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सुरक्षित सेक्स

यदि आप चूमने एवं सहलाने से आगे बढ़ते हैं तो यह महत्वपूर्ण है की सेक्स सुरक्षित हो। यौन संचारित रोग एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए हमेशा ही सुरक्षित सेक्स करना चाहिए।

यह असुरक्षित है

कण्डोम एवं अन्य किसी गर्भनिरोधन जैसे गोलियों के बिना संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
कण्डोम के बिना गुदा मैथुन (गुदाद्वार में लिंग का प्रवेश)
लड़कों के लिए कण्डोम के बिना मुख मैथुन और लड़कियों के लिए डेन्टल डैम (जिसे वैजाइनल डैम भी कहते हैं - योनि को ढकने के लिए लेटेक्स का एक चैकोर टुकड़ा) के बिना मुख मैथुन
आपस में एक दूसरे के सेक्स के लिए खिलौने (सेक्स टॉय) को साफ़ किए बिना इस्तेमाल

यह सुरक्षित है


सहलाना, जीभ का इस्तेमाल करते हुए चूमना, गले लगाना, मालिश या मसाज करना, स्वयं का या अपने साथी का हस्तमैथुन
गुणवत्ता प्राप्त कण्डोम का इस्तेमाल करके संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
संक्रमण से बचने के लिए गुणवत्ता प्राप्त कण्डोम एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए किसी दूसरे प्रकार के गर्भनिरोधन जैसे गोलियों का प्रयोग करते हुए संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
शुक्राणु या रक्त (उदाहरण के लिए माहवारी का रक्त) के मुख में गए बिना मुख मैथुन

डबल डच

सेक्स का सबसे सुरक्षित तरीका डबल डच है - यानी कण्डोम एवं किसी अन्य गर्भनिरोधन जैसे गोलियों का प्रयोग। कण्डोम यौन संचारित रोग से सुरक्षा प्रदान करता है। दूसरे प्रकार का गर्भनिरोधन, जैसे गोलियाँ, अनचाहे गर्भ से बचाती हैं क्योंकि कण्डोम 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं होता । गर्भनिरोधन भाग देखें।
यदि मुख मैथुन के समय किसी के मुख में शुक्राणु या रक्त नहीं जाता है तो वे एचआईवी के जोखिम से बचे रहते हैं। पर उन्हें तब भी हरपीज़ जैसे अन्य यौन संचारित रोग हो सकते हैं।

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संभोग के संबंध में पूछे जाने वाले आम सवाल


1. मैंने हमेशा सुरक्षित सेक्स किया है फिर भी मुझे यौनसंचारित रोग लग गया है! यह कैसे संभव है ?
सुरक्षित संभोग करने का आशय, प्रायः सेक्स के दौरान कंडोम पहनने से और यह सुनिश्चित करने से है कि आपके मुंह में वीर्य या मासिक धर्म का खून न चला जाए। तब आप एड्स फैलाने वाले एचआईवी विषाणु तथा क्लेमाइडिया और गोनोरिया जैसे संक्रमणों से सुरक्षित रहते हैं।
फिर भी यौनसंचारित रोगों के विषाणु और जीवाणु दूसरे तरीकों से भी आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एक-दूसरे का हस्तमैथुन करने से अथवा सेक्स किए बिना केवल जननांगों को छूने से। यहां तक कि जब आप हमेशा कंडोम को प्रयोग करते हैं तो भी यौनसंचारित रोग लगने की कुछ न कुछ संभावना बनी ही रहती है।
2. पहली बार संभोग किस उम्र में ?
कोई भी व्‍यक्ति जीवन में पहली बार संभोग कब करता है ? यह सवाल यदि आपसे पूछें तो शायद आप तेजी से जवाब देंगे- 26 से 28 वर्ष। यह जवाब अगर आप 20 साल पहले देते, तो शायद सही होता, लेकिन आज नहीं है। जी हां पिछले दो दशकों में पहली बार संभोग करने की औसतन उम्र में गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि ये आंकड़े विभिन्‍न देशों और लाइफस्‍टाइल पर निभर करते हैं।
जीवन भर संभोग नहीं करने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्‍या बहुत कम होती है। ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक ब्रिटेन में पहली बार संभोग की उम्र 25 वर्ष से घटकर 16 व 17 साल हो गई है। शोध में पाया गया कि अधिकांश टीनेजर्स 15 साल की उम्र में ही संभोग कर चुके होते हैं। अफसोस की बात यह है कि अधिकांश टीनेजर अज्ञानतावश कंडोम का इस्‍तेमाल नहीं करते।
इंदिरा गांधी मुक्‍त विश्‍वविद्याल यके काउंसिलर व लखनऊ के श्री जयनारायण पीजी कॉलेज के रीडर डा. आलोक चांटिया से हमने इस मुद्दे पर बात की तो उन्‍होंने कहा कि पहली बार संभोग करने की उम्र में गिरावट का सबसे बड़ा कारण टीनेजर्स में यौन जनित बीमारियों व यौन अपराधों के बारे में जानकारी का कम होना है। उन्‍होंने कहा कि भारत में ऐसा कोई अध्‍ययन फिलहाल तो नहीं किया गया है, लेकिन हां अगर अध्‍ययन किया जाए, तो पहली बार संभोग करने की उम्र 17 भले ही ना हो, 23 वर्ष जरूर होगी।
डा. चांटिया ने कहा कि जिस तरह टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट व अन्‍य मीडिया में कंडोम और आई-पिल्‍स का खुलकर प्रचार किया जा रहा है वो गलत है। क्‍योंकि कंडोम और आई-पिल्‍स आदि के बारे में जानने के बाद टीनेजर्स के मन से डर खत्‍म हो जाता है। जबकि पहले ऐसा नहीं था। 20 साल पहले भारत में टीनेजर्स आपस में यौन संबंधों की बात तक करना पसंद नहीं करते थे। डा. चांटिया का कहना है कि हमारा देश एचआईवी-एड्स की रोकथाम के लिए जिस प्रकार कंडोम का प्रचार कर रहा है, उससे आज की युवा पीढ़ी भटकती जा रही है।
3. मैंने किसी लड़की के साथ असुरक्षित संभोग किया था, लेकिन उसके बाद पेशाब कर अपने लिंग को अच्छी तरह धो लिया था। क्या इससे मुझे रोग से बचने में सहायता मिलेगी ?
जी नहीं, पेशाब करने या अपने जननांगों को धो लेने से असुरक्षित संभोग करने के कारण रोग के लगने का जोखिम कम नहीं हो जाता है। यदि लड़की को कोई यौनसंचारित रोग है, तो हो सकता है वह आपको लग गया हो। आप, डॉक्टर के पास या चिकित्सालय जाएं और जांच कराएं। और अगली बार से कंडोम का प्रयोग करें।

4. मेरे बॉयफ्रेंड गर्भनिरोध के लिए ‘लिंग को योनि से बाहर निकाल कर वीर्यपात करने’ की विधि अपनाना चाहते हैं। क्या यह सुरक्षित संभोग है ?
जी नहीं, यह सुरक्षित नहीं है। हालांकि योनि में शुक्राणु तो प्रवेश नहीं करते, किंतु वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ (प्री-कम)  प्रवेश करते हैं। इससे आपको यौनसंचारित रोग होने या संचारित करने अथवा गर्भवती होने का जोखिम बना रहता है।
•यौनसंचारित रोग
वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ ( लड़के के लिंग से निकलने वाले पारदर्शी तरल पदार्थ ) ( प्री-कम )) में एचआईवी ( वह विशाणु virus जिससे एड्स aids होता है ) तथा दूसरे यौनसंचारित रोग, जैसे कि क्लाइमेडिया, गोनोरिया, जेनिटल हर्पीज, जेनिटल वाटर्स, सिफलिस या ट्राइकोमोनियासिस हो सकते हैं। यदि आप गर्भनिरोधक गोली खाती हैं, तो यह आपको गर्भवती होने से तो बचाएगी, किंतु किसी यौनसंचारित रोग के होने से नहीं।
•गर्भधारण
गर्भनिरोध के लिए ‘लिंग को योनि से बाहर निकाल कर वीर्यपात करने’ की विधि, (जिसे कोइटस इन्टरप्टस) भी कहते हैं, गर्भनिरोध का बहुत असरदार तरीका नहीं है। वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ में भी कोई शुक्राणु कोशिका मौज़ूद हो सकती है। इससे भी अधिक ज़रूरी बात यह है कि इसमें लड़के को समय का अनुमान लगाने में गलती हो सकती है, और हो सकता है लिंग को बाहर निकालने में देर हो जाए।

5. क्या पहली बार संभोग करते समय दर्द हेाता है ?
ऐसा होना ज़रूरी नहीं है। यदि लड़की तनावमुक्त और उत्तेजित है तो इसमें दर्द नहीं होता। यदि आप बहुत तनाव में हैं तो योनि सूखी और तनावयुक्त रह सकती है। इससे इस बात की अधिक संभावना होती है कि झिल्ली टूट जाएगी और संभोग कष्टदायक हो जाएगा। पहली बार आप अक्सर घबराए हुए होते हैं, इसलिए ऐसा आसानी से हो सकता है। लेकिन यदि आप दोनों कोई जल्दबाज़ी नहीं करते, तो इसमें दर्द नहीं हेाता है।
क्यों होता है संभोग के दौरान दर्द
भारतीय समाज में लडकी की परवरिश ऎसे माहौल में होती है कि उसके मन में संभोग को लेकर डर बैठा होता है। पहली बार संभोग से कई तरह के मिथ जुडे हुए हैं। लोगों का ऎसा मनोविज्ञान है कि पहले संभोग के समय में लडकियों को काफी दर्द होता है। इस दौरान ब्लीडिंग को लेकर भी अनेक तरह की भ्रांतियां हमारे समाज में मौजूद हैं। क्या सचमुच पहला संभोग कष्टदायक होता है ?
संभोग करने की स्थिति से भी दर्द का कुछ नाता हैक् ऎसे कुछ भ्रम लोगों के मन में अक्सर रहते हैं। कैसे आप इस दर्द से निजात पाकर सेक्स संबंधों का आनंद ले सकते हैं और अपने रिश्तों को सामान्य बना सकते हैं।
आइए जानें क्यों होता है संभोग के दौरान दर्द ?
इससे जुडी बातें सच हं या ये सिर्फ एक मिथ है ?
इस दर्द को मेडिकल टर्म में क्या कहते हैंक् संभोग के दौरान होने वाले दर्द को मेडिकल की भाषा में दाईस्पेरेनिया कहते हैं। यह ऎसा दर्द है जो एक बार होने पर बार-बार हो सकता है और इस दर्द का असर महिला-पुरूषों के रिश्ते पर बहुत बुरा पडता है।
क्यों होता है दर्द क वास्तव में पहली बार संभोग के समय महिलाओं को होने वाले दर्द का मुख्य कारण योनि का बहुत ज्यादा टाइट होना है। ऎसा तब होता है जब योनि की मांसपेशियां खिंच जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। ऎसी स्थिति में संभोग के समय महिला को बहुत अधिक दर्द होता है। ऎसा उन स्त्रयों के साथ होने की संभावना रहती है जो सेक्स संबंधों को बहुत बुरा मानती हैं और संभोग के समय पुरूष के साथ सहयोग नहीं करती। इसका मनोवैज्ञानिक असर ये होता है कि संभोग के समय योनि की मांसपेशिया सिकुड जाती हैं और तेज दर्द होता है।
योनि में किसी भी तरह का इंफेक्शन भी संभोग के समय दर्द का एक बहुत बडा कारण है। अक्सर योनि के आकार में परिवर्तन हो जाता है जिसे एंड्रियोमेट्रियोसिस कहते हैं।  यदि आपको भी संभोग के दौरान दर्द होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
संभोग के दौरान होने वाले दर्द का एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। लडकियों की परवरिश बचपन से ही इस तरह से की जाती है कि सेक्स को लेकर उनके मन में डर बैठ जाता है। वह सेक्स के नाम से ही घबराने लगती हैं और उन्हें अपनी किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान यह भी सुनने को मिलता है कि पहली बार किया गया संभोग बहुत कष्टदायक होता है और इस दौरान खूब ब्लीडिंग भी होती है। लंबे समय तक यह भी माना जाता रहा है कि यदि पहली बार संभोग के दौरान ब्लीडिंग न हो तो लडकी पहले सेक्स कर चुकी है। ये तमाम बातें लडकी के मन में मनोवैज्ञानिक रूप से संभोग के प्रति डर पैदा कर देती है और इस तरह की लडकियों को पहली बार संभोग के दौरान अक्सर दर्द की शिकायत होती है।
दर्द न हो इसके लिए क्या करना चाहिएक् यदि आप चाहते हैं कि आपको संभोग के दौरान दर्द ना हो तो आपको कुछ सेक्स पोजीशंस का इस्तेमाल पहली बार संभोग के दौरान करना चाहिए और आपको अपने मन से संभोग में होने वाले दर्द व अन्य मिथों को दूर कर देना चाहिए। इन सबके बावजूद भी आपको संभोग के दौरान दर्द से गुजरना पड रहा है तो आप डॉक्टर ही सलाह लें।

6. कौमार्य  (कुवांरापन ) किसे कहते है ?
कोई लड़की या लड़का कुंवारा तब कहा जाता है जब उन्होंने कभी भी संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश कराकर किया जाने वाला सेक्स) न किया हो। इसीलिए जब आप पहली बार योनि-संभोग करते हैं तो लोग कहते हैं कि ‘आपने अपना कौमार्य खो दिया है’। यह सुनिश्चित कर लें कि आपके साथी को इस बात का पता है कि आप पहली बार संभोग करने जा रहे हैं, जिससे आप कोई जल्दबाज़ी न करें और धीरे-धीरे तथा सौम्यता से आगे बढ़ें।

7. मैं बहुत जल्दी क्यों स्खलित हो जाता हूँ ?
सेक्स बहुत रोमांचक होता है, और वह भी पहली बार! कई लड़के न चाहते हुए भी जल्दी चरम आनंद (आर्गैज़्म) महसूस कर लेते हैं। इस बारे में चिंता न करें। जब आपको अधिक अनुभव हो जाएगा और आप अधिक तनावमुक्त रहेंगे तो आप स्खलन रोकना सीख जाते हैं। यदि आपको शर्मिंदगी महसूस होती है, तो इसे हल्के में लें। ऐसा कुछ कहें, जैसे कि, ‘आपने मुझे वास्तव में आनंद दे दिया!’ यदि आप ऐसी बातें कर हँस लेते हैं, तो ऐसा होना आपके लिए कोई समस्या नहीं बनेगी।

8. मुझे चरम आनंद ( आर्गैज़्म ) क्यों नहीं महसूस होता ?
लड़कियों को अक्सर संभोग के दौरान चरम आनंद महसूस नहीं होता। योनि में केवल लिंग के अंदर-बाहर करने से टिठनी उत्तेजित नहीं होती। यदि आपको चरम आनंद महसूस करने की इच्छा है तो अपनी टिठनी को स्वयं छूएं, या अपने साथी को ऐसा करने को कहें। केवल संभोग करने के समय ही आपको चरम आनंद महसूस करने का समय नहीं होता। आपके साथी संभोग के पहले या बाद में भी आपके टिठनी को उत्तेजित कर आपको चरम आनंद महसूस करा सकते हैं।

9. क्या पहली बार में ही कोई लड़की गर्भवती हो सकती है ?
जी हाँ, पहली बार में ही किसी लड़के के साथ संभेाग करने से लड़की गर्भवती हो सकती हैं। चाहे उनका पहले कभी मासिक धर्म हुआ हो अथवा नहीं। इसलिए हमेशा कंडोम का प्रयोग करें
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लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कितना सही ?


1. लिंग बाहर निकल कर वीर्य स्खलन गर्भ से बचने का अचूक तरीका है
ये तरीका साधारण है, स्खलन से ठीक पहले लिंग बाहर खींच लिया जाये ताकि योनि के अंदर वीर्य न पहुंचेI ये तरीका कारगर तो हो सकता है लेकिन सौ फीसदी कामयाब नहींI
जब इससे तरीके का प्रयोग सही तरीके से किया जाये तब भी 100 में से 4 महिलाओं को गर्भ ठहर ही जाता हैI और जिन लोगों ने इस काम में दक्षता हासिल नहीं की है, उन् लोगों में गर्भ ठहरने का हर साल का प्रतिशत 27 तक पाया गयाI यदि पुरुष सही समय पर लिंग बाहर खींच भी ले तो भी गर्भ ठहरने की पूरी सम्भावना को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि सेक्स के दौरान संभव है की थोड़ी मात्रा में वीर्य का रिसाव हो रहा हो और आप अनभिज्ञ होंI यही छोटी मात्रा का रिसाव गर्भ की वजह बन सकता हैI

2 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना आसान क्रिया है
यह सुनने में आसान भले ही लगता हो, लेकिन असल में उतना आसान नहीं है, खासकर उनके लिए जो हाल ही मैं ये तरीका अपनाने लगे हैंI इसके लिए दोनों साथियों में सही तालमेल की ज़रूरत होती हैI अनचाहे गर्भ के खतरे से सुरक्षा के लिए ज़रूरी है की आप कोई और विश्वसनीय तरीका अपनाएंI

3 : सही समय पर लिंग खींच लेने के लिए पुरुषों पर भरोसा किया जा सकता है
वो जोड़े जिनमे आत्म-नियंत्रण, अनुभव और विश्वास हो, इस तरीके का उपयोग सही तरीके से कर सकते हैंI अगर तीनो में से एक भी चीज़ की कमी हो तो बेहतर है की कोई और तरीका अपनाया जायेI जो पुरुष इस तरीके का प्रयोग करते हैं, उन्हें इस बात का सही अंदाज़ा होना चाहिए की कब उनका स्खलन होने वाला है, क्यूंकि गलती की गुंजाइश बहुत काम हैI इसलिए यह तरीका अनुभवहीन या शीघ्रपतन से जूझ रहे पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं हैI क्यूंकि अगर सही समय पर लिंग बाहर न निकला जाये तो गर्भ ठहर सकता हैI

4 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कारगर नहीं है
इस तरीके को अक्सर असरदार तरीका नहीं मन जाता जबकि सच ये है की 60 प्रतिशत जोड़ों ने इसका प्रयोग कभी न कभी ज़रूर किया हैI
हालाँकि गटमाकर संस्थान, न्यू यॉर्क द्वारा की गयी रिसर्च से पता चलता है की अगर लिंग को सही समय बाहर निकल लिया जाये तो अनचाहे गर्भ से 96 फ़ीसदी तक बचा जा सकता हैI कंडोम की मदद से इस बचाव की संख्या है 98 फीसदीI ज़्यादा फर्क नहीं, है ना?
सही तरीके से अंजाम दिया जाये तो ये अवश्य एक कारगर तरीका हो सकता हैI बात ये है की हर बार इसे सही अंजाम देना शायद आसान नहीं हैI लेकिन फिर भी, कोई तरीका इस्तेमाल ना करने से बेहतर ये तरीका ही हैI

5 : इसका प्रयोग सिर्फ गैर ज़िम्मेदार लोग करते हैं
हाल ही के एक अमरीकी अध्यन से पता चलता है की 5 फीसदी लोग गर्भ से बचाव के लिए केवल इसी तरीके का प्रयोग करते हैं, 15-44 साल की 60 फीसदी महिलाओं ने इस तरीके का इस्तेमाल कभी ना कभी किया हैI कहानी का सार ये है कि हर उम्र के लोग गर्भ से बचने के लिए इसका प्रयोग करते हैंI

6 : रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु नहीं होते
हर पुरुष को जाने अनजाने में थोड़ा वीर्य का रिसाव हो सकता हैI कई रिसर्च इस बात कि पुष्टि करती हैं कि रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु मौजूद नहीं होते, लेकिन ये रिसाव पहले के बचे हुए वीर्य के साथ बाहर आकर गर्भ का कारण बनने में सक्षम अवश्य हैI इसलिए बेहतर है कि सेक्स से पहले पेशाब किया जाये और लिंग को अच्छी तरह धोकर साफ़ किया जायेI

7 : इस तरीके के इस्तेमाल से सेक्स संक्रमण का खतरा नहीं है
नहीं! इस तरीके से सेक्स संक्रमण का खतरा पूरी तरह से हैI कंडोम ही सेक्स संक्रमण से बचने का सही तरीका हैI

8 : किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं
किताबी तौर पर तो किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं हैI लेकिन फिर भी, सेक्स से पहले यह बेहतर होगा कि पेशाब के ज़रिये बचा खुचा शुक्राणु वाला वीर्य फ्लश कर दिया जायेI लिंग को साफ़ कर लिया जायेI यदि स्खलन महिला के शरीर के ऊपर किया गया है तो उसे भी अच्छी तरह से साफ़ कर लेना ज़रूरी है.
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ओरल सेक्स के प्रकार

ओरल सेक्स के प्रकार
रिलेशनशिप में हार या जीत नहीं होती, न ही सेक्स में इसके लिए कोई जगह है। जैसे हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं, ठीक कुछ ऐसा ही अपने पार्टनर को खुश करने की कला में पारंगत को 'बेड का बादशाह' माना जाता है। क्या आप भी बनना चाहती हैं 'बेड का बादशाह'? हां, तो फिर याद रखिए, ओरल सेक्स है आपकी बादशाहत के राह की पहली मंजिल। इससे आप सही मायने में अपने घोड़े को थाम भी सकती हैं और उसे अपना गुलाम भी बना सकती हैं। तो फिर देर कैसा, आइए जानते हैं ओरल सेक्स के प्रकार और कैसे आप हो सकती हैं इस कला में पारंगत...

स्लाइवा सेक्स : अपने पार्टनर के 'पुरुषार्थ' पर जीभ का इस्तेमाल करें। याद रखें आपके जीभ का मोशन बॉटम से टॉप की ओर होना चाहिए। ध्यान रखें, यह पूरा सेशन सूखा न हो। स्लाइवा (लार) का जितना यूज करेंगी, आपके पार्टनर उतने ही इंजॉय करेंगे। और इसके बाद वह आपको इंजॉय कराएंगे, वो भी दिल खोलकर!

खींचें और छोड़ें : हालांकि टेस्टिकल (अण्डकोष) मर्दों का सबसे नाजुक एरिया होता है, बावजूद इसके ओरल सेक्स में इसके साथ छेड़छाड़ के अपने मजे हैं। इसे हल्के-हल्के सहलाएं और बीच-बीच में हल्के से खींचें और छोड़ दें। बेड में यह नयापन उनको पागल बना देगा और फिर आपको भी...

'पुरुषार्थ' पर लव बाइट : होंठ, गाल या गर्दन पर लव बाइट तो सुना भी होगा और देखा भी होगा। लेकिन घोड़े को अपना गुलाम बनाने के लिए थोड़ा बड़ा सोचिए। ओरल सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के 'पुरुषार्थ' पर लगाएं लव बाइट का तड़का। ध्यान रहे, होंठों और जीभ से दें यह लव बाइट, दांतों से नहीं, वरना...

हर पार्ट है जरूरी : पेनिस का सबसे उपरी हिस्सा सबसे सेंसिटिव होता है, फिर भी आप दूसरे को इग्नोर नहीं कर सकते। टेस्टिकल और पेनिस के जॉइंट वाला हिस्सा भी ओरल सेक्स में बहुत मायने रखता है। अपनी जीभ का जादू आप यहां भी चला सकते हैं।

अंदर तक का अहसास : आपके पार्टनर को तब बहुत अच्छा लगता है, जब उसके 'पुरुषार्थ' को आप अंदर तक ले जाती हैं, पॉर्न फिल्मों की तरह। हालांकि यह इतना आसान नहीं। बेहतर है आप इस टेक्निक को अपनाएं। ओरल सेक्स के समय अपने जीभ को मुंह के उपरी हिस्से से सटा लें। ऐसा करके आप अपने पार्टनर को वही खुशी दे सकती हैं, जिसकी उन्हें चाहत है।

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