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सुनो गल्स ! अपनी नंगी फ़ोटो लेने से पहले यह ज़रूर पढ़ लेना

प्रिय महिला मित्रो आप की एक अनजानी गलती आपकी जिंदगी नर्क बना सकती है

आज के दौर मे जो भी मोबाइल क्लीप ब्लु फिल्म एम एम एस आप देखती है

उस जगह आप भी हो सकती है जानिये कैसे

आप को जो भी करना है आप करो यार दोस्त बनावो उनके साथ सब कुछ करो मगर कभी भी कोई फोटो या विडियो ना बनावावो ना बनने दो आपका एक मिनट का बिरोध जो की थोड़ी देर के लिये बुरा तो लग सकता है आपके दोस्त को मगर आपकी जींदगी बचा सकता है 

मै मानती हु की आपके दोस्त अच्छे है और वो ऐसा कभी भी नही सोचते है और ना ही करेँगे लेकीन जब आप उन पलो को कैमरे मे कैद हो जाने देँगी फिर क्या होगा 
जब उनका मोबाइल चोरी हो जायेगा ?

या आपका भरोसा उन पर है ना की उनके दोस्तो पर 


अगर उनका कोई दोस्त किसी बहाने से उनका फोन ले लेता है और वो क्लीप ब्लुटुथ के माध्यम से ले ले फिर क्या होगा
आपको पुरी दुनिया नही जानती है लेकीन एक हजार लोग तो होँगे ही जो आप को पहचानते है अगर किसी एक के भी हाथ लग गयी वो क्लिप तो आप सोचो क्या होगा


भगवान ना करे अगर कभी आपका रिश्ता उनसे खत्म होता है तो आप ब्लैकमेल का शिकार हो सकती है ये जितनी विडियो आप देखती है ऐसे ही बनी है कोई अपना विडियो जान के नही डालता है


अब अगर मान लीजिये की उनकी मेमोरी पासवर्ड प्रोटक्टेड है तो बाजार मे सिर्फ 20 रूपये मे मेमोरी अनलाक हो जाती है 
फिर आपकी विडियो किस किस के हाथ लगेगी वो क्या करेगा ये आप भी नही जानती है और ना ही आपके दोस्त समझदारी मे ही सुरछा है आपकी इज्जत आपके हाथ है याद रखे लड़को का कुछ नही जाता है हर हाल मे नुकसान आपका ही होना है.
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सुरक्षित सेक्स

यदि आप चूमने एवं सहलाने से आगे बढ़ते हैं तो यह महत्वपूर्ण है की सेक्स सुरक्षित हो। यौन संचारित रोग एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए हमेशा ही सुरक्षित सेक्स करना चाहिए।

यह असुरक्षित है

कण्डोम एवं अन्य किसी गर्भनिरोधन जैसे गोलियों के बिना संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
कण्डोम के बिना गुदा मैथुन (गुदाद्वार में लिंग का प्रवेश)
लड़कों के लिए कण्डोम के बिना मुख मैथुन और लड़कियों के लिए डेन्टल डैम (जिसे वैजाइनल डैम भी कहते हैं - योनि को ढकने के लिए लेटेक्स का एक चैकोर टुकड़ा) के बिना मुख मैथुन
आपस में एक दूसरे के सेक्स के लिए खिलौने (सेक्स टॉय) को साफ़ किए बिना इस्तेमाल

यह सुरक्षित है


सहलाना, जीभ का इस्तेमाल करते हुए चूमना, गले लगाना, मालिश या मसाज करना, स्वयं का या अपने साथी का हस्तमैथुन
गुणवत्ता प्राप्त कण्डोम का इस्तेमाल करके संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
संक्रमण से बचने के लिए गुणवत्ता प्राप्त कण्डोम एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए किसी दूसरे प्रकार के गर्भनिरोधन जैसे गोलियों का प्रयोग करते हुए संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश)
शुक्राणु या रक्त (उदाहरण के लिए माहवारी का रक्त) के मुख में गए बिना मुख मैथुन

डबल डच

सेक्स का सबसे सुरक्षित तरीका डबल डच है - यानी कण्डोम एवं किसी अन्य गर्भनिरोधन जैसे गोलियों का प्रयोग। कण्डोम यौन संचारित रोग से सुरक्षा प्रदान करता है। दूसरे प्रकार का गर्भनिरोधन, जैसे गोलियाँ, अनचाहे गर्भ से बचाती हैं क्योंकि कण्डोम 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं होता । गर्भनिरोधन भाग देखें।
यदि मुख मैथुन के समय किसी के मुख में शुक्राणु या रक्त नहीं जाता है तो वे एचआईवी के जोखिम से बचे रहते हैं। पर उन्हें तब भी हरपीज़ जैसे अन्य यौन संचारित रोग हो सकते हैं।

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प्रथम संभोग...

स्‍त्री का पूरा भविष्‍य उसके प्रथम काम अनुभव के प्रति हुई प्रतिक्रिया से अत्‍यधिक प्रभावित होता है। मनोचिकित्‍सकों ने स्‍त्री के प्रथम काम अनुभव पर विशेष जोर दिया है।
स्‍त्री के लिए सेक्‍स एक जटिल अनुभव
सेक्‍सजनित अनुभव स्त्रियों की जटिल स्थिति प्रतिबिंबित करते हैं। स्‍त्री अपने व्‍यक्तिगत जीवन में अपनी जाति विशेष की प्रबल इच्‍छाओं को व्‍यक्‍त नहीं कर सकती। वह तो अन्‍य जाति (पुरुष) के हाथों शिकार होती रहती है। उस जाति विशेष की रुचियां स्‍त्री की रुचियों से नितांत भिन्‍न होती हैं। अन्‍य प्राणियों की अपेक्षा मानव जाति की स्‍त्री में यह अंतर अधिक होता है।

वैजाइना व क्‍लाइटोरिस में अंतर से पैदा होता है द्वंद्व
योनि (वैजाइना) और भगशिश्‍न (क्‍लाइटोरिस) में असमानता के कारण यह अंतर स्‍पष्‍ट दिखाई पड़ता है। बचपन में भगशिश्‍न ही स्‍त्री की काम इच्‍छा का केंद्र होता है। कुछ मनोचिकित्‍सकों का कहना है कि बचपन से ही कुछ लड़कियों में यौन संवेदनशीलता रहती है। यह एक गौण विवादास्‍पद विषय है।

स्‍त्री कामोत्‍तेजना का केंद्र भगशिश्‍न
भगशिश्‍न की बनावट बचपन से बालिग होने तक एक-सी रहती है। भगशिश्‍न द्वारा स्‍त्री की कामोत्‍तेजना पुरुष की कामोत्‍तेजना की ही तरह बहुत कुछ यांत्रिक ढंग से घटित होती है। परोक्ष रूप से यह स्‍वाभाविक रतिक्रिया से संबंधित होती है। इसका जनन क्रिया से कोई संबंध नहीं होता है।

पुरुष के हस्‍तक्षेप से योनि बनता है काम केंद्र
योनिद्वार द्वारा ही पुरुष स्‍त्री में प्रवेश करता है और उसकी जनन शक्ति को सक्रिय करता है। पुरुष के हस्‍तक्षेप द्वारा ही मानो योनि काम उद्विग्‍नता का केंद्र बनता है। इस क्रिया को एक रूप में सीमा भंग भी कह सकते हैं। प्राचीन काल में वास्‍तविक व बनावटी बलात्‍कार द्वारा ही स्‍त्री को उसकी बचपन की दुनिया से दूर कर पत्‍नी की भूमिका में ढाला जाता था। वास्‍तव में यह एक तरह का बलप्रयोग है जो एक लड़की को औरत में परिवर्तित कर देता है। आज भी कुछ ऐसे ही शब्‍दों, जैसे- कौमार्य भंग करना, कन्‍या के कौमार्य को दूर करना आदि का प्रयोग होता है।

योनि स्राव से मिलती है यौन तृप्ति
किनसे की रिपोर्ट के अनुसार, शरीर रचना और चिकित्‍सा संबंधी अनेक प्रमाणों के अनुसार योनि के भीतरी भाग में शिराएं नहीं होती। बिना 'शून्‍य' किए योनि में शल्‍य क्रिया की जा सकती है। भगशिश्‍न में भीतरी आधार के पास योनि में कुछ शिराएं होती हैं।
बिना उस क्षेत्र (भगशिश्‍न) को उत्‍तेजित किए ही स्‍त्री को अपनी योनि में किसी वस्‍तु (पुरुष लिंग) के प्रवेश का अनुभव होता है, खासकर तब जब योनि की मांसलता कस जाती है। परंतु स्‍त्री को यौन तृप्ति योनि के स्राव होने से ही होती है, काम शिराओं की संवेदनशीलता से नहीं।

स्त्रियों को हस्‍तमैथुन से मिलती है तृप्ति
इसमें शक नहीं कि योनि रति आनंद का स्‍थान है। स्त्रियां भी हस्‍तमैथुन करती हैं क्‍योंकि इससे उन्‍हें तृप्ति मिलती है।

संपूर्ण नाड़ी मंडल से संबंधित है यौन क्रिया

यौन प्रक्रिया बड़ी ही जटिल है क्‍योंकि वह केवल शारीरिक और मानसिक अवस्‍थाओं पर ही आधारित नहीं है, बल्कि इससे पूरा नाड़ी मंडल संबंधित रहता है और व्‍यक्ति विशेष की संपूर्ण आनुभाविक स्थिति का भी प्रभाव पड़ता है।

प्रथम संभोग से शुरू होता है काम क्रिया का नया सिलसिला 
प्रथम संभोग के बाद काम क्रिया का नया सिलिसिला प्रारंभ होता है। यह सिलसिला नए सिरे से नाड़ी मंडल को व्‍यवस्थित करना चाहता है। बचपन के काम केंद्र स्‍त्री के भगशिश्‍न को उत्‍तेजिक करने में कभी-कभी समय लगता है और यह भी संभव है कि इसे सफलतापूर्वक कभी भी उत्‍तेजित किया ही न जा सके। 

स्‍त्री दो तरीकों में से करती है अपनी पसंद का चुनाव
स्त्रियां दो तरीकों के बीच अपनी पसंद चुनती है। एक के अनुसार, स्‍त्री अपनी किशोर अवस्‍था की स्‍वतंत्रता को ज्‍यों का त्‍यों बनाए रखना चाहती है और दूसरे में स्‍त्री बिल्‍कुल पुरुष की हो जाती है और बच्‍चों को जन्‍म देना ही उसका मुख्‍य कार्य बन जाता है।
स्‍त्री केवल समर्पण करती है, लेकिन पुरुष के लिए यौन संतुष्टि स्‍वाभाविक परिणाम है


स्‍वाभाविक रति क्रिया में स्‍त्री पुरुष के ऊपर अवलंबित रहती है। जिस प्रकार पशु जगत में नर पशु ही आक्रामक भूमिका ग्रहण करता है, उसी प्रकार मानव जगत में भी पुरुष ही आगे बढ़ता है। स्‍त्री उसके आलिंगन पाश में जकड़ जाती है। लिंग में तनाव का अनुभव करने पर ही पुरुष स्‍त्री को ग्रहण कर सकता है।
*** वीर्यपतन के पश्‍चात पुरुष अशांति और परेशान करने वाले स्रोतों से मुक्‍त हो जाता है। मानो उसे पूर्ण शांति मिलती है।
*** चूंकि स्‍त्री 'अन्‍या' है, इसलिए उसकी निष्क्रियता पुरुष की स्‍वाभाविक क्रिया में बाधक नहीं बन पाती है। स्‍त्री केवल समर्पण कर देती है। एक निष्क्रिय स्‍त्री शरीर के साथ भी संभोग संभव है, लेकिन पुरुष की इच्‍छा की तुष्टि होना इसका स्‍वाभाविक परिणाम है।
***
प्रथम संभोग: विश्‍वास भी जगा सकता है और हीन भावना भी
पुरुष के प्रेम की तीव्रता से स्‍त्री में विश्‍वास जाग्रत होता है और इससे सर्वदा उसका हित ही होता है। चाहे उसकी उम्र 80 साल हो जाए, वह अपने को एक रात पुरुष की इच्‍छा को संतुष्‍ट करनेवाली भग्‍यशाली ही समझती है।

इसके विपरीत अनाड़ी प्रेमी या पति स्‍त्री में हीन भावना पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में स्‍त्री की मानसिक अवस्‍था असंतुलित हो जाती है। वह विषाद से भरकर सेक्‍स के प्रति उदासीन और ठंडी हो जाती है।

कष्‍टप्रद प्रथम संभोग के कुछ उदाहरण
मनोचिकित्‍सक स्‍टेकल ने ऐसे अनेक उदाहरण प्रस्‍तुत किए हैं। एक स्‍त्री को कई वर्षों तक पीठ में दर्द होता रहा और वह ठंडी बनी रही क्‍योंकि विवाह की रात्रि में योनि क्षत के समय उसे बहुत दर्द हुआ था और पति ने उस पर धोखा देने का आरोप लगाया था। उसके कौमार्य पर शक किया था। दूसरे पति ने अपनी पत्‍नी के पैरों को मोटा व भद्दा कहा था, जिस कारण वह उसी समय ठंडी हो गई। यह 'ठंडापन' उसमें सारी उम्र बना रहा और उसके अंदर मानसिक विकार भी उत्‍पन्‍न हो गए। एक अन्‍य स्‍त्री ने बताया कि उसके पति ने किस प्रकार पाशविकता से योनिक्षत किया। ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं
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हर रोज़ पूरी ऊर्जा के साथ कैसे करें संभोग ?

कौन होगा जो हर रोज़ संभोग नहीं करना चाहेगा, लेकिन कई बार ऊर्जा साथ नहीं देती या फिर क्‍लाईमैक्‍स तक पहुंचने में दिक्‍कत आती है। या यूं कहिये कि सेक्‍स की चरम सीमा तक आप रोज़ रोज़ नहीं पहुंच पाते हैं, जिस वजह से रोज संभोग करने का मन नहीं करता।
हम यहां बतायेंगे कुछ ऐसी टिप्‍स जिन्‍हें फॉलो करने से आप हर रोज़ पूरी ऊर्जा के साथ संभोग कर सकेंगे। वो भी बिना मूड को खराब किये।

1. कंट्रोल-
कई पुरुषों में संभोग से पहले ही रतिनिष्‍पत्ति की समस्‍या होती है। उनका वीर्य संभोग से पहले ही स्‍खलित हो जाता है। इस वजह से वो संभोग नहीं कर पाते हैं। वैसे यह कोई बीमारी नहीं होती है। यह सिर्फ आपके मूड पर निर्भर करता है। कई बार आप संभोग से पहले ही इतने ज्‍यादा उत्‍तेजित हो जाते हैं कि आपका वीर्य डिस्‍चार्ज हो जाता है। इसके लिये जरूरी है खुद पर कंट्रोल। अगर आप खुद पर कंट्रोल रखते हैं, तो आप जितनी देर चाहें, उतनी देर संभोग कर सकते हैं।
खुद पर कंट्रोल करने के लिये संभोग से आधे घंटे पहले मैथुन कर लें। उसके बाद संभोग के दौरान जैसे ही क्‍लाईमैक्‍स तक पहुंचने वाले हों, वैसे ही रुक जायें। अपने ध्‍यान को दूसरी बातों की ओर ले जायें। अगर आप रुकना नहीं चाहते हैं, तो संभोग करते वक्‍त अपने दिमाग में उन बातों को सोचें जिनसे आपको तनाव हो सकता है। ऐसा करने से आप तुरंत डिस्‍चार्ज नहीं होंगे।
2. फोर प्‍ले-
जितनी ज्‍यादा देर तक आप फोर प्‍ले करेंगे, संभोग का मज़ा उतना ज्‍यादा होगा। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को फोर प्‍ले ज्‍यादा अच्‍छा लगता है। फोर प्‍ले का फायदा भी उन्‍हें ही ज्‍यादा मिलता है। ऐसा इसलिये क्‍योंकि पुरुष तो तीन-चार मिनट के अंदर डिस्‍चार्ज हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं को चरम सीमा तक पहुंचने में समय लगता है। ऐसा करके आप अपनी पार्टनर को ज्‍यादा खुश रख सकते हैं।
3. संभोग की गति-
संभोग के वक्‍त अपनी गति को नियंत्रित रखने से आप ज्‍यादा देर तक संभोग कर सकते हैं। जोश में आकर होश खो देने से मज़ा किरकिरा हो सकता है। महिला अथवा पुरुष दोनों में जो भी व्‍यक्ति ऊपर होता है, उसी की जिम्‍मेदारी होती है गति पर नियंत्रण रखने की।
4. पार्टनर की मदद-
कई बार होता है कि पुरुष पहले ही स्‍खलित हो जाते हैं, जिस वजह से उनकी पार्टनर को कई बार निराशा हाथ लगती है। इसलिये बेहतर होगा यदि आप ऊपर की तीन टिप्‍स को अपनाते हुए संभोग करें। ऐसा करने से आपकी पार्टनर आपके साथ-साथ डिस्‍चार्ज होगी और संभोग का मज़ा कई गुना ज्‍यादा होगा। 

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काश कि आपको पता होते महिलाओं के ये सीक्रेट


बहुत सी ऐसी बातें है जिसकी चाहत हर महिला को होती है लेकिन वो स्‍वयं इन्हें अपनी जुबां से कभी नहीं कहती। जैसे उनका प्रेमी उनके नखरे उठाएं, उनके आगे-पीछे घूमें, उन्हें महत्‍वपूर्ण समझें, उनकी हर बात मानें।


1. महिलाओं के सीक्रेट
महिलाओं का स्‍वभाव बहुत शार्मिला होता है। इसलिए उनके दिल की बात को जुबां तक आने में काफी समय लगता हैं। लेकिन बहुत सी बातें ऐसी है जो हर महिला चाहती हैं। जैसे अपने प्रेमी से प्‍यार और देखभाल की उम्‍मीद, साथ ही यह भी की उनका प्रेमी उनके नखरे उठाएं, उनके आगे-पीछे घूमें, उन्हें महत्‍वपूर्ण समझें, उनकी हर बात मानें। आइये इसके अलावा महिलाओं की सिक्रेट के बारे में जानें।

2. अपनी तारीफ सुनना
महिलाओं को हमेशा उनकी तारीफ करने वाले पुरुष बहुत अच्‍छे लगते हैं। ऐसे में उन्‍हें बहुत अच्‍छा लगता है जब प्रेमी उनमें किसी भी तरह का बदलाव दिखने पर तुरंत उनकी प्रशंसा करें। जैसे अगर महिला फिट दिखें, कोई नया हेयरकट करवाया हो या आकर्षक लगें,- तो उनकी तारीफ जरुर करें।

3. ध्यान रखने वाला पुरुष
महिलाओं को केयर करने वाले पुरुष बहुत पसंद होते है। महिलाएं संवेदनशील होती है इसलिए उन्‍हें ऐसे ही पुरुष बहुत अच्‍छे लगते है। जो परेशानी के समय उनकी अच्‍छे से देखभाल कर सकें।

4. कपड़ों से प्रभावित होना
ज्‍यादातर महिलाएं पुरूषों को उनके पहनावे से भी पसंद करती है। इसलिए पुरुषों को चाहिए कि वह महिलाओं को अपने कपड़ों से प्रभावित करने की कोशिश करें। पुरुषों को हमेशा अपने सौंदर्य और कपडों पर ध्यान देना चाहिए। अगर, महिलाएं आपको टाइट जींस में देखना पसंद करती है, तो उनके लिए ज्यादातर टाइट जींस पहनें।

5. पुराने संबंधों के बारे में जानना
अगर महिलाएं आप से आपके पुराने संबंधों के बारे में बात करना चाहे, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आपने कुछ गलत किया है। अपने संबंधों के बारे में बात करने से ना डरें। यह तो आप दोनों के लिए अच्छी बात है, क्‍योंकि सच्चाई और लंबी बातचीत आप लोगों को एक दूसरे के करीब ला सकती है।

6. सुझावों को थोपें नहीं
अकसर पुरुष महिलाओं की समस्‍या सुने बिना अपने सुझावों को उनपर थोपने लगते हैं। पुरुष, अपने राय को उन पर थोप कर उनकी दुनिया को सीमित कर देते हैं। इसलिए अगर वह किसी बात से परेशान है, तो उन्हें सलाह देने से पहले उनकी बात को अच्‍छे से सुनें।

7. रिश्‍ते में रोमांस
महिलाएं अपने रिश्‍ते की कद्र करने के साथ रिश्‍ते में रोमांस को निरंतर बनाये रखना चाहती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आपका रिश्‍ता चाहे वह 5 म‍हीने से हो या 5 सालों से उसमें रोमांस को हमेशा बनाये रखें।

8. कमियों को जानना
महिलाओं को प्रशंसा करने वाले पुरुषों के साथ-साथ कमियां बताने वाले पुरुष भी पसंद होते हैं। जैसे, अगर महिला लंबे समय तक काम करने के बाद काफी थक गई हैं और चिडचिडापन महसूस कर रहीं हैं तो उस समय उनकी कमी को बताने वाले पुरुष पसंद आते हैं।

9.  बातों को ध्‍यान से सुनना
महिलाएं अकसर यह जानने की कोशिश करती हैं कि उनकी बातों को आप कितनी ध्‍यान से सुनते हो और कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। इसलिये महिलाओं से बात करते समय केवल सर हिलाना काफी नहीं है उनकी बात को महत्वपूर्ण ढंग से सुने।

10. सेक्‍स में उनकी चाहत
महिला अकसर सेक्‍स के बारे में बात करना और अपने साथी को खुश करना चाहती हैं। इसलिए आप भी सेक्‍स के दौरान वह करें जो महिला साथी चाहती है। इसके लिए विनम्र दृष्टिकोण अक्सर सबसे अच्छा होता है। पहले, यह पूछे कि वह क्या चाहती है। फिर अपनी इच्छा को सकारात्मक और सही तरीके से उनके सामने व्यक्त करें।

11. शिष्टता का व्‍यवहार
जब रोमांस की बात आती है तो बहुत सारी महिलाएं पुरुषों की पारंपरिक मर्दाना भूमिका ही पसंद करती है। जैसे लड़की बैठने के लिये खुद ही कुर्सी खीच सकती हो, लेकिन वह आपका इंतजार करती है कि आप उसको कुर्सी खींच कर दें। तो समय आ गया है कि आप उसकी नजरों में सज्जन पुरुष बन जाएं।

12. आपकी शर्ट उनके लिए प्यार का चुंबक
क्‍या आपकी महिला साथी आपके स्‍वेटर में सिकुड़ने या शर्ट में घुसने का प्रयास करती हैं। कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, महिलाओं को पुरुष के पसीने की गंध से आरामदायक प्रभाव पड़ता है। क्‍या आप महिलाओं के इस सीक्रेट के बारे में जानते हैं.
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आपको नहीं मालूम होंगे कंडोम के ये 4 साइड इफेक्ट्स



कंडोम के प्रयोग से भी हो सकते हैं साइड इफेक्ट्स।
इसके लगातार इस्तेमाल से हो सकती है एलर्जी भी।
योनि ग्रीवा में हो सकती है सूजन और घाव भी।
योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को पहुंचाता है नुकसान।

कंडोम प्रयोग के लाभ के बारे में अक्सर लोग जानते होते हैं, लेकिन कंडोम के भी कुछ ऐसे साइड इफेक्ट्स भी हैं इसकी लोगों को अमूमन कम ही जानकारी होती है। कंडोम न केवल आपकी सेक्स लाइफ को प्रभावित कर सकते हैं बल्कि आपको यौन संबंधित बीमारियों का भी शिकार बना सकते हैं। आइए जानें, कंडोम के साइड इफेक्ट्स के बारे में-

दर्द एवं एलर्जी :
ऐसा देखा गया है कि लगातार अर्थात सप्ताह में दो से अधिक बार कंडोम का उपयोग करने से योनि की आंतरिक परत और झिली में संवेदनशीलता काम या समाप्त हो जाती है। जिसके कारण स्त्रियों की यौनि से स्खलित होने वाले प्राकृतिक लुब्रिकेंट (चिकनाई युक्त) दृव्यों का स्वत: स्खलन कम हो जाता है या पूरी तरह से बन्द हो भी जाता है। जिसके चलते योनि में खरास या सूखापन आता देखा गया है। जिसके कारण कंडोम का अधिक उपयोग करने वाली औरतों की योनि स्पर्श कातर (छुअन से ही दर्द महसूस होने वाली) हो जाती है। ऐसी स्थिति का सामना कर रही स्त्रियों द्वारा अपने प्रेमी या पति के साथ बिना कंडोम के सेक्स करने पर यौनि में असहनीय दर्द, जलन, एलर्जी और खुजली होना आम बात है।

योनि ग्रीवा में कट या घाव :
कंडोम का अधिक उपयोग करने से योनि ग्रीवा में कटाव और छिलन के साथ-साथ दर्दनाक घाव भी होते देखे गये हैं। जिसके चलते योनि में सूजन आ जाती है। योनि में सूजन की स्थिति में सेक्स करने पर योनि का आन्तरिक हिस्सा फिर से घायल हो जाता है। जिससे योनि में फिर से जख्म हरे हो जाते हैं। कई बार जख्मों से रक्तस्त्राव भी होने लगता है। जिसे स्त्रियां असमय मासिक चक्र का आना मानकर उसकी परवाह नहीं करती हैं और इस कारण से उन्हें जननांगों और गर्भाशय में भयंकर संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। जिससे योनि ग्रीवा या गर्भाशय में कैंसर होने का खतरा भी बना रहता है।

लेटेक्स के बने कंडोम :
लेटेक्स के बने कंडोम आपको गर्भधारण और यौन-संचारित रोगों से बचाते हैं। मगर ये ऐलर्जी का सबसे आम कारण हैं और सेक्स के दौरान स्त्री की प्रतिक्रिया को घटा देते हैं, क्योंकि इसके प्रयोग के कारण योनि में सूखापन और खुजली के रूप में देखा गया है। इसका सबसे खराब दुष्प्रभाव है, स्त्री-पुरुष के जननांगों पर गंभीर दाने या जानलेवा आघात के रूप में दिख सकता है।

योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान :
प्रकृति ने जननांगों को खुद ही अपनी प्रतिरक्षा की जन्मजात शक्ति प्रदान की लेकिन यदि सप्ताह में दो बार से अधिक कंडोम का उपयोग किया जाता है तो कंडोम योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके उपयोग से योनि की अम्लीय वातावरण में उथल-पुथल पैदा हो जाती है।
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संभोग के संबंध में पूछे जाने वाले आम सवाल


1. मैंने हमेशा सुरक्षित सेक्स किया है फिर भी मुझे यौनसंचारित रोग लग गया है! यह कैसे संभव है ?
सुरक्षित संभोग करने का आशय, प्रायः सेक्स के दौरान कंडोम पहनने से और यह सुनिश्चित करने से है कि आपके मुंह में वीर्य या मासिक धर्म का खून न चला जाए। तब आप एड्स फैलाने वाले एचआईवी विषाणु तथा क्लेमाइडिया और गोनोरिया जैसे संक्रमणों से सुरक्षित रहते हैं।
फिर भी यौनसंचारित रोगों के विषाणु और जीवाणु दूसरे तरीकों से भी आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एक-दूसरे का हस्तमैथुन करने से अथवा सेक्स किए बिना केवल जननांगों को छूने से। यहां तक कि जब आप हमेशा कंडोम को प्रयोग करते हैं तो भी यौनसंचारित रोग लगने की कुछ न कुछ संभावना बनी ही रहती है।
2. पहली बार संभोग किस उम्र में ?
कोई भी व्‍यक्ति जीवन में पहली बार संभोग कब करता है ? यह सवाल यदि आपसे पूछें तो शायद आप तेजी से जवाब देंगे- 26 से 28 वर्ष। यह जवाब अगर आप 20 साल पहले देते, तो शायद सही होता, लेकिन आज नहीं है। जी हां पिछले दो दशकों में पहली बार संभोग करने की औसतन उम्र में गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि ये आंकड़े विभिन्‍न देशों और लाइफस्‍टाइल पर निभर करते हैं।
जीवन भर संभोग नहीं करने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्‍या बहुत कम होती है। ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक ब्रिटेन में पहली बार संभोग की उम्र 25 वर्ष से घटकर 16 व 17 साल हो गई है। शोध में पाया गया कि अधिकांश टीनेजर्स 15 साल की उम्र में ही संभोग कर चुके होते हैं। अफसोस की बात यह है कि अधिकांश टीनेजर अज्ञानतावश कंडोम का इस्‍तेमाल नहीं करते।
इंदिरा गांधी मुक्‍त विश्‍वविद्याल यके काउंसिलर व लखनऊ के श्री जयनारायण पीजी कॉलेज के रीडर डा. आलोक चांटिया से हमने इस मुद्दे पर बात की तो उन्‍होंने कहा कि पहली बार संभोग करने की उम्र में गिरावट का सबसे बड़ा कारण टीनेजर्स में यौन जनित बीमारियों व यौन अपराधों के बारे में जानकारी का कम होना है। उन्‍होंने कहा कि भारत में ऐसा कोई अध्‍ययन फिलहाल तो नहीं किया गया है, लेकिन हां अगर अध्‍ययन किया जाए, तो पहली बार संभोग करने की उम्र 17 भले ही ना हो, 23 वर्ष जरूर होगी।
डा. चांटिया ने कहा कि जिस तरह टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट व अन्‍य मीडिया में कंडोम और आई-पिल्‍स का खुलकर प्रचार किया जा रहा है वो गलत है। क्‍योंकि कंडोम और आई-पिल्‍स आदि के बारे में जानने के बाद टीनेजर्स के मन से डर खत्‍म हो जाता है। जबकि पहले ऐसा नहीं था। 20 साल पहले भारत में टीनेजर्स आपस में यौन संबंधों की बात तक करना पसंद नहीं करते थे। डा. चांटिया का कहना है कि हमारा देश एचआईवी-एड्स की रोकथाम के लिए जिस प्रकार कंडोम का प्रचार कर रहा है, उससे आज की युवा पीढ़ी भटकती जा रही है।
3. मैंने किसी लड़की के साथ असुरक्षित संभोग किया था, लेकिन उसके बाद पेशाब कर अपने लिंग को अच्छी तरह धो लिया था। क्या इससे मुझे रोग से बचने में सहायता मिलेगी ?
जी नहीं, पेशाब करने या अपने जननांगों को धो लेने से असुरक्षित संभोग करने के कारण रोग के लगने का जोखिम कम नहीं हो जाता है। यदि लड़की को कोई यौनसंचारित रोग है, तो हो सकता है वह आपको लग गया हो। आप, डॉक्टर के पास या चिकित्सालय जाएं और जांच कराएं। और अगली बार से कंडोम का प्रयोग करें।

4. मेरे बॉयफ्रेंड गर्भनिरोध के लिए ‘लिंग को योनि से बाहर निकाल कर वीर्यपात करने’ की विधि अपनाना चाहते हैं। क्या यह सुरक्षित संभोग है ?
जी नहीं, यह सुरक्षित नहीं है। हालांकि योनि में शुक्राणु तो प्रवेश नहीं करते, किंतु वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ (प्री-कम)  प्रवेश करते हैं। इससे आपको यौनसंचारित रोग होने या संचारित करने अथवा गर्भवती होने का जोखिम बना रहता है।
•यौनसंचारित रोग
वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ ( लड़के के लिंग से निकलने वाले पारदर्शी तरल पदार्थ ) ( प्री-कम )) में एचआईवी ( वह विशाणु virus जिससे एड्स aids होता है ) तथा दूसरे यौनसंचारित रोग, जैसे कि क्लाइमेडिया, गोनोरिया, जेनिटल हर्पीज, जेनिटल वाटर्स, सिफलिस या ट्राइकोमोनियासिस हो सकते हैं। यदि आप गर्भनिरोधक गोली खाती हैं, तो यह आपको गर्भवती होने से तो बचाएगी, किंतु किसी यौनसंचारित रोग के होने से नहीं।
•गर्भधारण
गर्भनिरोध के लिए ‘लिंग को योनि से बाहर निकाल कर वीर्यपात करने’ की विधि, (जिसे कोइटस इन्टरप्टस) भी कहते हैं, गर्भनिरोध का बहुत असरदार तरीका नहीं है। वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ में भी कोई शुक्राणु कोशिका मौज़ूद हो सकती है। इससे भी अधिक ज़रूरी बात यह है कि इसमें लड़के को समय का अनुमान लगाने में गलती हो सकती है, और हो सकता है लिंग को बाहर निकालने में देर हो जाए।

5. क्या पहली बार संभोग करते समय दर्द हेाता है ?
ऐसा होना ज़रूरी नहीं है। यदि लड़की तनावमुक्त और उत्तेजित है तो इसमें दर्द नहीं होता। यदि आप बहुत तनाव में हैं तो योनि सूखी और तनावयुक्त रह सकती है। इससे इस बात की अधिक संभावना होती है कि झिल्ली टूट जाएगी और संभोग कष्टदायक हो जाएगा। पहली बार आप अक्सर घबराए हुए होते हैं, इसलिए ऐसा आसानी से हो सकता है। लेकिन यदि आप दोनों कोई जल्दबाज़ी नहीं करते, तो इसमें दर्द नहीं हेाता है।
क्यों होता है संभोग के दौरान दर्द
भारतीय समाज में लडकी की परवरिश ऎसे माहौल में होती है कि उसके मन में संभोग को लेकर डर बैठा होता है। पहली बार संभोग से कई तरह के मिथ जुडे हुए हैं। लोगों का ऎसा मनोविज्ञान है कि पहले संभोग के समय में लडकियों को काफी दर्द होता है। इस दौरान ब्लीडिंग को लेकर भी अनेक तरह की भ्रांतियां हमारे समाज में मौजूद हैं। क्या सचमुच पहला संभोग कष्टदायक होता है ?
संभोग करने की स्थिति से भी दर्द का कुछ नाता हैक् ऎसे कुछ भ्रम लोगों के मन में अक्सर रहते हैं। कैसे आप इस दर्द से निजात पाकर सेक्स संबंधों का आनंद ले सकते हैं और अपने रिश्तों को सामान्य बना सकते हैं।
आइए जानें क्यों होता है संभोग के दौरान दर्द ?
इससे जुडी बातें सच हं या ये सिर्फ एक मिथ है ?
इस दर्द को मेडिकल टर्म में क्या कहते हैंक् संभोग के दौरान होने वाले दर्द को मेडिकल की भाषा में दाईस्पेरेनिया कहते हैं। यह ऎसा दर्द है जो एक बार होने पर बार-बार हो सकता है और इस दर्द का असर महिला-पुरूषों के रिश्ते पर बहुत बुरा पडता है।
क्यों होता है दर्द क वास्तव में पहली बार संभोग के समय महिलाओं को होने वाले दर्द का मुख्य कारण योनि का बहुत ज्यादा टाइट होना है। ऎसा तब होता है जब योनि की मांसपेशियां खिंच जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। ऎसी स्थिति में संभोग के समय महिला को बहुत अधिक दर्द होता है। ऎसा उन स्त्रयों के साथ होने की संभावना रहती है जो सेक्स संबंधों को बहुत बुरा मानती हैं और संभोग के समय पुरूष के साथ सहयोग नहीं करती। इसका मनोवैज्ञानिक असर ये होता है कि संभोग के समय योनि की मांसपेशिया सिकुड जाती हैं और तेज दर्द होता है।
योनि में किसी भी तरह का इंफेक्शन भी संभोग के समय दर्द का एक बहुत बडा कारण है। अक्सर योनि के आकार में परिवर्तन हो जाता है जिसे एंड्रियोमेट्रियोसिस कहते हैं।  यदि आपको भी संभोग के दौरान दर्द होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
संभोग के दौरान होने वाले दर्द का एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। लडकियों की परवरिश बचपन से ही इस तरह से की जाती है कि सेक्स को लेकर उनके मन में डर बैठ जाता है। वह सेक्स के नाम से ही घबराने लगती हैं और उन्हें अपनी किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान यह भी सुनने को मिलता है कि पहली बार किया गया संभोग बहुत कष्टदायक होता है और इस दौरान खूब ब्लीडिंग भी होती है। लंबे समय तक यह भी माना जाता रहा है कि यदि पहली बार संभोग के दौरान ब्लीडिंग न हो तो लडकी पहले सेक्स कर चुकी है। ये तमाम बातें लडकी के मन में मनोवैज्ञानिक रूप से संभोग के प्रति डर पैदा कर देती है और इस तरह की लडकियों को पहली बार संभोग के दौरान अक्सर दर्द की शिकायत होती है।
दर्द न हो इसके लिए क्या करना चाहिएक् यदि आप चाहते हैं कि आपको संभोग के दौरान दर्द ना हो तो आपको कुछ सेक्स पोजीशंस का इस्तेमाल पहली बार संभोग के दौरान करना चाहिए और आपको अपने मन से संभोग में होने वाले दर्द व अन्य मिथों को दूर कर देना चाहिए। इन सबके बावजूद भी आपको संभोग के दौरान दर्द से गुजरना पड रहा है तो आप डॉक्टर ही सलाह लें।

6. कौमार्य  (कुवांरापन ) किसे कहते है ?
कोई लड़की या लड़का कुंवारा तब कहा जाता है जब उन्होंने कभी भी संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश कराकर किया जाने वाला सेक्स) न किया हो। इसीलिए जब आप पहली बार योनि-संभोग करते हैं तो लोग कहते हैं कि ‘आपने अपना कौमार्य खो दिया है’। यह सुनिश्चित कर लें कि आपके साथी को इस बात का पता है कि आप पहली बार संभोग करने जा रहे हैं, जिससे आप कोई जल्दबाज़ी न करें और धीरे-धीरे तथा सौम्यता से आगे बढ़ें।

7. मैं बहुत जल्दी क्यों स्खलित हो जाता हूँ ?
सेक्स बहुत रोमांचक होता है, और वह भी पहली बार! कई लड़के न चाहते हुए भी जल्दी चरम आनंद (आर्गैज़्म) महसूस कर लेते हैं। इस बारे में चिंता न करें। जब आपको अधिक अनुभव हो जाएगा और आप अधिक तनावमुक्त रहेंगे तो आप स्खलन रोकना सीख जाते हैं। यदि आपको शर्मिंदगी महसूस होती है, तो इसे हल्के में लें। ऐसा कुछ कहें, जैसे कि, ‘आपने मुझे वास्तव में आनंद दे दिया!’ यदि आप ऐसी बातें कर हँस लेते हैं, तो ऐसा होना आपके लिए कोई समस्या नहीं बनेगी।

8. मुझे चरम आनंद ( आर्गैज़्म ) क्यों नहीं महसूस होता ?
लड़कियों को अक्सर संभोग के दौरान चरम आनंद महसूस नहीं होता। योनि में केवल लिंग के अंदर-बाहर करने से टिठनी उत्तेजित नहीं होती। यदि आपको चरम आनंद महसूस करने की इच्छा है तो अपनी टिठनी को स्वयं छूएं, या अपने साथी को ऐसा करने को कहें। केवल संभोग करने के समय ही आपको चरम आनंद महसूस करने का समय नहीं होता। आपके साथी संभोग के पहले या बाद में भी आपके टिठनी को उत्तेजित कर आपको चरम आनंद महसूस करा सकते हैं।

9. क्या पहली बार में ही कोई लड़की गर्भवती हो सकती है ?
जी हाँ, पहली बार में ही किसी लड़के के साथ संभेाग करने से लड़की गर्भवती हो सकती हैं। चाहे उनका पहले कभी मासिक धर्म हुआ हो अथवा नहीं। इसलिए हमेशा कंडोम का प्रयोग करें
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सेक्स से जुड़े ये 25 बातें नहीं जानते होंगे आप ?


1) मैथुन करते समय स्त्री की यौनि और छाती के अलावा नाक का भीतरी भाग भी फ़ूल जाता है।
2) मानव को यौवन की चरम अवस्था 17-18 वर्ष की आयु में प्राप्त हो जाती है।
3) एक बार के संभोग में पुरुष की 100 केलोरी दहन होती है।
4) करीब एक तिहाई औरतें 80 के बाद भी यौन-क्रिया में संलग्न रहती है।
5) एक बार के संभोग में जो वीर्य स्खलित होता है उसमें 2 से 5 मिलियन शुक्राणु होते हैं।
6) यौन क्रिया की चरम अवस्था (ओर्गास्म) के समय स्त्री-पुरुष दोनों की हृदय की धडकन 140 प्रति मिनिट हो जाती है।
7) स्त्रियां अपनी पूरे संतानोत्पत्ति काल में तीन हजार से भी ज्यादा बार सेक्स करती हैं। 40 वर्ष तक के पुरुषों के लिंग मैथुन के वक्त सिर्फ़ 10 सेकंड में खडे (इरेक्टेड) हो जाते हैं।
9) 41% पुरुष और ज्यादा बार संभोग की इच्छा रखते हैं जबकि केवल 29%
प्रतिशत महिलाएं रजामंद होती हैं। 
10) 15% पुरुष काम के समय ( आन ड्युटी) ही संभोग कर लेते हैं।
11) करीब 75% पुरुष प्रविष्ट करने के बाद तीन मिनिट में स्खलित हो जाते हैं।
12) पांच प्रतिशत युवा प्रतिदिन संभोग करते हैं जबकि 20% सप्ताह में तीन से चार बार सेक्स करते हैं।
13) सेक्स के बाद एक घंटे में शुक्राणु 7 इंच तक आगे बढ़ सकता है।
14) अधिकांश स्त्रिया पुरुष की खूबियों का आकलन करने में लिंग की साईज को नवें पायदान पर रखती हैं जबकि पुरुष लिंग की साईज को ज्यादा महत्व देते हुए तीसरे पायदान पर रखते हैं।
15) यौन विशेषज्ञों का मत है कि सेक्स की मस्तिष्क प्रशांतक शक्ति “वेलियम”
से 5 गुनी अधिक है।
16) टेंशन से मस्तिष्क की रक्त वाहिनिया संकुचित होकर सिर दर्द का कारण बनता है। सेक्स टेंशन को दूर कर सिर दर्द से मुक्ति देता है।
17) एक ड्राईवर पूरे जीवन में औसत 6 बार कार में ही सेक्स का लुत्फ़ लेता है।
18) स्त्री के शरीर में नर शुक्राणु 9 दिन तक जीवित रह सकते हैं।
19) 30% पुरुष शीघ्र पतन की गिरफ़्त में हैं जबकि 10% लोग “तनाव दोष”(इरेक्टाईल डिस्फ़न्क्शन) से पीडित है।
20) 82% महिलाएं अपने साथी के लिंग साईज से पूर्री तरह संतुष्ट हैं।
21) माईग्रेन से पीडित महिलाएं ज्यादा कामुक होती हैं।
22) ज्यादतर महिलाएं अंधेरे में सेक्स करना पसंद करती है।
23) किसी भी अन्य जगह के बजाय मर्द बिस्तर में ज्यादा झूंठ बोलते हैं। 
24) पुरुष अपने सामान्य जीवनकाल में 17 लिटर वीर्य स्खलित करता है।
25) सेक्स सक्रिय लोग संयम से रहने वले लोगों की बनिस्बत ज्यादा उम्र जीते हैं।
26) स्त्री की भगनासा मे पुरुष के लिंग की तुलना में दो गुने नाडी तंतु रहते हैं। भगनासा सहलाने से स्त्री तुरंत उत्तेजितहो जाती है
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सिर्फ लड़कियो के लिये ये पोस्ट, लड़के दुर रहे


प्रिय महिला मित्रो आप की एक अनजानी गलती आपकी जिंदगी नर्क बना सकती है
आज के दौर मे जो भी मोबाइल क्लीप ब्लु फिल्म एम एम एस आप देखती है
उस जगह आप भी हो सकती है जानिये कैसे
आप को जो भी करना है आप करो यार दोस्त बनावो उनके साथ सब कुछ करो मगर कभी भी कोई फोटो या विडियो ना बनावावो ना बनने दो आपका एक मिनट का बिरोध जो की थोड़ी देर के लिये बुरा तो लग सकता है आपके दोस्त को मगर आपकी जींदगी बचा सकता है 
मै मानती हु की आपके दोस्त अच्छे है और वो ऐसा कभी भी नही सोचते है और ना ही करेँगे लेकीन जब आप उन पलो को कैमरे मे कैद हो जाने देँगी फिर क्या होगा 
जब उनका मोबाइल चोरी हो जायेगा 
या आपका भरोसा उन पर है ना की उनके दोस्तो पर 
अगर उनका कोई दोस्त किसी बहाने से उनका फोन ले लेता है और वो क्लीप ब्लुटुथ के माध्यम से ले ले फिर क्या होगा
आपको पुरी दुनिया नही जानती है लेकीन एक हजार लोग तो होँगे ही जो आप को पहचानते है अगर किसी एक के भी हाथ लग गयी वो क्लिप तो आप सोचो क्या होगा
भगवान ना करे अगर कभी आपका रिश्ता उनसे खत्म होता है तो आप ब्लैकमेल का शिकार हो सकती है ये जितनी विडियो आप देखती है ऐसे ही बनी है कोई अपना विडियो जान के नही डालता है
अब अगर मान लीजिये की उनकी मेमोरी पासवर्ड प्रोटक्टेड है तो बाजार मे सिर्फ 20 रूपये मे मेमोरी अनलाक हो जाती है 
फिर आपकी विडियो किस किस के हाथ लगेगी वो क्या करेगा ये आप भी नही जानती है और ना ही आपके दोस्त समझदारी मे ही सुरछा है आपकी इज्जत आपके हाथ है याद रखे लड़को का कुछ नही जाता है हर हाल मे नुकसान आपका ही होना है.
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मासिक धर्म के दौरान संभोग ?


तमाम लोगों के लिये सेक्‍स एक आदत सी बन जाती है। कई बार ऐसा होता है कि बगैर संभोग किये उन्‍हें नींद नहीं आती, ऐसे में महिलाओं को खासी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है। मासिक धर्म और कभी कभी संक्रमण के कारण महीने में करीब एक सप्‍ताह तक वो सेक्‍स नहीं कर पाती हैं। तमाम पुरुष ऐसे हैं, जो मासिक धर्म के दौरान पत्‍नी से सेक्‍स नहीं करते, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जो उस दौरान भी नहीं मानते।
यदि आपके पति ऐसे हैं, तो आप उन्‍हें रोक तो नहीं सकतीं, लेकिन हां कुछ सावधानियां जरूर बरत सकती हैं। और हां कुछ बातें भी आपको जानना बहुत जरूरी है। वैसे चिकित्‍सकों की सलाह हमेशा से यही रहती है कि पीरियड के दौरान महिलाओं को संभोग से परहेज करना चाहिये।

जरूरी बातें
- मेंस्‍ट्यूरेशन यानी मासिक धर्म के दौरान आप गर्भवती नहीं हो सकतीं, यह बात दिमाग से बिलकुल निकाल दीजिये।
- ऐसे में संभोग करने से प्रेगनेंट होने के चांस ज्‍यादा रहते हैं।
- ऐसे में संभोग करने से इंफेक्‍शन का खतरा भी बहुत ज्‍यादा रहता है।
- सेक्‍सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ यानी यौन संक्रमित बीमारियां लगने की आशंका भी ज्‍यादा रहती है।
- बिना कंडोम के संभोग करने से इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा रहता है।
- मासिक धर्म के पहले दो दिन संभोग से महिलाओं को तीव्र दर्द होता है।

सावधानियां
- मासिक धर्म के दौरान संभोग करते वक्‍त कंडोम का प्रयोग कतई मत भूलें।
- महिलाएं संभोग से पहले अपने यौन अंगों को अच्‍छी तरह धुल जें।
- यदि आपके पार्टनर ने कंडोम का प्रयोग नहीं किया है, तो संभोग के तुरंत बाद उनसे अपना लिंग धुलने के लिये कहें। अन्‍यथा इंफेक्‍शन का खतरा रहता है।
- संभोग से पहले अपना सेनीटरी नैपकिन बदलें।
- यदि आपकी पार्टनर पीरियड से है और पहला या दूसरा दिन है, तो आप धीरे-धीरे संभोग करें।
- महिलाएं रति नि‍ष्‍पत्ति यानी संभोग की चरम सीमा तक जाने अथवा ऑर्गैज्म से बचें।
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लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कितना सही ?


1. लिंग बाहर निकल कर वीर्य स्खलन गर्भ से बचने का अचूक तरीका है
ये तरीका साधारण है, स्खलन से ठीक पहले लिंग बाहर खींच लिया जाये ताकि योनि के अंदर वीर्य न पहुंचेI ये तरीका कारगर तो हो सकता है लेकिन सौ फीसदी कामयाब नहींI
जब इससे तरीके का प्रयोग सही तरीके से किया जाये तब भी 100 में से 4 महिलाओं को गर्भ ठहर ही जाता हैI और जिन लोगों ने इस काम में दक्षता हासिल नहीं की है, उन् लोगों में गर्भ ठहरने का हर साल का प्रतिशत 27 तक पाया गयाI यदि पुरुष सही समय पर लिंग बाहर खींच भी ले तो भी गर्भ ठहरने की पूरी सम्भावना को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि सेक्स के दौरान संभव है की थोड़ी मात्रा में वीर्य का रिसाव हो रहा हो और आप अनभिज्ञ होंI यही छोटी मात्रा का रिसाव गर्भ की वजह बन सकता हैI

2 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना आसान क्रिया है
यह सुनने में आसान भले ही लगता हो, लेकिन असल में उतना आसान नहीं है, खासकर उनके लिए जो हाल ही मैं ये तरीका अपनाने लगे हैंI इसके लिए दोनों साथियों में सही तालमेल की ज़रूरत होती हैI अनचाहे गर्भ के खतरे से सुरक्षा के लिए ज़रूरी है की आप कोई और विश्वसनीय तरीका अपनाएंI

3 : सही समय पर लिंग खींच लेने के लिए पुरुषों पर भरोसा किया जा सकता है
वो जोड़े जिनमे आत्म-नियंत्रण, अनुभव और विश्वास हो, इस तरीके का उपयोग सही तरीके से कर सकते हैंI अगर तीनो में से एक भी चीज़ की कमी हो तो बेहतर है की कोई और तरीका अपनाया जायेI जो पुरुष इस तरीके का प्रयोग करते हैं, उन्हें इस बात का सही अंदाज़ा होना चाहिए की कब उनका स्खलन होने वाला है, क्यूंकि गलती की गुंजाइश बहुत काम हैI इसलिए यह तरीका अनुभवहीन या शीघ्रपतन से जूझ रहे पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं हैI क्यूंकि अगर सही समय पर लिंग बाहर न निकला जाये तो गर्भ ठहर सकता हैI

4 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कारगर नहीं है
इस तरीके को अक्सर असरदार तरीका नहीं मन जाता जबकि सच ये है की 60 प्रतिशत जोड़ों ने इसका प्रयोग कभी न कभी ज़रूर किया हैI
हालाँकि गटमाकर संस्थान, न्यू यॉर्क द्वारा की गयी रिसर्च से पता चलता है की अगर लिंग को सही समय बाहर निकल लिया जाये तो अनचाहे गर्भ से 96 फ़ीसदी तक बचा जा सकता हैI कंडोम की मदद से इस बचाव की संख्या है 98 फीसदीI ज़्यादा फर्क नहीं, है ना?
सही तरीके से अंजाम दिया जाये तो ये अवश्य एक कारगर तरीका हो सकता हैI बात ये है की हर बार इसे सही अंजाम देना शायद आसान नहीं हैI लेकिन फिर भी, कोई तरीका इस्तेमाल ना करने से बेहतर ये तरीका ही हैI

5 : इसका प्रयोग सिर्फ गैर ज़िम्मेदार लोग करते हैं
हाल ही के एक अमरीकी अध्यन से पता चलता है की 5 फीसदी लोग गर्भ से बचाव के लिए केवल इसी तरीके का प्रयोग करते हैं, 15-44 साल की 60 फीसदी महिलाओं ने इस तरीके का इस्तेमाल कभी ना कभी किया हैI कहानी का सार ये है कि हर उम्र के लोग गर्भ से बचने के लिए इसका प्रयोग करते हैंI

6 : रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु नहीं होते
हर पुरुष को जाने अनजाने में थोड़ा वीर्य का रिसाव हो सकता हैI कई रिसर्च इस बात कि पुष्टि करती हैं कि रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु मौजूद नहीं होते, लेकिन ये रिसाव पहले के बचे हुए वीर्य के साथ बाहर आकर गर्भ का कारण बनने में सक्षम अवश्य हैI इसलिए बेहतर है कि सेक्स से पहले पेशाब किया जाये और लिंग को अच्छी तरह धोकर साफ़ किया जायेI

7 : इस तरीके के इस्तेमाल से सेक्स संक्रमण का खतरा नहीं है
नहीं! इस तरीके से सेक्स संक्रमण का खतरा पूरी तरह से हैI कंडोम ही सेक्स संक्रमण से बचने का सही तरीका हैI

8 : किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं
किताबी तौर पर तो किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं हैI लेकिन फिर भी, सेक्स से पहले यह बेहतर होगा कि पेशाब के ज़रिये बचा खुचा शुक्राणु वाला वीर्य फ्लश कर दिया जायेI लिंग को साफ़ कर लिया जायेI यदि स्खलन महिला के शरीर के ऊपर किया गया है तो उसे भी अच्छी तरह से साफ़ कर लेना ज़रूरी है.
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कंडोम हमेशा जरूरी, उसे ना मत कहें


पुरुषों के पास कंडोम का इस्‍तेमाल न करने के सौ बहाने होते हैं। अधिकांश पुरुष यह सोचते हैं कि कंडोम के इस्‍तेमाल से सेक्‍स का मज़ा फीका पड़ जाता है। लेकिन यदि आप गर्भधारण नहीं चाहती हैं और आपका ब्‍वॉयफ्रेंड कंडोम के इस्‍तेमाल से इनकार करता है, तो आप क्‍या करेंगी।
क्‍या उसकी बातों में आ जाएंगी? नहीं कतई नहीं। जब आपका ब्‍वॉयफ्रेंड कंडोम से इनकार करे, तो आपके पास उसकी सारी बातों के जवाब होने चाहिए।
सबसे पहले वो कहेगा कि कंडोम से सेक्‍स का मूड नहीं बनता, तब आप कहिए, "बिना कंडोम के मेरा मूड नहीं बनेगा, क्‍योंकि उसके बिना मैं असुरक्षित महसूस करूंगी"। जब ब्‍वॉयफ्रेंड कहे कि मुझे उससे मज़ा नहीं आता, तो आप कहिए, "मुझे तब तक अच्‍छा नहीं लगेगा, जब तक यह सुनिश्चित नहीं कर लूंगी कि हम दोनों सुरक्षित हैं।"
यदि वो यह कहे कि इससे वो असहज महसूस करता है, तो आपका जवाब होगा, "अपने साइज़ का कंडोम लेकर आओ।" यदि वो कहे कि मैंने कभी कंडोम के साथ सेक्‍स नहीं किया, तो आप कहें, "तो फिर तुम्‍हें एचआईवी एड्स जैसी यौन संक्रमित बीमारियों का खतरा ज्‍यादा है।" यदि वो यह कहे कि तुम गर्भनिरोधक गोली खा लेना, तो आपका जवाब होना चाहिए, "गर्भनिरोधक गोलियां यौन संक्रमित बीमारियों को नहीं रोकतीं।" वो कहे कि मुझ पर विश्‍वास करो कुछ नहीं होगा, तो आप का जवाब होगा, "मैं कैसे विश्‍वास करुं, क्‍या होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं।"
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गर्भ कैसे ठहरता है? गर्भाधान या फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया क्या है?


गर्भ की प्रक्रिया समझने के लिये स्त्री के प्रजनन अंगों को समझना जरुरी है। स्त्री के प्रजनन अंगों को चार भागों में बांटा गया है- ओवरी, डिम्बवाहिनी नली, गर्भाशय और योनि। ओवरी बादाम की तरह और लगभग उसी के आकार की दो ग्रथियां होती हैं। स्त्रियों में मौजूद इन्हीं ओवरियों में मनुष्य को जन्म देने वाले लगभग चार लाख जीवित अण्डे किशोरावस्था के आने तक सुप्त अवस्था में पड़े रहते हैं। प्रथम मासिक-धर्म के शुरू होते ही इस बात की सूचना मिल जाती है कि लड़की अब किशोरी हो गई है। इसके साथ ही उसके संपूर्ण संतानोत्पादक अंग सचेत होकर अपने-अपने कार्य में जुड़ जाते हैं। किशोरावस्था के आरंभ होते ही ओवरी में सोए हुए अंडे सचेत होकर बाहर निकलने का प्रयास करने लगते हैं। साधारणः लगभग 28 दिनों के अंतराल से दोनों ओवरियों में से किसी एक ओवरी में एक साथ कई अंडे पकने शुरू हो जाते हैं, लेकिन अंतिम रूप से केवल एक ही अंडा पककर बाहर निकलने योग्य हो पाता है, बाकी सब सूखकर बेकार हो जाते हैं
मासिक धर्म के बाद लगभग 10 दिनों तक यह अंडा ओवरी के अंदर अपनी छोटी सी पुटिका में बंद होकर पुटिका सहित बढ़ता रहता है। अंत में यह ओवरी के ऊपरी सतह पर उभरकर एक छोटा सा छाला बनकर दिखता है। पक जाने पर यह पुटिका फट जाती है और पका हुआ अंडा ओवरी से अलग हो जाता है। स्त्री की संपूर्ण आयु में लगभग 30 वर्षों तक प्रति माह एक अंडा (डिम्ब) ओवरी से बाहर निकलता है। इस प्रकार ओवरी के अंदर कुल चार लाख अंडों में से केवल 400 या 445 अंडे ओवरी से बाहर निकलते हैं। बाकी अंडे पूरी तरह न पक सकने के कारण नष्ट हो जाते हैं या उनके पकने की कभी बारी ही नहीं आती।
यह निश्चित करना असंभव है कि किस ओवरी से अंडा पककर बाहर निकलेगा। एक माह में दोनों ओवरियों से साथ-साथ अलग-अलग अंडे पककर निकल सकते हैं। प्रत्येक ओवरी के निकट ऊपर की ओर मांस की एक पतली सी नली होती है- लगभग साढ़े पांच इंच लंबी। इसे डिम्बवाहिनी नली या फेलोपिन ट्यूब कहते हैं। इन नलियों का एक-एक सिरा ओवरी के समीप होता है। इसके साथ ही इन सिरों में से अनेक रेशे जैसे लटकते रहते हैं। इन नलियों के दूसरे सिरे कुछ पतले होकर गर्भाशय के ऊपर की ओर आकर दाएं-बाए मिल जाते हैं। ओवरी से ज्यों ही पका हुआ अंडा बाहर निकलता है, डिम्बवाहिनी के सिरे पर झूमते हुए रेशे उस अंडे को हाथी की सूंड की तरह पकड़कर नली के मुख छिद्र में डालकर अंदर धकेल देता है
अब यह डिम्ब लहराती हुई नली से रोमाभ (रोम की तरह बाल के रेशे) की पकड़ में आ जाता है। यह रोमाभ इस नए मेहमान को आदर सहित धीरे-धीरे धकेलकर नली के दूसरी ओर गर्भाशय में प्रवेश कराने के लिए आगे बढ़ाते रहते हैं। डिम्बवाहिनी नली की यात्रा पूर्ण करने में प्रायः 3 से 6 दिन तक का समय लग सकता है। ओवरी के अंदर रहकर ज्यों-ज्यों अंडे का विकास होता रहता है, स्त्री की कामवासना दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है। जिस दिन डिम्ब, ओवरी को फोड़कर बाहर निकलता है, उस दिन विशेष रूप से कुछ अधिक बेचैनी अनुभव होती है जो प्रायः 2-3 दिन में ठंडी पड़ जाती है
इसका कारण यह है कि पके हुए अंडे यानी डिम्ब में पूर्णता प्राप्त करने के लिए पुरुष के वीर्य में उपस्थित स्पर्म से मिलने की इच्छा होती है जो स्त्री की कामुक भावना से स्पष्ट होती है। मासिक-धर्म के प्रायः 10 दिन बाद डिम्ब ओवरी से बाहर निकलता है जिसे ओवूलेशन क्रिया कहते हैं। इस दिन यदि वह स्त्री किसी पुरुष से समागम करती है तो पुरुष के वीर्य में उपस्थित करोड़ों स्पर्म किसी न किसी तरह गर्भाशय के मुख छिद्र में प्रवेश कर ऊपर डिम्बवाहिनी नलियों में पहुंच कर वहां पहले से उपस्थित पके हुए डिम्ब से मिल जाने का प्रयत्न करते हैं। इन शुक्राणुओं का शरीर बहुत सूक्ष्म धागे की तरह होता है। इसके 2 भाग होते हैं- एक सिर तथा दूसरा पूंछ।
यह शुक्राणु इतने छोटे और चंचल होते हैं कि इनके लिए 5 या 6 इंच की यह छोटी सी यात्रा कठिन प्रतीत होती है। इस कठिन परिस्थिति में एक शुक्र के शायद जीवित बचने की आशा करना व्यर्थ है। इस बात को ध्यान में रखकर प्रकृति भी इस कठिनतम परीक्षा के लिए एक साथ करोड़ों शुक्राणुओं को निमंत्रण देती है। जीवन-मरण की इस दौड़ में शायद एक या दो शुक्राणु सफल हो पाते हैं क्योंकि योनि से लेकर डिम्बवाहिनी नली तक के मार्ग में अनेक बाधाएं इन नन्हे यात्रियों के प्राण ले लेती हैं।
सबसे पहले समागम के समय ही योनि के अंदर चारों तरफ की दीवारों में छिपी ग्रंथियों से एक तरल व चिकना पानी जैसा द्रव निकला करता है। इस द्रव में तेजाब के गुण होते हैं। वीर्य के साथ जो शुक्राणु योनि में आ जाते हैं, उन्हें यहां आते ही सबसे पहले तेजाब सागर में गोते लगाने पड़ते हैं जिससे अधिकांश शुक्राणु तो यहीं मौत के घात उतर जाते हैं जो थोड़े बहुत किसी तरह जीवित बच जाते हैं, वे शीघ्रता से गर्भाशय के मुख छिद्र द्वारा अंदर प्रवेश कर जाते हैं। इन शुक्राणुओं को डिम्बवाहिनी नली तक पहुचने के लिए चारों ओर चिपचिपी दीवार, पहाड़-पहाड़ियों की तरह उभरी हुई मांस की गद्दियों और चिपचिपे तरल पदार्थों की झीलों को पार करना पड़ता है।
इस शुक्राणुओं को अंडे तक पहुंचने में डेढ़-दो दिन का समय लग जाता है। यदि ओवूलेशन क्रिया के बाद के 1-2 दिन में ही स्त्री किसी पुरुष से मिलाप नहीं कर पाती तो गर्भाधान का प्रश्न नहीं उठता, क्योंकि बाद में डिम्ब में अपनी नली से निकलकर गर्भाशय में पहुंचकर शुक्राणुओं से मिलने की शक्ति नहीं रहती। जैसे ही कोई शुक्राणु नली के इस छोर पर इंतजार करते हुए अंडे के पास पहुंचता है, वैसे ही वे दोनों अपनी परस्पर आकर्षक शक्ति के कारण इतनी व्याकुलता और व्यग्रता से आलिंगन करते हैं कि देखते ही नन्हा-सा शुक्राणु अपने तीर जैसे नुकीले सिरे को डिम्ब की खाल में गड़ाकर किसी तरह घूम-घूमकर दीवार में छेद करता हुआ अंदर घुस जाता है। अंडा शुक्राणु को अपने में आत्मसात कर लेता है। बस इस क्रिया को गर्भाधान या अंग्रेजी में फर्टिलाइजेशन कहते हैं। अब इस गर्भित अंडे में अनेक नए परिवर्तन होने लगते हैं और तब यह अंडा शीघ्रता से एक जगह जमकर बैठने के लिए उपयुक्त स्थान की खोज करता हुआ डिम्बवाहिनी नली से बाहर निकलकर गर्भाशय में प्रवेश करता है।
गर्भाशय के चारों ओर मुलायम मांस की रस भरी गद्दियां बनकर बिछ जाती हैं ताकि गर्भिक अंडे को कहीं भी जमकर अंकुरित होने की सुविधा मिल सके। इसके अतिरिक्त ओवरियों को भी गर्भाधान की सूचना तुरंत मिल जाती है। जिससे इन ओवरियों में अगले 9 महीने अंडे का पककर निकलना बंद हो जाता है और न ही कोई शुक्राणु अंदर आ पाता है। मासिक-धर्म का क्रम भी रुक जाता है। स्त्री गर्भवती हो जाती है
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शादी के बाद ये बाते कभी भी भूल के न करे अपने पति या प्रेमी से शेयर



आज आपसी रिश्तों का टूटना आम हो गया हैं. इसलिए एक रिश्ता टूटने के बाद अगर किसी और से रिश्ता बनता है या कोई और व्यक्ति आपके जीवन में आता हैं तो अपने दूसरे पार्टनर को पहले वाले रिलेशनशिप के बारे में सोच समझकर बताएं.
क्योंकि अगर आपने पहले वाले पार्टनर कि तारीफ कर दी तो इससे आपकी छवि पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है या आपकी छवि खराब हो सकती हैं.
अपने पहले के समय के बारे में सबकुछ बताने से बचें. आपको अपने पूर्व प्रेमी के बारे में खुलकर बात करने की जरुरत नहीं है.
रिश्तों की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि निम्न तीन बातों के बारे में अपने वर्तमान प्रेमी से कभी कोई बात शेयर ना करें.

कितने लोगों के साथ डेट किया है
जब आप अपने प्रेमी के साथ घूमने गए है तो इस बात का जिक्र बिल्कुल न करें कि आप इससे पहले कितने लोगों के साथ घूमने जा चुकी हैं. क्योंकि अगर आपने उसे अपने भूतकाल के बारे में बताया तो आपका ब्वॉयफ्रेंड यह सोचेगा कि आप अपने रिश्तों के प्रति गंभीर नहीं है और मिलने के बहाने टाइम पास करती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि इस विषय पर किसी तरह कि चर्चा न करे. अपने नए प्रेमी के साथ नई जगहों पर घूमने जाएं.

शारीरिक संबंधों की बात करने से बचें
अपने ब्वॉयफ्रेंड से कभी भी उसके भूतपूर्व प्रेमी के साथ बिताए गए अंतरंग पलों की चर्चा कभी न करें. अपनी पूर्व की खूबियों का बखान करने से बचें. ऐसा इसलिए जरुरी हैं क्योंकि ऐसा सुन कर आपका प्रेमी भड़क सकता है और इससे उसका विश्वास भी टूट सकता है. अपने प्यार को परखने के बाद ही कुछ कदम बढाएं.

दोस्तों से ज्यादा हैंडसम हो तुम
अगर आप अपने प्रेमी की तारीफ करती हैं तो उनका मोरल बूस्टअप होता है. इसलिए अपने प्रेमी की तारीफ करना कभी न भूले और न ही उसके तारीफ करने में कोई कसर न छोड़े. अपने प्रेमी की तुलना उसके दोस्तों से करें और उसकी तारीफ करते हुए कहें कि अपने दोस्तों में वहीं सबसे हॉट और सेक्सी है इसलिए आपने उससे दोस्ती की है. इगो मसाज से बिगड़ते रिश्ते वापस बन जाते है. कभी भी आपने एक्स ब्वॉयफ्रेंड की तारीफ न करें. इसके अलावा उसके पहनावे और कपड़ों की भी तारीफ न करें. हो सके तो अपने पूर्व प्रेमी के दोस्तों से भी कोई रिश्ता न रखे.

ये बातें पति से छुपाएं ...
रिश्ता चाहे कोई भी हो, इसकी डोर बेहद नाजुक होती है और इसे न सिर्फ टूटने से बल्कि इसमें गांठ पडने से भी बचाना जरूरी होता है। और बात जब पति-पत्नी जैसे अहम्र रिश्ते की हो, तो यह डोर और भी नाजुक हो जाती है। एक बार प़डी गांठ कभी नहीं खुलती, हमेशा की तकलीफ का सबब बन जाती है। इस तकलीफ से बचने का एक तरीका ये है कि कुछ राज की बातें हमेशा अपने सीने में ही दफन रखें, उन्हें अपने पति से कभी शेयर न करें।

सहेली के राज
आप अपनी पक्की दोस्त यानी सहेली की जिंदगी की रहस्य की बातें कभी अपने पति को न बताएं। इससे आप सहेली का सम्मान और दोस्ती की विश्वसनीयता बनाए रखती हैं। वैसे भी आपकी सहेली के निजी मसलों से आपके पति का कोई लेना-देना नहीं होता है। बेवजह सब कुछ बता देने की ईमानदारी के चक्कर में न प़डें। आपके पति भी अपने करीबी दोस्तों के राज आपसे छुपा कर रखते हैं। दूसरी तरफ, अपनी सबसे अच्छी सहेली के राज पति से शेयर करने से नुकसान आपको ही होता है। आपका साथी सोच सकता है कि आपमें एक भरोसेमंद दोस्त के गुण नहीं है।

मंगेतर को बताऊं या नही
ऎसे मामलों में आप अपने दोस्त का भरोसा कभी न तोडें। सहेली ने आप पर विश्वास करके अपने राज आपसे शेयर किए हैं। दूसरी बात, आपके मंगेतर या पति अपने दोस्तों को ये बात बता सकते हैं और बात फैल सकती है। तीसरी बात, आपके पति/मंगेतर के मन में आपकी सबसे अच्छी सहेली के प्रति गलत भावना बैठ सकती है और वे संभवत:आपकी सबसे अच्छी दोस्त को सम्मान की नजर से देखना बंद कर दें, जो आपके लिए भी बेहद तकलीफदेह होगा और अंतत: इसका असर आप दोनों के आपसी संबंधों पर पडने लगेगा।

प्रभावित होते आपसी रिश्ते
अगर आपको लगता है कि अपने पति/मंगेतर की नजर में आप तो अच्छी-भली हैं, इसलिए आपके दोस्तों की जिंदगी के रहस्यों से आप दोनों पर भला क्या असर पडेगाक् तो आप गलत हैं। कई बार, कुछ महिलाएं या ल़डकियां अपने पति/मंगेतर की नजर में अपनी किसी खास सहेली का आकर्षण कम करने के लिए भी इस रास्ते का सहारा लेने की कोशिश करती हैं, यह पूरी तरह गलत है। ऎसा कभी न करें। इससे आपके पति/मंगेतर की नजर में खुद आपका सम्मान घट सकता है जिसका असर आप दोनों के आपसी रिश्ते पर पडेगा।

राज ही रहें परिवार के राज
इस तकलीफ से बचने और अपने रिश्ते को ऎसी खरोंच लगने से बचाने का तरीका यही है कि आप इस बात को समझें कि हर परिवार के कुछ अपने रहस्य होते हैं जिन्हें राज ही रहने दिया जाता है। आप दो परिवारों के बीच की एक कडी हैं और आपको दोनों परिवारों की राज की बातों को अलग-अलग ही रखना है। याद रखें, आप दोनों भी एक परिवार की शुरूआत करने जा रहे हैं और आगे चलकर इस तीसरे परिवार के भी कुछ अपने रहस्य होंगे। इसलिए बेहर यही होगा कि आप इसी तीसरे परिवार की फिक्र करें। यानी अपने पति/मंगेतर के साथ रिश्ते की मधुरता को बनाए रखें। हर परिवार के कुछ अपने राज होते हैं। मान लीजिए, आपके किन्हीं दो रिश्तेदारों के बीच बोलचाल बंद है तो आपको पति से सिर्फ इतना ही कहना चाहिए कि दोनों आपस में बात नहीं करते। वजह न बताएं, ताकि किसी पारिवारिक कार्यक्रम में उनसे मुलाकात होने की स्थिति में आपके पति उनके साथ सहजता से पेश आ सकें। इससे अपने पति को खुद ही राय बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही आपके पारिवारिक सदस्यों से पहली मुलाकात में आपके पति को किसी असहजता का सामना नहीं करना पडेगा।

पैसे का राज
अनुसंधान बताते हैं कि पति-पत्नी के बीच होने वाले झग़डों में 60 प्रतिशत से ज्यादा झगडे पैसे की वजह से होते हैं। इसलिए उपचार से परहेज भला की तर्ज पर आप पहले से ही अपने पैसों का हिसाब-किताब अलग रखें।

अलगाव की स्थिति
अपने पीआईएन नंबर या पासवर्ड एक-दूसरे को बताने में कोई तकलीफ नहीं है। आपको अपने साथी पर पूरी तरह विश्वास है, फिर भी कुछ कॉन्फिडेंशियल चीजें सिर्फ अपने तक ही रहनी चाहिए। यह मामले की कॉन्फीडेन्शियल चीजों की सूची में आता है। कई बार रिश्ता टूटने की नौबत भी आ जाती है। ऎसे में आपकी आर्थिक सुरक्षा में खुद आपका साथी ही सेंध लगा सकता है। दंपतियों में अलगाव होने के कई मामलों में ऎसा देखा गया है।

कारोबारी राज
आप एक कामकाजी महिला हैं तो निश्चित रूप से कुछ कारोबारी राज भी आपके पास होंगे। एक प्रोफेशनल को अपने-अपने काम की गोपनीय बातों को अपने तक ही रखें, पति से शेयर न करें।

अतीत का इश्क
कई बार जिंदगी ऎसे रंग भी दिखाती है कि जिससे आपने प्यार किया, उससे शादी नहीं हुई। ऎसे में अपने मंगेतर या पति से अतीत के राज बताने या छुपाने की जद्दोजहद खडी होती है। इस कशमकश में न पडें। बीता हुआ वक्त वापस नहीं आता और अतीत मुर्दे के समान होता है। बेहतरी इसी में है कि गडे मुर्दे न उखाडे जाएं, वरना अतीत का असर वर्तमान और उससे भी ज्यादा भविष्य को बर्बाद कर सकता है। वर्तमान में जीएं वर्तमान ही सच है-इस तथ्य को सीने से लगा लें। हो सकता है, आप मानती हों कि अपने साथी से कोई भी राज नहीं छुपाना अच्छा होता है,पर इसका नतीजा आपसी गलतफहमी और रिश्ते की पेचीदगी में इजाफा कर सकता है। चाहे अपना साथी आपके कितना भी करीब हो, अतीत के प्रेम-प्रसंग उससे हमेशा छुपा कर ही रखें। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आपने कल क्या किया था, बल्कि यह है कि आप दोनों का आज और आने वाला कल हमेशा सुखद बना रहे। इसलिए अतीत की छाया को अपने और अपने साथी के वर्तमान और भविष्य पर न पडने दें।

पर-पुरूष के प्रति आकर्षण
कई बार ऎसा भी होता है कि आप अपने पति या प्रेमी के किसी दोस्त की तरफ खास आकर्षण महसूस करते हैं। यह बात अपने पति, या मंगेतर से कभी न कहें। आप उनके प्रति चाहे जितना समर्पित हों, उनके किसी दोस्त की खूबसूरती की तारीफ करने का एक ही अर्थ होगा कि आप उस शख्स की तरफ आकर्षित हैं, यह बात आपके पति या मंगेतर को पसंद नहीं आएगी और आप दोनों के बीच तनाव तो बढेगा ही, हो सकता है कि उन दोनों की दोस्ती भी खतरे में पड जाए।

पति के दोस्त की तारीफ न करें
पति या मंगेतर के किसी दोस्त की तारीफ का वे एक ही अर्थ लेते हैं कि कहीं आप उनके दोस्त के प्रति आकर्षित तो नहीं हैक् यह उन्हें असुरक्षित और कमतरी का एहसास कराता है जो आपके वैवाहिक जीवन के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। कुल मिलाकर,आखिर आपके मंगेतर या पति भी यही तो चाहते हैं कि आप दोनों का साथ हमेशा अटूट,सुरक्षित और सुखद बना रहे। इसमें उनका सहयोग कीजिए और ये राज की 6 बातें उनसे कभी शेयर मत कीजिए ताकि एक-दूसरे के साथ आप दोनों पूरी जिंदगी भरपूर प्यार से बिता सकें।

ये बातें जरूर बताएं
जहां चंद मुलाकातों में ही अपने साथी को अपनी तमाम निजी बातें बताना बिल्कुल जरूरी नहीं है, वहीं कुछ बातें ऎसी भी हैं जिन्हें किसी शुभ मुहूर्त का इंतजार किए बगैर आप तुरन्त बता दें (वरना हो सकता है कि आप खुद को दोषी महसूस करने लगें) खासकर तब, जब आप दोनों ने एक साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया हो-

अपनी तात्कालिक और आनुवांशिक बीमारियों के बारे में (क्योंकि आगे चलकर आप दोनों को बच्चो भी पैदा करने हैं) क गायनेकोलॉजिकल समस्याएं, जैसे-एसटीडी, पॉलिसिस्टिक ओवेेरियन सिन्ड्रोम आदि।
जो दवाएं आप नियमित रूप से लेती हैं और इमरजेंसी में आपके पार्टनर को क्या करना चाहिए, यह जरूर उन्हें बता दें।
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महिलाओं से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें


 
कामेच्छा में कमी- 
बहुत-सी महिलाओं को सेक्स की चाहत ही नहीं होती। अगर वे पार्टनर के कहने पर तैयार होती हैं तो भी बिल्कुल ऐक्टिव नहीं हो पातीं। बस अपनी ड्यूटी समझकर 'काम' निबटा देती हैं। बच्चे होने के बाद यह समस्या ज्यादा होती है। 

वजह : डिप्रेशन, थकान या तनाव की वजह से यह दिक्कत हो सकती है। कई बार बचपन की किसी बुरी घटना की वजह से भी सेक्स में दिलचस्पी खत्म हो जाती है। इसके अलावा कुछ और वजहें भी सकती हैं, मसलन पार्टनर जिस तरह छूता है, वह पसंद नहीं आना, उसके शरीर की महक नापसंद होना, उसे बहुत ज्यादा पसीना आना, उसके मुंह से पान-तंबाकू वगैरा की बदबू आना आदि। कई महिलाओं को शरीर के कुछ खास हिस्सों पर हाथ लगाने से दर्द महसूस होता है या अच्छा नहीं लगता। इससे भी वे सेक्स से बचने लगती हैं। 

इलाज : पार्टनर को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि साथी महिला को क्या पसंद है और क्या नापसंद। उसी के मुताबिक आगे बढ़ना चाहिए। फोरप्ले में ज्यादा वक्त बिताना चाहिए। इससे महिला मानसिक और शारीरिक रूप से अच्छी तरह तैयार हो जाती है। जब एक्साइटमेंट ज्यादा हो, तभी आगे बढ़ना चाहिए। अगर डिप्रेशन की वजह से दिक्कत है तो पहले उसका इलाज कराएं। डिप्रेशन से मुक्त होने पर ही कामेच्छा जागेगी। 'सेंसेट फोकस एक्सरसाइज' या 'प्लेजरिंग सेशन' से काफी फायदा हो सकता है। इस सेशन में स्पर्श पर सारा फोकस होता है और सहवास की मनाही होती है। इसका तरीका यह है कि बारी-बारी से स्त्री व पुरुष एक-दूसरे को प्यार से सहलाएं और एक-दूसरे के शरीर पर उत्तेजना केंद्र खोजें। दोनों एक-दूसरे को बताएं कि उन्हें कहां अच्छा लगता है। इससे महिलाओं की झिझक भी कम होती है। साथ ही परफॉर्मेंस का प्रेशर नहीं होता। वे कपल जिन्हें कोई दिक्कत नहीं है, वे भी तीन-चार महीनों में अगर एक हफ्ते इस सेशन को करें और सहवास से परहेज रखें तो सेक्स लाइफ को ज्यादा इंजॉय कर सकते हैं। 

लुब्रिकेशन की कमी- 
स्त्री जनन अंग में लुब्रिकेशन (गीलापन) को उत्तेजना का पैमाना माना जाता है। कुछ महिलाओं को इसमें कमी की शिकायत हो सकती है। ऐसे में सहवास काफी तकलीफदेह हो जाता है। 

वजह :  लुब्रिकेशन में कमी तीन वजहों से हो सकती है। इन्फेक्शन, हार्मोंस में गड़बड़ी या फिर तरीके से फोरप्ले न होना। अगर जनन अंग में खुजली हो, खून आता हो, कपड़े पर धब्बे पड़ जाते हों या बहुत बदबू आती हो तो इन्फेक्शन हो सकता है। हार्मोंस में गड़बड़ी यानी एस्ट्रोजन की कमी आमतौर पर मीनोपॉज के बाद ज्यादा होती है। पार्टनर का महिला की जरूरत न समझ पाना या फोरप्ले में ज्यादा वक्त न गुजारना भी इसकी वजह हो सकती है। 

इलाज : अगर इन्फेक्शन है या हॉर्मोंस में गड़बड़ी है तो फौरन अच्छे डॉक्टर को दिखाकर इलाज कराएं। हॉर्मोंस वाली दिक्कत अक्सर मरीज को खुद पता नहीं लगती। डॉक्टर जांच के बाद इसका पता लगा पाते हैं। तीसरी वजह है तो पार्टनर से बातचीत और समझ से प्रॉब्लम दूर की जा सकती है। पार्टनर को फोरप्ले में ज्यादा वक्त देना चाहिए क्योंकि यह बहुत अहम होता है। इसी से सेक्स को सही ढंग से इंजॉय किया जा सकता है। 

सहवास में दर्द और वैजिनिस्मस- 
कुछ महिलाओं को सहवास के दौरान दर्द होता है। कई बार यह दर्द बहुत ज्यादा होता है और ऐसे में महिला सेक्स से बचने लगती है। साथी को इस दर्द का अहसास नहीं होता। उसे लगता है कि साथी महिला उसे सहयोग नहीं दे रही। यह दोनों के बीच झगड़े की वजह बनता है। इस प्रॉब्लम को डिस्परयूनिया (पेनफुल इंटरकोर्स) कहा जाता है। अगर पूरे इलाज या सलाह के बिना संबंध बनाने की कोशिश की जाती है तो प्रॉब्लम और बढ़ जाती है। 
वजह : संबंध बनाते वक्त दर्द की वजह लुब्रिकेशन में कमी या सही ढंग से फोरप्ले न होना हो सकता है। कई बार इन्फेक्शन या एंडोमेट्रियोसिस यानी ओवरी में ब्लड जमा होने पर यह प्रॉब्लम हो सकती है। एंडोमेट्रियोसिस के लिए हॉर्मोन थेरपी या फिर जरूरत पड़ने पर लेप्रोस्कोपी भी की जाती है। 

वैजिनिस्मस : 
वैजिनिस्मस का मतलब है किसी बाहरी चीज के स्त्री जनन अंग में जाने का डर। इसमें संभोग की कोशिश या संभावना का आभास मिलते ही महिला जनन अंग के बाहरी एक-तिहाई हिस्से में अनैच्छिक संकुचन आ जाता है। इससे समागम नहीं हो पाता और साथी अगर जबरन कोशिश करता है तो दिक्कत और दर्द दोनों बढ़ जाते हैं। 
वजह : इसके मानसिक कारण होते हैं - जैसे कि कई बार महिला के मन में सहवास को लेकर डर बैठ जाता है कि इस दौरान काफी दर्द होता है। इसके अलावा, किसी तरह की जोर-जबरदस्ती, सेक्स को पाप या गलत समझने और अपने जननांगों को गंदे या बदबूदार मानने की भावना से भी यह परेशानी हो सकती है। 
इलाज : इस परेशानी की कोई दवा या सर्जरी नहीं होती। यह मानसिक बीमारी है और इसे काउंसलिंग से बहुत हद तक सुधारा जा सकता है। पीड़ित महिला के मन से सेक्स संबंधी डर दूर किया जाता है। उसे समझाया जाता है कि जनन अंग इलास्टिक की तरह होता है, जो जरूरत के मुताबिक बढ़ जाता है। इससे उसके दिमाग से काफी हद तक फिक्र निकल जाती है और वह मानसिक तौर पर राहत महसूस करने लगती है। इसके बाद एक खास थेरपी के जरिए जनन अंग को धीरे-धीरे बाहरी चीज के टच के प्रति सहज किया जाता है। फिर डाइलेटर की मदद से ज्यादा जगह बनाई जाती है। इसके लिए कीजल एक्सरसाइज भी की जा सकती है। इसका तरीका यह है कि महिला पेशाब को रोके और छोड़ दे। फिर रोके, फिर छोड़ दे। इस तरह जनन अंग पर उसका कंट्रोल बढ़ जाता है। 

सलाह : डॉक्टर कहते हैं कि संबंध कायम करने के दौरान प्रवेश का काम औरत को ही करना चाहिए क्योंकि उसे ही मालूम है कि वह कब तैयार है। ऐसे में उसे संबंध के दौरान दर्द नहीं झेलना पड़ेगा। 

क्लाइमैक्स न होना या देर से होना- 
महिलाओं में यह शिकायत आम है कि उनका पार्टनर उन्हें संतुष्ट किए बिना ही छोड़ देता है। कुछ को ऑर्गेज्म (क्लाइमैक्स) नहीं होता और कुछ को होता है, पर महसूस नहीं होता। कुछ महिलाओं को लुब्रिकेशन के दौरान ही जल्दी क्लाइमैक्स हो जाता है। कुछ को बहुत देर से क्लाइमैक्स होता है। असल में क्लाइमैक्स के दौरान महिला को अपने जनन अंग में लयात्मक संकुचन महसूस होता है और फिर मन एकदम शांत हो जाता है। लेकिन लयात्मक संकुचन 10 में से 8 महिलाओं को ही होता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि बाकी दो को क्लाइमैक्स नहीं होता। उन्हें भी क्लाइमैक्स होता है, बस अहसास नहीं होता। वैसे, कुछ महिलाओं में पुरुषों की प्रीमैच्योर इजाकुलेशन की तरह शीघ्र क्लाइमैक्स होता है।
वजह : इस समस्या की वजह महिला खुद और साथी दोनों हो सकते हैं। आमतौर पर महिलाओं को लगता है कि अपने पार्टनर को संतुष्ट करना ही उसकी जिम्मेदारी है। इस सोच की वजह से वह अपनी इच्छा बता नहीं पाती। दूसरी ओर, पुरुष भी कई बार खुद संतुष्ट होने के बाद महिला साथी के बारे में सोचता ही नहीं है। 
इलाज : महिला अपनी झिझक खत्म करे और साथी को बताए कि वह संतुष्ट हुई या नहीं। ऐसे मुकाम पर पहुंचना जरूरी है, जहां पूरी तरह संतुष्टि महसूस हो। पुरुष को अपनी पार्टनर की इच्छा समझनी चाहिए। वैसे भी कहा जाता है कि उत्तम पुरुष वह है, जो महिला के कहे बिना ही उसकी बात समझ कर उसे संतुष्ट करे। मध्यम पुरुष वह है, जो कहने पर उसे संतुष्ट करे और अधम पुरुष वह है, जो कहने के बावजूद उसे असंतुष्ट छोड़ दे। 

मीनोपॉज- 
पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पिटल के गाइनिकॉलजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. शारदा जैन के मुताबिक आमतौर पर मीनोपॉज हो जाने पर कुछ महिलाओं में सेक्स की इच्छा काफी घट जाती है। लुब्रिकेशन भी कम हो जाता है। इससे संबंध बनाते हुए तकलीफ होती है। जाहिर है, महिला इससे बचने की कोशिश करने लगती है। 
वजह : हॉर्मोंस में बदलाव की वजह से ऐसा होता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में सेक्स हॉर्मोन का लेवल काफी कम हो जाता है। 
इलाज : फोर-प्ले में ज्यादा वक्त बिताएं। इससे नेचरल लुब्रिकेशन होता है। जरूरत पड़े तो बाहरी लुब्रिकेशन का इस्तेमाल करें। नारियल तेल अच्छा ऑप्शन हो सकता है। जरूरत पड़ने एस्ट्रोजन क्रीम का इस्तेमाल कर सकती हैं। मीनोपॉज हो जाने पर ऐसी डाइट लें, जिसमें एस्ट्रोजन ज्यादा हो जैसे सोयाबीन, हरी सब्जियां, उड़द, राजमा आदि। डॉक्टर की सलाह पर सिंथेटिक एस्ट्रोजन की गोलियां भी ले सकती हैं। 

पीरियड्स के दौरान सेक्स- 
अगर दोनों को इच्छा हो तो पीरियड्स के दौरान भी सेक्स कर सकते हैं, बल्कि कुछ लोग तो इसे ज्यादा सेफ मानते हैं क्योंकि इस दौरान प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते। साथ ही, पहले से ही गीलापन होने से आसानी भी होती है। लेकिन कुछ लोग इसे हाइजिनिक नहीं मानते। ऐसे में कॉन्डोम का इस्तेमाल बेहतर है। 

मास्टरबेशन- 
पुरुषों की तरह महिलाएं भी खुद को संतुष्ट करने के लिए मास्टरबेशन करती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक करीब 50 फीसदी महिलाएं ऐसा करती हैं। इसका कोई नुकसान नहीं है, बल्कि एक्सपर्ट्स इसे बेहतर ही मानते हैं क्योंकि एक तो इसमें प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते। दूसरे इसमें कोई दूसरा शख्स अपनी पसंद-नापसंद को महिला पर थोप नहीं पाता। तीसरा एसटीडी (सेक्स ट्रांसमिटेड डिजीज) और एड्स की आशंका नहीं होती। 

वैजाइनल पेन (वुलवुडेनिया पेल्विक पेन)-
कभी-कभी महिलाओं को नाभि के नीचे और प्यूबिक एरिया के आसपास दर्द महसूस होता है। यह दर्द वैसा ही होता है, जैसा पीरियड्स के दौरान होता है। इसकी वजह यह है कि उत्तेजना होने पर प्राइवेट पार्ट के आसपास खून का बहाव होता है। ऐसे में लुब्रिकेशन होता है, पर क्लाइमैक्स नहीं होता। इससे इस एरिया में खून जम जाता है और दर्द होने लगता है। ऐसे में संतुष्ट होना जरूरी है, फिर चाहे महिला खुद संतुष्ट हो या पुरुष उसे संतुष्ट करे। ऐसा न होने पर दर्द होता रह सकता है और महिला चिड़चिड़ी हो सकती है। 

लेक्स पैरिनियम- 
मैक्स हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुराधा कपूर के मुताबिक उम्र बढ़ने और बच्चे होने के बाद कुछ महिलाओं का जनन अंग ढीला पड़ जाता है, जिससे दोनों को पूरी संतुष्टि का अहसास नहीं होता। आमतौर पर यह समस्या 40 साल के आसपास और दो-तीन बच्चे होने पर होती है। इसके लिए कीजल एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर सर्जरी (वैजाइनोप्लास्टी) की जाती है। चार हफ्ते तक कीजल एक्सरसाइज करने से स्त्री जनन अंग में कसाव आने लगता है। 

जी स्पॉट : 
महिला जनन अंग में एक ऐसा क्षेत्र होता है, जहां सेक्स संबंधी संवेदनशीलता ज्यादा होती है। यह स्पॉट दो इंच की गहराई पर होता है। उत्तेजना बढ़ने पर यह स्पॉट थोड़ा फूल जाता है या कठोर हो जाता है। महिला को सबसे ज्यादा संतुष्टि इसी स्पॉट के छुए जाने पर होती है। 
 
-: मिथ और सचाई :-
महिलाओं को सेक्स की इच्छा कम होती है। 
महिलाओं को भी पुरुषों की तरह ही सेक्स की इच्छा होती है। बच्चे होने के बाद भी कमी नहीं होती हालांकि कई बार परफॉर्मेंस में कमी आ जाती है। इसकी शारीरिक और मानसिक दोनों वजहें होती हैं। 
पहली बार सेक्स करते हुए ब्लड निकलना ही चाहिए। 
लोग मानते हैं अगर महिला वर्जिन है तो पहली बार सेक्स के दौरान इसे ब्लीडिंग होनी ही चाहिए। यह सच नहीं है क्योंकि कुछ खेलकूद या साइकल चलाते वक्त भी कुछ महिलाओं की हाइमेन टूट सकती है। ऐसे में पहली बार सहवास के दौरान ब्लड नहीं निकलता। 
महिलाओं को भी पुरुषों की तरह डिस्चार्ज होता है। 
महिलाओं में पुरुषों की तरह डिस्चार्ज नहीं होता। 100 में से बमुश्किल एक महिला को थोड़ा-बहुत डिस्चार्ज होता है। उत्तेजना के दौरान होने वाले लुब्रिकेशन को ही ज्यादातर लोग डिस्चार्ज समझ लेते हैं। हालांकि डिस्चार्ज होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि महिला को असली सुकून क्लाइमैक्स पर पहुंचने से ही मिलता है। 
महिलाओं को क्लाइमैक्स नहीं होता। 
यह पूरी तरह गलत है। महिलाओं को भी क्लाइमैक्स होता है। ऐसे में पुरुष का उसकी जरूरत को समझना और उसके मुताबिक काम करना जरूरी है। 
महिलाओं को ज्यादा वक्त लगता है। 
सभी महिलाएं क्लाइमैक्स पर पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लेतीं। अगर पार्टनर उनकी पसंद का है तो वे जल्दी मुकाम पर पहुंच जाती हैं। हालांकि कुछ को ज्यादा वक्त भी लग सकता है
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