबू आती हो तो इन्फेक्शन हो सकता है। हार्मोंस में गड़बड़ी यानी एस्ट्रोजन की कमी आमतौर पर मीनोपॉज के बाद ज्यादा होती है। पार्टनर का महिला की जरूरत न समझ पाना या फोरप्ले में ज्यादा वक्त न गुजारना भी इसकी वजह हो सकती है। 

इलाज : अगर इन्फेक्शन है या हॉर्मोंस में गड़बड़ी है तो फौरन अच्छे डॉक्टर को दिखाकर इलाज कराएं। हॉर्मोंस वाली दिक्कत अक्सर मरीज को खुद पता नहीं लगती। डॉक्टर जांच के बाद इसका पता लगा पाते हैं। तीसरी वजह है तो पार्टनर से बातचीत और समझ से प्रॉब्लम दूर की जा सकती है। पार्टनर को फोरप्ले में ज्यादा वक्त देना चाहिए क्योंकि यह बहुत अहम होता है। इसी से सेक्स को सही ढंग से इंजॉय किया जा सकता है। 

सहवास में दर्द और वैजिनिस्मस- 
कुछ महिलाओं को सहवास के दौरान दर्द होता है। कई बार यह दर्द बहुत ज्यादा होता है और ऐसे में महिला सेक्स से बचने लगती है। साथी को इस दर्द का अहसास नहीं होता। उसे लगता है कि साथी महिला उसे सहयोग नहीं दे रही। यह दोनों के बीच झगड़े की वजह बनता है। इस प्रॉब्लम को डिस्परयूनिया (पेनफुल इंटरकोर्स) कहा जाता है। अगर पूरे इलाज या सलाह के बिना संबंध बनाने की कोशिश की जाती है तो प्रॉब्लम और बढ़ जाती है। 
वजह : संबंध बनाते वक्त दर्द की वजह लुब्रिकेशन में कमी या सही ढंग से फोरप्ले न होना हो सकता है। कई बार इन्फेक्शन या एंडोमेट्रियोसिस यानी ओवरी में ब्लड जमा होने पर यह प्रॉब्लम हो सकती है। एंडोमेट्रियोसिस के लिए हॉर्मोन थेरपी या फिर जरूरत पड़ने पर लेप्रोस्कोपी भी की जाती है। 

वैजिनिस्मस : 
वैजिनिस्मस का मतलब है किसी बाहरी चीज के स्त्री जनन अंग में जाने का डर। इसमें संभोग की कोशिश या संभावना का आभास मिलते ही महिला जनन अंग के बाहरी एक-तिहाई हिस्से में अनैच्छिक संकुचन आ जाता है। इससे समागम नहीं हो पाता और साथी अगर जबरन कोशिश करता है तो दिक्कत और दर्द दोनों बढ़ जाते हैं। 
वजह : इसके मानसिक कारण होते हैं - जैसे कि कई बार महिला के मन में सहवास को लेकर डर बैठ जाता है कि इस दौरान काफी दर्द होता है। इसके अलावा, किसी तरह की जोर-जबरदस्ती, सेक्स को पाप या गलत समझने और अपने जननांगों को गंदे या बदबूदार मानने की भावना से भी यह परेशानी हो सकती है। 
इलाज : इस परेशानी की कोई दवा या सर्जरी नहीं होती। यह मानसिक बीमारी है और इसे काउंसलिंग से बहुत हद तक सुधारा जा सकता है। पीड़ित महिला के मन से सेक्स संबंधी डर दूर किया जाता है। उसे समझाया जाता है कि जनन अंग इलास्टिक की तरह होता है, जो जरूरत के मुताबिक बढ़ जाता है। इससे उसके दिमाग से काफी हद तक फिक्र निकल जाती है और वह मानसिक तौर पर राहत महसूस करने लगती है। इसके बाद एक खास थेरपी के जरिए जनन अंग को धीरे-धीरे बाहरी चीज के टच के प्रति सहज किया जाता है। फिर डाइलेटर की मदद से ज्यादा जगह बनाई जाती है। इसके लिए कीजल एक्सरसाइज भी की जा सकती है। इसका तरीका यह है कि महिला पेशाब को रोके और छोड़ दे। फिर रोके, फिर छोड़ दे। इस तरह जनन अंग पर उसका कंट्रोल बढ़ जाता है। 

सलाह : डॉक्टर कहते हैं कि संबंध कायम करने के दौरान प्रवेश का काम औरत को ही करना चाहिए क्योंकि उसे ही मालूम है कि वह कब तैयार है। ऐसे में उसे संबंध के दौरान दर्द नहीं झेलना पड़ेगा। 

क्लाइमैक्स न होना या देर से होना- 
महिलाओं में यह शिकायत आम है कि उनका पार्टनर उन्हें संतुष्ट किए बिना ही छोड़ देता है। कुछ को ऑर्गेज्म (क्लाइमैक्स) नहीं होता और कुछ को होता है, पर महसूस नहीं होता। कुछ महिलाओं को लुब्रिकेशन के दौरान ही जल्दी क्लाइमैक्स हो जाता है। कुछ को बहुत देर से क्लाइमैक्स होता है। असल में क्लाइमैक्स के दौरान महिला को अपने जनन अंग में लयात्मक संकुचन महसूस होता है और फिर मन एकदम शांत हो जाता है। लेकिन लयात्मक संकुचन 10 में से 8 महिलाओं को ही होता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि बाकी दो को क्लाइमैक्स नहीं होता। उन्हें भी क्लाइमैक्स होता है, बस अहसास नहीं होता। वैसे, कुछ महिलाओं में पुरुषों की प्रीमैच्योर इजाकुलेशन की तरह शीघ्र क्लाइमैक्स होता है।
वजह : इस समस्या की वजह महिला खुद और साथी दोनों हो सकते हैं। आमतौर पर महिलाओं को लगता है कि अपने पार्टनर को संतुष्ट करना ही उसकी जिम्मेदारी है। इस सोच की वजह से वह अपनी इच्छा बता नहीं पाती। दूसरी ओर, पुरुष भी कई बार खुद संतुष्ट होने के बाद महिला साथी के बारे में सोचता ही नहीं है। 
इलाज : महिला अपनी झिझक खत्म करे और साथी को बताए कि वह संतुष्ट हुई या नहीं। ऐसे मुकाम पर पहुंचना जरूरी है, जहां पूरी तरह संतुष्टि महसूस हो। पुरुष को अपनी पार्टनर की इच्छा समझनी चाहिए। वैसे भी कहा जाता है कि उत्तम पुरुष वह है, जो महिला के कहे बिना ही उसकी बात समझ कर उसे संतुष्ट करे। मध्यम पुरुष वह है, जो कहने पर उसे संतुष्ट करे और अधम पुरुष वह है, जो कहने के बावजूद उसे असंतुष्ट छोड़ दे। 

मीनोपॉज- 
पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पिटल के गाइनिकॉलजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. शारदा जैन के मुताबिक आमतौर पर मीनोपॉज हो जाने पर कुछ महिलाओं में सेक्स की इच्छा काफी घट जाती है। लुब्रिकेशन भी कम हो जाता है। इससे संबंध बनाते हुए तकलीफ होती है। जाहिर है, महिला इससे बचने की कोशिश करने लगती है। 
वजह : हॉर्मोंस में बदलाव की वजह से ऐसा होता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में सेक्स हॉर्मोन का लेवल काफी कम हो जाता है। 
इलाज : फोर-प्ले में ज्यादा वक्त बिताएं। इससे नेचरल लुब्रिकेशन होता है। जरूरत पड़े तो बाहरी लुब्रिकेशन का इस्तेमाल करें। नारियल तेल अच्छा ऑप्शन हो सकता है। जरूरत पड़ने एस्ट्रोजन क्रीम का इस्तेमाल कर सकती हैं। मीनोपॉज हो जाने पर ऐसी डाइट लें, जिसमें एस्ट्रोजन ज्यादा हो जैसे सोयाबीन, हरी सब्जियां, उड़द, राजमा आदि। डॉक्टर की सलाह पर सिंथेटिक एस्ट्रोजन की गोलियां भी ले सकती हैं। 

पीरियड्स के दौरान सेक्स- 
अगर दोनों को इच्छा हो तो पीरियड्स के दौरान भी सेक्स कर सकते हैं, बल्कि कुछ लोग तो इसे ज्यादा सेफ मानते हैं क्योंकि इस दौरान प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते। साथ ही, पहले से ही गीलापन होने से आसानी भी होती है। लेकिन कुछ लोग इसे हाइजिनिक नहीं मानते। ऐसे में कॉन्डोम का इस्तेमाल बेहतर है। 

मास्टरबेशन- 
पुरुषों की तरह महिलाएं भी खुद को संतुष्ट करने के लिए मास्टरबेशन करती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक करीब 50 फीसदी महिलाएं ऐसा करती हैं। इसका कोई नुकसान नहीं है, बल्कि एक्सपर्ट्स इसे बेहतर ही मानते हैं क्योंकि एक तो इसमें प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते। दूसरे इसमें कोई दूसरा शख्स अपनी पसंद-नापसंद को महिला पर थोप नहीं पाता। तीसरा एसटीडी (सेक्स ट्रांसमिटेड डिजीज) और एड्स की आशंका नहीं होती। 

वैजाइनल पेन (वुलवुडेनिया पेल्विक पेन)-
कभी-कभी महिलाओं को नाभि के नीचे और प्यूबिक एरिया के आसपास दर्द महसूस होता है। यह दर्द वैसा ही होता है, जैसा पीरियड्स के दौरान होता है। इसकी वजह यह है कि उत्तेजना होने पर प्राइवेट पार्ट के आसपास खून का बहाव होता है। ऐसे में लुब्रिकेशन होता है, पर क्लाइमैक्स नहीं होता। इससे इस एरिया में खून जम जाता है और दर्द होने लगता है। ऐसे में संतुष्ट होना जरूरी है, फिर चाहे महिला खुद संतुष्ट हो या पुरुष उसे संतुष्ट करे। ऐसा न होने पर दर्द होता रह सकता है और महिला चिड़चिड़ी हो सकती है। 

लेक्स पैरिनियम- 
मैक्स हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुराधा कपूर के मुताबिक उम्र बढ़ने और बच्चे होने के बाद कुछ महिलाओं का जनन अंग ढीला पड़ जाता है, जिससे दोनों को पूरी संतुष्टि का अहसास नहीं होता। आमतौर पर यह समस्या 40 साल के आसपास और दो-तीन बच्चे होने पर होती है। इसके लिए कीजल एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर सर्जरी (वैजाइनोप्लास्टी) की जाती है। चार हफ्ते तक कीजल एक्सरसाइज करने से स्त्री जनन अंग में कसाव आने लगता है। 

जी स्पॉट : 
महिला जनन अंग में एक ऐसा क्षेत्र होता है, जहां सेक्स संबंधी संवेदनशीलता ज्यादा होती है। यह स्पॉट दो इंच की गहराई पर होता है। उत्तेजना बढ़ने पर यह स्पॉट थोड़ा फूल जाता है या कठोर हो जाता है। महिला को सबसे ज्यादा संतुष्टि इसी स्पॉट के छुए जाने पर होती है। 
 
-: मिथ और सचाई :-
महिलाओं को सेक्स की इच्छा कम होती है। 
महिलाओं को भी पुरुषों की तरह ही सेक्स की इच्छा होती है। बच्चे होने के बाद भी कमी नहीं होती हालांकि कई बार परफॉर्मेंस में कमी आ जाती है। इसकी शारीरिक और मानसिक दोनों वजहें होती हैं। 
पहली बार सेक्स करते हुए ब्लड निकलना ही चाहिए। 
लोग मानते हैं अगर महिला वर्जिन है तो पहली बार सेक्स के दौरान इसे ब्लीडिंग होनी ही चाहिए। यह सच नहीं है क्योंकि कुछ खेलकूद या साइकल चलाते वक्त भी कुछ महिलाओं की हाइमेन टूट सकती है। ऐसे में पहली बार सहवास के दौरान ब्लड नहीं निकलता। 
महिलाओं को भी पुरुषों की तरह डिस्चार्ज होता है। 
महिलाओं में पुरुषों की तरह डिस्चार्ज नहीं होता। 100 में से बमुश्किल एक महिला को थोड़ा-बहुत डिस्चार्ज होता है। उत्तेजना के दौरान होने वाले लुब्रिकेशन को ही ज्यादातर लोग डिस्चार्ज समझ लेते हैं। हालांकि डिस्चार्ज होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि महिला को असली सुकून क्लाइमैक्स पर पहुंचने से ही मिलता है। 
महिलाओं को क्लाइमैक्स नहीं होता। 
यह पूरी तरह गलत है। महिलाओं को भी क्लाइमैक्स होता है। ऐसे में पुरुष का उसकी जरूरत को समझना और उसके मुताबिक काम करना जरूरी है। 
महिलाओं को ज्यादा वक्त लगता है। 
सभी महिलाएं क्लाइमैक्स पर पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लेतीं। अगर पार्टनर उनकी पसंद का है तो वे जल्दी मुकाम पर पहुंच जाती हैं। हालांकि कुछ को ज्यादा वक्त भी लग सकता है
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सेक्स के दौरान इन बातों से डरती हैं महिलाएं



कहा गया है कि महिलाओं के लिए सबसे कुछ खास है तो वो है सेक्स। इसके बिना वो मुर्झाए फूल की तरह हो जाती हैं। लेकिन आखिर ऐसा क्या है कि महिलाएं कभी-कभी सेक्स से डरती भी हैं।

जो चींज लुभाती है, वो अगर डराए भी तो क्या हो! लेकिन ऐसा होता है और अक्सर होता है। इस डर से बचना जरूरी है। अगर डर होगा तो फिर सेक्स में मजा नहीं होगा। देखा गया है कि डर की वजह से अनेकों महिलाओं की सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है। कई तो इससे बचना भी चाहती हैं और इसके लिए तरह-तरह के बहाने बनाती हैं।

पुरुषों के लिए फैंटेसी, महिलाएं होती हैं इमोशनल: सेक्स जहां पुरुषों के लिए अपनी अजीबो-गरीब फैंटेसी को पूरा करने का साधन है, वहीं औरतों के लिए यह रिलेशन काफी इमोशनल होता है। सेक्स के दौरान महिलाएं अपने आप को पूरी तरह से समर्पित कर देती हैं, लेकिन अक्सर पुरुष सेक्स संबंधों के दौरान भावनाओं में नहीं बहते। उनके लिए महज शारीरिक संतुष्टि ही काफी होती है।

प्रेग्नेंसी का डर: सेक्स करते हुए महिलाओं के लिए सबसे बड़ा डर प्रेग्नेंसी का होता है। अक्सर पुरुष साथी कंडोम का प्रयोग नहीं करना चाहते। दूसरे, कई महिलाएं भी कंडोम के साथ सेक्स में वो आनंद प्राप्त नहीं कर पाती। कई बार सेक्स संबंध इतने अचानक बन जाते हैं कि कुछ सोचने का मौका नहीं मिलता। प्रेग्नेंसी का डर सेक्स के बाद महिलाओं की चिंता का सबसे बड़ा कारण होता है।

संतुष्टि: पुरुषों को महिलाओं की इच्छा समझना चाहिए, पोर्न की तरह व्यवहार न करें। प्राय: पुरुष सेक्स के दौरान महिलाओं की इच्छाओं और उनकी भावनाओं का ख्याल नहीं करते। वे सिर्फ अपनी संतुष्टि से मतलब रखते हैं। यह एक स्वार्थी रवैया है। महिलाएं संवेदनशील व्यवहार से संतुष्ट होती हैं, पर पुरुष उनके साथ कुछ इस तरह सेक्स करना चाहते हैं मानो किसी पोर्न स्टार के साथ सेक्स कर रहे हैं। 

पीरियड्स में सेक्स: यह महिलाओं के डर का बहुत बड़ा कारण है। सेक्स मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं में सेक्स की इच्छा काफी बढ़ जाती है, पर उन्हें लगता है कि इस अवस्था में अगर सेक्स किया तो पता नहीं इससे क्या समस्या पैदा हो जाए। दूसरे, पीरियड्स के दौरान पुरुष भी महिलाओं के साथ सेक्स करने में रुचि नहीं लेते। पीरियड में सेक्स नहीं करना चाहिए, यह एक गलत धारणा है। इस दौरान सेक्स करने से कुछ भी नहीं होता। इसलिए महिलाओं को इस डर से मुक्त हो जाना चाहिए
 
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शादी शुदा औरतो के लिए दस जरुरी काम की बाते


1. अगर कोई खास कारण न
हो तो सेक्स के लिए इनकार न करें।
अगर किसी कारणवश (मेंसेस,
प्रेग्नेंसी, थकान आदि) सेक्स न कर
सकें तो पति को दूसरे तरीकों से
संतुष्टि देने की कोशिश करें।

2. सेक्स के वक्त पार्टनर के बेडौल
शरीर या किसी और फिजिकल
कमी को लेकर कॉमेंट न करें।

3.
पारिवारिक झगड़ों को प्यार के
हसीं लम्हों को बीच न आनें दें।

4.
प्राइवेट पार्ट में अगर कोई बीमारी है तो इसका इलाज
कराएं। यह पार्टनर
की कामेच्छा को कम कर
सकता है।

5. अपनी सेक्स लाइफ
को दूसरी सहेलियों से कंपेयर न करें।

6. अगर पार्टनर जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है तो सेक्सॉलजिस्ट
की मदद से
इलाज मुमकिन है। तब तक संतुष्टि के
दूसरे तरीकों का सहारा ले सकते
हैं।

7. सेक्स के वक्त थोड़ा आकर्षक
बनें। स्नान करें, वैक्सिंग कराएं, परफ्यूम का इस्तेमाल करें। प्राइवेट
पार्ट को साफ- सुथरा रखें। आपके
बेहतर पहनावे से भी पार्टनर
की उत्तेजना में
इजाफा हो सकता है।

8. अगर आप
उनकी तारीफ करेंगी तो वह अधिक उत्साह और जोश महसूस
करेंगे। प्यार करने के दौरान
तारीफ के जुमले बोलना न भूलें।
डॉक्टर की दो घंटे
की साइकोथेरपी से ज्यादा असर
पार्टनर की दो लाइन की तारीफ का होता है।

9. मुमकिन हो तो बड़े
बच्चों (5 साल से बड़े) को अलग
सुलाएं। घर में जगह कम हो तो सेक्स
के लिए दोपहर का वक्त फिक्स करें।

10. जो पॉजिशन पति को पसंद हो,
उन्हें आजमाएं। अपनी पसंद-नापसंद को भी उनके साथ शेयर करें।

एक और जरुरी बात औरतो के लिए
पुरुष के लिए महिला चाहे जैसी भी हैं अगर सेक्स लाइफ सही हैं तो पति पत्नी के बीच आधी लड़ाई खत्म।
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