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सुरक्षित सेक्स

यदि आप चूमने एवं सहलाने से आगे बढ़ते हैं तो यह महत्वपूर्ण है की सेक्स सुरक्षित हो। यौन संचारित रोग एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए हमेशा ही सुरक्षित सेक्स करना चाहिए।

यह असुरक्षित है

कण्डोम एवं अन्य किसी गर्भनिरोधन जैसे गोलियों के बिना संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
कण्डोम के बिना गुदा मैथुन (गुदाद्वार में लिंग का प्रवेश)
लड़कों के लिए कण्डोम के बिना मुख मैथुन और लड़कियों के लिए डेन्टल डैम (जिसे वैजाइनल डैम भी कहते हैं - योनि को ढकने के लिए लेटेक्स का एक चैकोर टुकड़ा) के बिना मुख मैथुन
आपस में एक दूसरे के सेक्स के लिए खिलौने (सेक्स टॉय) को साफ़ किए बिना इस्तेमाल

यह सुरक्षित है


सहलाना, जीभ का इस्तेमाल करते हुए चूमना, गले लगाना, मालिश या मसाज करना, स्वयं का या अपने साथी का हस्तमैथुन
गुणवत्ता प्राप्त कण्डोम का इस्तेमाल करके संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
संक्रमण से बचने के लिए गुणवत्ता प्राप्त कण्डोम एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए किसी दूसरे प्रकार के गर्भनिरोधन जैसे गोलियों का प्रयोग करते हुए संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
शुक्राणु या रक्त (उदाहरण के लिए माहवारी का रक्त) के मुख में गए बिना मुख मैथुन

डबल डच

सेक्स का सबसे सुरक्षित तरीका डबल डच है - यानी कण्डोम एवं किसी अन्य गर्भनिरोधन जैसे गोलियों का प्रयोग। कण्डोम यौन संचारित रोग से सुरक्षा प्रदान करता है। दूसरे प्रकार का गर्भनिरोधन, जैसे गोलियाँ, अनचाहे गर्भ से बचाती हैं क्योंकि कण्डोम 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं होता । गर्भनिरोधन भाग देखें।
यदि मुख मैथुन के समय किसी के मुख में शुक्राणु या रक्त नहीं जाता है तो वे एचआईवी के जोखिम से बचे रहते हैं। पर उन्हें तब भी हरपीज़ जैसे अन्य यौन संचारित रोग हो सकते हैं।

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हर रोज़ पूरी ऊर्जा के साथ कैसे करें संभोग ?

कौन होगा जो हर रोज़ संभोग नहीं करना चाहेगा, लेकिन कई बार ऊर्जा साथ नहीं देती या फिर क्‍लाईमैक्‍स तक पहुंचने में दिक्‍कत आती है। या यूं कहिये कि सेक्‍स की चरम सीमा तक आप रोज़ रोज़ नहीं पहुंच पाते हैं, जिस वजह से रोज संभोग करने का मन नहीं करता।
हम यहां बतायेंगे कुछ ऐसी टिप्‍स जिन्‍हें फॉलो करने से आप हर रोज़ पूरी ऊर्जा के साथ संभोग कर सकेंगे। वो भी बिना मूड को खराब किये।

1. कंट्रोल-
कई पुरुषों में संभोग से पहले ही रतिनिष्‍पत्ति की समस्‍या होती है। उनका वीर्य संभोग से पहले ही स्‍खलित हो जाता है। इस वजह से वो संभोग नहीं कर पाते हैं। वैसे यह कोई बीमारी नहीं होती है। यह सिर्फ आपके मूड पर निर्भर करता है। कई बार आप संभोग से पहले ही इतने ज्‍यादा उत्‍तेजित हो जाते हैं कि आपका वीर्य डिस्‍चार्ज हो जाता है। इसके लिये जरूरी है खुद पर कंट्रोल। अगर आप खुद पर कंट्रोल रखते हैं, तो आप जितनी देर चाहें, उतनी देर संभोग कर सकते हैं।
खुद पर कंट्रोल करने के लिये संभोग से आधे घंटे पहले मैथुन कर लें। उसके बाद संभोग के दौरान जैसे ही क्‍लाईमैक्‍स तक पहुंचने वाले हों, वैसे ही रुक जायें। अपने ध्‍यान को दूसरी बातों की ओर ले जायें। अगर आप रुकना नहीं चाहते हैं, तो संभोग करते वक्‍त अपने दिमाग में उन बातों को सोचें जिनसे आपको तनाव हो सकता है। ऐसा करने से आप तुरंत डिस्‍चार्ज नहीं होंगे।
2. फोर प्‍ले-
जितनी ज्‍यादा देर तक आप फोर प्‍ले करेंगे, संभोग का मज़ा उतना ज्‍यादा होगा। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को फोर प्‍ले ज्‍यादा अच्‍छा लगता है। फोर प्‍ले का फायदा भी उन्‍हें ही ज्‍यादा मिलता है। ऐसा इसलिये क्‍योंकि पुरुष तो तीन-चार मिनट के अंदर डिस्‍चार्ज हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं को चरम सीमा तक पहुंचने में समय लगता है। ऐसा करके आप अपनी पार्टनर को ज्‍यादा खुश रख सकते हैं।
3. संभोग की गति-
संभोग के वक्‍त अपनी गति को नियंत्रित रखने से आप ज्‍यादा देर तक संभोग कर सकते हैं। जोश में आकर होश खो देने से मज़ा किरकिरा हो सकता है। महिला अथवा पुरुष दोनों में जो भी व्‍यक्ति ऊपर होता है, उसी की जिम्‍मेदारी होती है गति पर नियंत्रण रखने की।
4. पार्टनर की मदद-
कई बार होता है कि पुरुष पहले ही स्‍खलित हो जाते हैं, जिस वजह से उनकी पार्टनर को कई बार निराशा हाथ लगती है। इसलिये बेहतर होगा यदि आप ऊपर की तीन टिप्‍स को अपनाते हुए संभोग करें। ऐसा करने से आपकी पार्टनर आपके साथ-साथ डिस्‍चार्ज होगी और संभोग का मज़ा कई गुना ज्‍यादा होगा। 

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ओशो वाणी : सम्भोग से समाधि की ओर

एक बहुत अद्भुत व्‍यक्‍ति हुआ है। उस व्‍यक्‍ति का नाम था नसीरुद्दीन एक दिन सांझ वह अपने घर से बाहर निकलता था मित्रों से मिलने के लिए। तभी द्वार पर एक बचपन का बिछुड़ा मित्र घोड़े से उतरा। बीस बरस बाद वह मित्र उससे मिलने आया था। लेकिन नसीरुद्दीन ने कहा कि तुम ठहरो घड़ी भर मैंने किसी को बचन दिया है। उनसे मिलकर अभी लौटकर आता हूं। दुर्भाग्‍य कि वर्षो बाद तुम आये हो और मुझे घर से अभी जाना पड़ रहा है।, लेकिन मैं जल्‍दी ही लौट आऊँगा। उस मित्र ने कहां, तुम्‍हें छोड़ने का मेरा मन नहीं है, वर्षो बाद हम मिले है। उचित होगा कि मैं भी तुम्‍हारे साथ चलू। रास्‍ते में तुम्‍हें देखूँगा भी, तुमसे बात भी कर लुंगा। लेकिन मेरे सब कपड़े धूल में हो गये है। अच्‍छा होगा, यदि तुम्‍हारे पास दूसरे कपड़े हों तो मुझे दे दो। वह फकीर कपड़े की एक जोड़ी जिसे बादशाह ने उसे भेट की थी—सुंदर कोट था, पगड़ी थी, जूते थे। वह अपने मित्र के लिए निकाल लाया। उसने उसे कभी पहना नहीं था। सोचा था; कभी जरूरत पड़ेगी तो पहनूंगा। फिर वह फकीर था। वे कपड़े बादशाही थे। हिम्‍मत भी उसकी पहनने की नहीं पड़ी थी। मित्र ने जल्‍दी से वे कपड़े पहन लिए।

जब मित्र कपड़े पहन रहा था, तभी नसीरुद्दीन को लगा कि यह तो भूल हो गयी। इतने सुंदर कपड़े पहनकर वह मित्र तो एक सम्राट मालूम पड़ने लगा। और नसरूदीन उसके सामने एक फकीर, एक भिखारी मालूम पड़ने लगा। सोचा रास्‍ते पर लोग मित्र की तरफ ही देखेंगे,जिसके कपड़े अच्‍छे है। लोग तो सिर्फ कपड़ों की तरफ देखते है और तो कुछ दिखायी नहीं पड़ता है। जिनके घर ले जाऊँगा वह भी मित्र को ही देखेंगे, क्‍योंकि हमारी आंखे इतनी अंधी है। कि सिवाय कपड़ों के और कुछ भी नहीं देखती। उसके मन में बहुत पीड़ा होने लगी। कि यह कपड़े पहनाकर मैंने एक भूल कर ली। लेकिन फिर उसे ख्‍याल आया कि मेरा प्‍यारा मित्र है, वर्षों बाद मिला है। क्‍या अपने कपड़े भी मैं उसको नहीं दे सकता। इतनी नीच इतनी क्षुद्र मेरी वृति है। क्‍या रखा है कपड़ों में। यही सब अपने को समझाता हुआ वह चला, रास्‍ते पर नजरें उसके मित्र के कपड़ों पर अटकी रही। जिसने भी देखा, वहीं गोर से देखने लगा। वह मित्र बड़ा सुंदर मालूम पड़ रहा था। जब भी कोई उसके मित्र को देखता, नसरूदीन के मन में चोट लगती कि कपड़े मेरे है और देखा मित्र जा रहा है। फिर अपने को समझाता कि कपड़े क्‍या किसी के होते है, में तो शरीर तक को अपना नहीं मानता तो कपड़े को अपना क्‍या मानना है, इसमें क्‍या हर्ज हो गया है। समझाता-बुझाता अपने मित्र के घर पहुंचा। भीतर जाकर जैसे ही अन्‍दर गया, परिवार के लोगों की नजरें उसके मित्र के कपड़ों पर अटक गई। फिर उसे चोट लगी, ईर्ष्‍या मालूम हुई कि मेरे ही कपड़े और मैं ही उसके सामने दीन हीन लग रहा हूं। बड़ी भूल हो गई। फिर अपने को समझाया फिर अपने मन को दबाया। घर के लोगों ने पूछा की ये कौन है, नसरूदीन ने परिचय दिया। कहा, मेरे मित्र है बचपन के बहुत अद्भुत व्‍यक्‍ति है। जमाल इनका नाम है। रह गये कपड़े, सो मेरे है।

घर के लोग बहुत हैरान हुए। मित्र भी हैरान हुआ। नसरूदीन भी कहकर हैरान हुआ। सोचा भी नहीं था कि ये शब्‍द मुहँ से निकल जायेंगे। लेकिन जो दबाया जाता है, वह निकल जाता है। जो दबाओ, वह निकलता है; जो सप्रेम करो, वह प्रकट होगा। इसलिए भूल कर भी गलत चीज न दबाना। अन्‍यथा सारा जीवन गलत चीज की अभिव्‍यक्‍ति बन जाता है। वह बहुत घबरा गया। सोचा भी नहीं था कि ऐसा मुंह से निकल जाएगा। मित्र भी बहुत हतप्रभ रह गया। घर के लोग भी सोचने लगे। यह क्‍या बात कही। बाहर निकल कर मित्र ने कहा, अब मैं तुम्‍हारे साथ दूसरे घर न जाऊँगा। यह तुमने क्‍या बात कहीं। नसरूदीन की आंखों में आंसू आ गये। क्षमा मांगने लगा। कहने लगा भूल हो गई। जबान पलट गई। लेकिन जबान कभी नहीं पलटती है। ध्‍यान रखना, जो भी तर दबा हो वह कभी भी जबान से निकल जाता है। जबान पलटती कभी नहीं। तो वह कहने लगा क्षमा कर दो, अब ऐसी भूल न होगी। कपड़े में क्‍या रखा है। लेकिन कैसे निकल गई ये बात,मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि कपड़े किसके है। लेकिन आदमी वहीं नहीं कहता, जो सोचता है, कहता कुछ और है सोचता कुछ और है। कहता था मैंने तो कुछ सोचा भी नहीं, कपड़े का तो मुझ ख्‍याल भी नहीं आया। यह बात कैसे निकल गई। जब कि घर से चलने में और घर तक आने में सिवाय कपड़े के उसको कुछ भी ख्‍याल नहीं आया था। आदमी बहुत बेईमान हे। जो उसके भीतर ख्‍याल आता है। कभी कहता भी नहीं। और जो बहार बताता है, वह भीतर बिलकुल नहीं होता है। आदमी सरासर झूठ है। मित्र ने कहां—मैं चलता हूं तुम्‍हारे साथ लेकिन अब कपड़े की बात न उठाना। नसरूदीन ने कहा, कपड़े तुम्‍हारे ही हो गये। अब मैं वापस पहनूंगा भी नहीं। कपड़े में क्‍या रखा है। कह तो वह रहा था कि कपड़े में क्‍या रखा है, लेकिन दिखाई पड़ रहा था कि कपड़े में ही सब कुछ रखा है। वे कपड़े बहुत सुंदर थे। वे मित्र बहुत अद्भुत मालूम पड़ रहा था। फिर चले रास्‍ते पर। और नसरूदीन फिर अपने को समझाने लगा की कपड़े दे ही दूँगा मित्र को। लेकिन जितना समझता था, उतना ही मन कहता था कि एक बार भी तो पहने नहीं। दूसरे घर तक पहुंचे,संभलकर संयम से। संयमी आदमी हमेशा खतरनाक होता हे। क्‍योंकि संयमी का मतलब होता है कि उसने कुछ भीतर दबा रखा है। सच्‍चा आदमी सिर्फ सच्‍चा आदमी होता है। उसके भीतर कुछ भी दबा नहीं रहता है। संयमी आदमी के भीतर हमेशा कुछ दबा होता है। जो ऊपर से दिखाई देता है, ठीक उलटा उसके भीतर  दबा होता है। उसी को दबाने की कोशिश में वह संयमी हो जाता है। संयमी के भीतर हमेशा बारूद है, जिसमें कभी भी आग लग जाये तो बहुत खतरनाक है। और चौबीस घंटे दबाना पड़ता है उसे, जो दबाया गया है। उसे एक क्षण को भी फुरसत दी, छुट्टी की वह बहार आ जायेगा। इस लिए संयमी आदमी को अवकाश कभी नहीं होता। चौबीस घंटे जब तक जागता है। नींद में बहुत गड़बड़ हो जाती हे। सपने में सब बदल जाता है। और जिसको दबाया है वह नींद में प्रकट होने लगता है। क्‍योंकि नींद में संयम नहीं चलता। इसीलिए संयमी आदमी नींद में डरता है। आपको पता है, संयमी आदमी कहता है क्‍या सोना। इसके अलावा उसका कोई कारण नहीं है। नींद तो परमात्मा का अद्भुत आशीर्वाद है। लेकिन संयमी आदमी नींद से डरता है। क्‍योंकि जो दबाया है, वह नींद में धक्‍के मारता है। सपने बनकर आता है।

भूल का नियम है कि वह हमेशा अतियों पर होती है। एक्‍सट्रीम से बचो तो दूसरे एक्‍सट्रीम पर हो जाती है। भूल घड़ी के पैंडुलम की तरह चलती है। एक कोने से दूसरे कोने पर जाती है। बीच में नहीं रुकती। भोग से जायेगी तो एकदम त्‍याग पर चली जायेगी। एक बेवकूफी से छूटी दूसरी बेवकूफी पर पहुंच जायेगी। जो ज्‍यादा भोजन से बचेगा, वह उपवास करेगा। और उपवास ज्‍यादा भोजन से भी बदतर हे। क्‍योंकि ज्‍यादा भोजन भी आदमी दो एक बार कर सकता है। लेकिन उपवास करने वाला आदमी दिन भर मन ही मन भोजन करता है। वह चौबीस घंटे भोजन करता रहता है। एक भूल से आदमी का मन बचता है तो दूसरी भूल पर चला जाता है। अतियों पर वह डोलता है। एक भूल की थी कि कपड़े मेरे है। अब दूसरी भूल हो गई कि कपड़े उसी के है, तो साफ हो जाता है कि कपड़े उसके बिलकुल नहीं है। और बड़े मजे की बात है कि जोर से हमें वही बात कहनी पड़ती है, जो सच्‍ची नहीं होती है। अगर तुम कहो कि मैं बहुत बहादुर आदमी हूं तो समझ लेना कि तुम पक्‍के नंबर के कायर हो। अभी हिंदुस्‍तान पर चीन का हमला हुआ। सारे देश में कवि हो गये, जैसे बरसात में मेंढक पैदा हो जाते है। ‘हम सोये हुए शेर है, हमें मत छेड़ों।‘ कभी सोये हुए शेर ने कविता की है कि हमको मत छेड़ों, कभी सोये हुऐ शेर को छेड़ कर देखो तो पता चल जाएगा। कि छेड़ने का क्‍या मतलब होता है। लेकिन हमारा पूरा मुल्‍क कहने ला कि हम सोये हुऐ शेर है। हम ऐसा कर देंगे,वैसा कर देंगे। चीन लाखों मील दबा कर बैठ गया है और हमारे सोये शेर फिर से सो गये है। कविता बंद हो गई है। यह शेर होने का ख्‍याल शेरों को पैदा नहीं होता। वह कायरों को पैदा होता है। शेर-शेर होता है। चिल्‍ला चिल्‍लाकर कहने की उसे जरूरत नहीं होती।

कह तो दिया नसरूदीन ने कि कपड़े—कपड़े इन्‍हीं के है। लेकिन सुन कर वह स्‍त्री तो हैरान हुई। मित्र भी हैरान हुआ कि फिर वही बात। बाहर निकल कर उसे मित्र ने कहा कि क्षमा करो, अब मैं लौट जाता हूं। गलती हो गई है कि तुम्‍हारे साथ आया। क्‍या तुम्‍हें कपड़े ही दिखाई पड़ रहे है। नसरूदीन ने कहा, मैं खुद भी नहीं समझ पाता। आज तक जिंदगी में कपड़े मुझे दिखाई नहीं पड़े। यह पहला ही मौका है। क्‍या हो गया मुझे। मेरे दिमाग में क्‍या गड़बड़ हो गई। पहले एक भूल हो गई थी। अब उससे उलटी भूल हो गई। अब मैं कपड़ों की बात ही नहीं करूंगा। बस एक मित्र के घर और मिलना है फिर घर चल कर आराम से बैठे गे। और एक मौका मुझे दे दो। नहीं तो जिंदगी भी लिए अपराध मन में रहेगा कि मैंने मित्र के साथ कैसा दुर्व्‍यवहार किया। मित्र साथ जाने को राज़ी हो गया। सोचा था अब और क्‍या करेगा भूल। बात तो खत्‍म हो ही गई हे। दो ही बातें हो सकती थी। और दोनों बातें हो गई है। लेकिन उसे पता न था भूल करने वाले बड़े इनवैटिव होते है। नयी भूल ईजाद कर लेते है। शायद आपको भी पता न हो। वे तीसरे मित्र के घर गये। अब की बार तो नसरूदीन अपनी छाती को दबाये बैठा है कि कुछ भी हो जाये, लेकिन कपड़ों की बात न निकालूंगा। जितने जोर से किसी चीज को दबाओ, उतने जोर से वह पैदा होनी शुरू होती है। किसी चीज को दबाना उसे शक्‍ति देने का दूसरा नाम है। दबाओ तो और शक्‍ति मिलती है उसे। जितने जोर से आप दबाते है उस जोर में जो ताकत आपकी लगती है वह उसी में चली जाती है। जिस को आप दबाते हो। ताकत मिल गई उसे। अब वह दबा रहा है और पूरे वक्‍त पा रहा है कि मैं कमजोर पड़ता जा रहा हूं। कपड़े मजबूत होते जा रहे है। कपड़े जैसी फिजूल चीज भी इतनी मजबूत हो सकती है। कि नसरूदीन जैसा ताकतवर आदमी हारे जा रहा है उसके सामने। जो किसी चीज से न हारा था, आज उसे साधारण से कपड़े हराये डालते है। वह अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। लेकिन उसे पता नहीं है कि पूरी ताकत हम उसके खिलाफ लगाते है, जिससे हम भयभीत हो जाते है। जिससे हार जाते है, उससे हम कभी नहीं जीत सकते। ताकत से नहीं जीतना है, अभय से जीतना है, ‘फियरालेसनेस’ से जीतना है। बड़े से बड़ा ताकतवर हार जायेगा। अगर भीतर भय हो तो। ध्‍यान रहे हम दूसरे से कभी नहीं हारते, अपने ही भय से हारते है। कम से कम मानसिक जगत में तो यह पक्‍का है कि दूसरा हमें कभी नहीं हरा सकता,हम हमारा भय ही हराता है। नसरूदीन जितना भयभीत हो रहा है, उतनी ही ताकत लगा रहा है। और वह जितनी ताकत लगा रहा है, उतना भयभीत हुआ जा रहा है। क्‍योंकि कपड़े छूटते ही नहीं। वे मन में बहुत चक्‍कर काट रहे है। तीसरे मकान के भीतर घुसा है। लगता है वह होश में नहीं है। बेहोश है। उसे न दीवालें दिख रही है, न घर के लोग दिखायी पड़ रहे हे। उसे केवल वहीं कोट पगड़ी दिखाई पड़ रही है। मित्र भी खो गया है। बस कपड़े है और वह हे। हालांकि ऊपर से किसी को पता नहीं चलता है। जिस घर में गया, फिर आँख टिक गयीं उसके मित्र के कपड़ों पर। पूछा गया ये कौन है? लेकिन नसरूदीन जैसे बुखार में है। वह होश में नहीं है। दमन करने वाले लोग हमेशा बुखार में जीते है। कभी स्‍वस्‍थ नहीं होते। सप्रेशन जो है, वह मेंटल फिवर है। दमन जो है। वह मानसिक बुखार है। दबा लिया है और बुखार पकड़ा हुआ है। हाथ पैर कांप रहे है उसके। वह अपने हाथ पैर रोकने की बेकार कोशिश कर रहा है। जितना रोकता है वह उतने कांपते जा रहे है। कौन है यह?….यह तो अब उसे खुद भी याद नहीं आ रहा है। कौन है यह, शायद कपड़े है, सिर्फ कपड़े। साफ मालूम पड़ रहा है। कि कपड़े है लेकिन यह कहना नहीं है। लगा जैसे बहुत मुश्‍किल में पड़ गया है। उसे याद नहीं आ रहा कि क्‍या कहना है। फिर बहुत मुश्‍किल से कहां मेरे बचपन का मित्र है, नाम है फला। और रह गये कपड़े, सो कपड़े की तो बात ही नहीं करना है। वे किसी के भी हो, उनकी बात नहीं उठानी है। लेकिन बात उठ गई, जिसकी बात न उठानी हो उसी की बात ज्‍यादा उठती है।
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संतान प्राप्ति के लिए अपनाएं उचित संभोग आसन



* संभोग के लिए आप नीचे चित लेट जाएं। पति को ऊपर लेटने को कहें, लेकिन याद रखें उन्‍हें अपना सारा भार आपके शरीर पर नहीं, बल्कि अपने दोनों बाजू पर रखना है। दोनों का शारीरिक समागत केवल लिंग-योनि और कुछ हद तक जंघाओं पर ही होगा, जिससे आप भार रहित संभोग को संपन्‍न कर सकती हैं।

* दूसरी विधि यह है कि आप चित लेटी रहें और अपने दोनों पैर फैला दें। आपके पति आपकी जंघाओं पर बैठ कर शिश्‍न को योनि में प्रवेश कराएं। इस आसन में भी पुरुष के घुटने का सारा भार बिस्‍तर पर होता है, जिससे आपकी जंघाओं पर भी उनके भार का दबाव कम पड़ेगा।

* तीसरी अवस्‍था में आप चित लेट कर अपने दोनों पैर हवा में उठा कर पति के कंधों पर रख दें और वह सामने से आपके अंदर प्रवेश करें। इसमें मामूली भार भी आपके शरीर पर नहीं पड़ेगा। यह संभोग में नयापन तो लाएगा ही, इसमें लिंग भी बहुत गहरे प्रवेश करता है। इससे वीर्य का स्राव काफी अंदर होता है और उसे योनि के अंदर यात्रा भी कम करनी पड़ेगी।

* चौथी अवस्‍था को तीसरी अवस्‍था में थोड़ा परिवर्तन कर हासिल किया जा सकता है। इसमें आप अपने दोनों पैरों को पति के कंधों पर रखने की जगह, घुटने से मोड़ लें और उसे थोड़ा खोल लें (फैला लें)। इसमें भी पति सामने से प्रवेश करेंगे और इस आसन में भी भार आपके शरीर पर नहीं पड़ेगा।

* पांचवीं और सरल अवस्‍था वो है, जिसमें आपके पति तो खड़े हों और आप बिस्‍तर पर लेटी अवस्‍था में हों। आप बिस्‍तर के आखिरी छोर पर चित लेट जाएं और पति से कहें कि वो बिस्‍तर के बाहर खड़े होकर आपकी दोनों जंघाओं को अपने हाथों से पकड़ लें। अब वो अपना पेनिस आपकी वेजाइना में प्रवेश कराएं। इससे उन्‍हें धक्‍का लगाने में आसानी होगी और लिंग भी योनि में गहरे प्रवेश करेगा। शरीर पर आपके पति का भार भी नहीं होगा।

* आप दोनों करवट लेट कर भी संभोग कर सकती हैं, लेकिन इसमें आसानी तब होगी जब अंदर से आपकी इच्‍छा भी सेक्‍स करने की हो ताकि योनि पथ गीला हो जाए, जिससे पुरुष शिश्‍न का प्रवेश आसानी से और गहरे हो।

* हां, सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह कि माहवारी के शुरू होने के 14 वें दिन स्‍त्री के अंदर अंडाणु बनने की प्रक्रिय चरम पर होती है। इसलिए पीरियड शुरू होने के दिन से गिने और 13 वें से 16 वें दिन तक प्रत्‍येक रात संभोग करें ताकि गर्भ ठहरने की पूरी संभावना हो।

नोट: सबसे बड़ी बात यह है कि जब आप गर्भ धारण के उद़देश्‍य से संभोग कर रही हों तो आपको और आपके पति को यह ध्‍यान रखना होगा कि आपकी योनि में वीर्य स्राव के बाद न तो वो तत्‍काल अपना लिंग आपकी योनि से निकालें और न ही आप ही उठने की कोशिश करें। वीर्य स्राव के बाद भी दोनों उसी अवस्‍था में लेटी रहें ताकि वीर्य को गर्भाशय ग्रीवा तक पहुंचने में आसानी हो। वीर्य स्राव के बाद स्‍त्री और पुरुष के तत्‍काल अलग होने से वीर्य के बाहर निकलने का खतरा रहता है।

... और वैसे भी उस अवस्‍था में कुछ देर तक एक-दूसरे की आंखों में देखना, बालों में ऊंगलियां फिराना, होंठ, माथे, गाल और स्‍तनों पर चुंबन लेना पति-पत्‍नी को एक नई ऊर्जा से भर देता है। फिर वह संबंध महज सेक्‍स न होकर प्‍यार में तब्‍दील हो जाता है। याद रखिए, प्‍यार के पल में शुक्राणु व अंडाणु के निषेचन और उससे उत्‍पन्‍न होने वाली संतान एक संवेदनशील और प्‍यारे इंसान के रूप में धरती पर कदम रखेगा। केवल सेक्‍स से उत्‍पन्‍न संतानों का हाल देख लीजिए, अराजक, हिंसक और भ्रष्‍ट व्‍यक्ति में वो आपको हर ओर दिख जाएगा
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