आपको नहीं मालूम होंगे कंडोम के ये 4 साइड इफेक्ट्स



कंडोम के प्रयोग से भी हो सकते हैं साइड इफेक्ट्स।
इसके लगातार इस्तेमाल से हो सकती है एलर्जी भी।
योनि ग्रीवा में हो सकती है सूजन और घाव भी।
योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को पहुंचाता है नुकसान।

कंडोम प्रयोग के लाभ के बारे में अक्सर लोग जानते होते हैं, लेकिन कंडोम के भी कुछ ऐसे साइड इफेक्ट्स भी हैं इसकी लोगों को अमूमन कम ही जानकारी होती है। कंडोम न केवल आपकी सेक्स लाइफ को प्रभावित कर सकते हैं बल्कि आपको यौन संबंधित बीमारियों का भी शिकार बना सकते हैं। आइए जानें, कंडोम के साइड इफेक्ट्स के बारे में-

दर्द एवं एलर्जी :
ऐसा देखा गया है कि लगातार अर्थात सप्ताह में दो से अधिक बार कंडोम का उपयोग करने से योनि की आंतरिक परत और झिली में संवेदनशीलता काम या समाप्त हो जाती है। जिसके कारण स्त्रियों की यौनि से स्खलित होने वाले प्राकृतिक लुब्रिकेंट (चिकनाई युक्त) दृव्यों का स्वत: स्खलन कम हो जाता है या पूरी तरह से बन्द हो भी जाता है। जिसके चलते योनि में खरास या सूखापन आता देखा गया है। जिसके कारण कंडोम का अधिक उपयोग करने वाली औरतों की योनि स्पर्श कातर (छुअन से ही दर्द महसूस होने वाली) हो जाती है। ऐसी स्थिति का सामना कर रही स्त्रियों द्वारा अपने प्रेमी या पति के साथ बिना कंडोम के सेक्स करने पर यौनि में असहनीय दर्द, जलन, एलर्जी और खुजली होना आम बात है।

योनि ग्रीवा में कट या घाव :
कंडोम का अधिक उपयोग करने से योनि ग्रीवा में कटाव और छिलन के साथ-साथ दर्दनाक घाव भी होते देखे गये हैं। जिसके चलते योनि में सूजन आ जाती है। योनि में सूजन की स्थिति में सेक्स करने पर योनि का आन्तरिक हिस्सा फिर से घायल हो जाता है। जिससे योनि में फिर से जख्म हरे हो जाते हैं। कई बार जख्मों से रक्तस्त्राव भी होने लगता है। जिसे स्त्रियां असमय मासिक चक्र का आना मानकर उसकी परवाह नहीं करती हैं और इस कारण से उन्हें जननांगों और गर्भाशय में भयंकर संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। जिससे योनि ग्रीवा या गर्भाशय में कैंसर होने का खतरा भी बना रहता है।

लेटेक्स के बने कंडोम :
लेटेक्स के बने कंडोम आपको गर्भधारण और यौन-संचारित रोगों से बचाते हैं। मगर ये ऐलर्जी का सबसे आम कारण हैं और सेक्स के दौरान स्त्री की प्रतिक्रिया को घटा देते हैं, क्योंकि इसके प्रयोग के कारण योनि में सूखापन और खुजली के रूप में देखा गया है। इसका सबसे खराब दुष्प्रभाव है, स्त्री-पुरुष के जननांगों पर गंभीर दाने या जानलेवा आघात के रूप में दिख सकता है।

योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान :
प्रकृति ने जननांगों को खुद ही अपनी प्रतिरक्षा की जन्मजात शक्ति प्रदान की लेकिन यदि सप्ताह में दो बार से अधिक कंडोम का उपयोग किया जाता है तो कंडोम योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके उपयोग से योनि की अम्लीय वातावरण में उथल-पुथल पैदा हो जाती है।
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संभोग के संबंध में पूछे जाने वाले आम सवाल


1. मैंने हमेशा सुरक्षित सेक्स किया है फिर भी मुझे यौनसंचारित रोग लग गया है! यह कैसे संभव है ?
सुरक्षित संभोग करने का आशय, प्रायः सेक्स के दौरान कंडोम पहनने से और यह सुनिश्चित करने से है कि आपके मुंह में वीर्य या मासिक धर्म का खून न चला जाए। तब आप एड्स फैलाने वाले एचआईवी विषाणु तथा क्लेमाइडिया और गोनोरिया जैसे संक्रमणों से सुरक्षित रहते हैं।
फिर भी यौनसंचारित रोगों के विषाणु और जीवाणु दूसरे तरीकों से भी आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एक-दूसरे का हस्तमैथुन करने से अथवा सेक्स किए बिना केवल जननांगों को छूने से। यहां तक कि जब आप हमेशा कंडोम को प्रयोग करते हैं तो भी यौनसंचारित रोग लगने की कुछ न कुछ संभावना बनी ही रहती है।
2. पहली बार संभोग किस उम्र में ?
कोई भी व्‍यक्ति जीवन में पहली बार संभोग कब करता है ? यह सवाल यदि आपसे पूछें तो शायद आप तेजी से जवाब देंगे- 26 से 28 वर्ष। यह जवाब अगर आप 20 साल पहले देते, तो शायद सही होता, लेकिन आज नहीं है। जी हां पिछले दो दशकों में पहली बार संभोग करने की औसतन उम्र में गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि ये आंकड़े विभिन्‍न देशों और लाइफस्‍टाइल पर निभर करते हैं।
जीवन भर संभोग नहीं करने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्‍या बहुत कम होती है। ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक ब्रिटेन में पहली बार संभोग की उम्र 25 वर्ष से घटकर 16 व 17 साल हो गई है। शोध में पाया गया कि अधिकांश टीनेजर्स 15 साल की उम्र में ही संभोग कर चुके होते हैं। अफसोस की बात यह है कि अधिकांश टीनेजर अज्ञानतावश कंडोम का इस्‍तेमाल नहीं करते।
इंदिरा गांधी मुक्‍त विश्‍वविद्याल यके काउंसिलर व लखनऊ के श्री जयनारायण पीजी कॉलेज के रीडर डा. आलोक चांटिया से हमने इस मुद्दे पर बात की तो उन्‍होंने कहा कि पहली बार संभोग करने की उम्र में गिरावट का सबसे बड़ा कारण टीनेजर्स में यौन जनित बीमारियों व यौन अपराधों के बारे में जानकारी का कम होना है। उन्‍होंने कहा कि भारत में ऐसा कोई अध्‍ययन फिलहाल तो नहीं किया गया है, लेकिन हां अगर अध्‍ययन किया जाए, तो पहली बार संभोग करने की उम्र 17 भले ही ना हो, 23 वर्ष जरूर होगी।
डा. चांटिया ने कहा कि जिस तरह टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट व अन्‍य मीडिया में कंडोम और आई-पिल्‍स का खुलकर प्रचार किया जा रहा है वो गलत है। क्‍योंकि कंडोम और आई-पिल्‍स आदि के बारे में जानने के बाद टीनेजर्स के मन से डर खत्‍म हो जाता है। जबकि पहले ऐसा नहीं था। 20 साल पहले भारत में टीनेजर्स आपस में यौन संबंधों की बात तक करना पसंद नहीं करते थे। डा. चांटिया का कहना है कि हमारा देश एचआईवी-एड्स की रोकथाम के लिए जिस प्रकार कंडोम का प्रचार कर रहा है, उससे आज की युवा पीढ़ी भटकती जा रही है।
3. मैंने किसी लड़की के साथ असुरक्षित संभोग किया था, लेकिन उसके बाद पेशाब कर अपने लिंग को अच्छी तरह धो लिया था। क्या इससे मुझे रोग से बचने में सहायता मिलेगी ?
जी नहीं, पेशाब करने या अपने जननांगों को धो लेने से असुरक्षित संभोग करने के कारण रोग के लगने का जोखिम कम नहीं हो जाता है। यदि लड़की को कोई यौनसंचारित रोग है, तो हो सकता है वह आपको लग गया हो। आप, डॉक्टर के पास या चिकित्सालय जाएं और जांच कराएं। और अगली बार से कंडोम का प्रयोग करें।

4. मेरे बॉयफ्रेंड गर्भनिरोध के लिए ‘लिंग को योनि से बाहर निकाल कर वीर्यपात करने’ की विधि अपनाना चाहते हैं। क्या यह सुरक्षित संभोग है ?
जी नहीं, यह सुरक्षित नहीं है। हालांकि योनि में शुक्राणु तो प्रवेश नहीं करते, किंतु वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ (प्री-कम)  प्रवेश करते हैं। इससे आपको यौनसंचारित रोग होने या संचारित करने अथवा गर्भवती होने का जोखिम बना रहता है।
•यौनसंचारित रोग
वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ ( लड़के के लिंग से निकलने वाले पारदर्शी तरल पदार्थ ) ( प्री-कम )) में एचआईवी ( वह विशाणु virus जिससे एड्स aids होता है ) तथा दूसरे यौनसंचारित रोग, जैसे कि क्लाइमेडिया, गोनोरिया, जेनिटल हर्पीज, जेनिटल वाटर्स, सिफलिस या ट्राइकोमोनियासिस हो सकते हैं। यदि आप गर्भनिरोधक गोली खाती हैं, तो यह आपको गर्भवती होने से तो बचाएगी, किंतु किसी यौनसंचारित रोग के होने से नहीं।
•गर्भधारण
गर्भनिरोध के लिए ‘लिंग को योनि से बाहर निकाल कर वीर्यपात करने’ की विधि, (जिसे कोइटस इन्टरप्टस) भी कहते हैं, गर्भनिरोध का बहुत असरदार तरीका नहीं है। वीर्यपात से पहले निकलने वाले तरल पदार्थ में भी कोई शुक्राणु कोशिका मौज़ूद हो सकती है। इससे भी अधिक ज़रूरी बात यह है कि इसमें लड़के को समय का अनुमान लगाने में गलती हो सकती है, और हो सकता है लिंग को बाहर निकालने में देर हो जाए।

5. क्या पहली बार संभोग करते समय दर्द हेाता है ?
ऐसा होना ज़रूरी नहीं है। यदि लड़की तनावमुक्त और उत्तेजित है तो इसमें दर्द नहीं होता। यदि आप बहुत तनाव में हैं तो योनि सूखी और तनावयुक्त रह सकती है। इससे इस बात की अधिक संभावना होती है कि झिल्ली टूट जाएगी और संभोग कष्टदायक हो जाएगा। पहली बार आप अक्सर घबराए हुए होते हैं, इसलिए ऐसा आसानी से हो सकता है। लेकिन यदि आप दोनों कोई जल्दबाज़ी नहीं करते, तो इसमें दर्द नहीं हेाता है।
क्यों होता है संभोग के दौरान दर्द
भारतीय समाज में लडकी की परवरिश ऎसे माहौल में होती है कि उसके मन में संभोग को लेकर डर बैठा होता है। पहली बार संभोग से कई तरह के मिथ जुडे हुए हैं। लोगों का ऎसा मनोविज्ञान है कि पहले संभोग के समय में लडकियों को काफी दर्द होता है। इस दौरान ब्लीडिंग को लेकर भी अनेक तरह की भ्रांतियां हमारे समाज में मौजूद हैं। क्या सचमुच पहला संभोग कष्टदायक होता है ?
संभोग करने की स्थिति से भी दर्द का कुछ नाता हैक् ऎसे कुछ भ्रम लोगों के मन में अक्सर रहते हैं। कैसे आप इस दर्द से निजात पाकर सेक्स संबंधों का आनंद ले सकते हैं और अपने रिश्तों को सामान्य बना सकते हैं।
आइए जानें क्यों होता है संभोग के दौरान दर्द ?
इससे जुडी बातें सच हं या ये सिर्फ एक मिथ है ?
इस दर्द को मेडिकल टर्म में क्या कहते हैंक् संभोग के दौरान होने वाले दर्द को मेडिकल की भाषा में दाईस्पेरेनिया कहते हैं। यह ऎसा दर्द है जो एक बार होने पर बार-बार हो सकता है और इस दर्द का असर महिला-पुरूषों के रिश्ते पर बहुत बुरा पडता है।
क्यों होता है दर्द क वास्तव में पहली बार संभोग के समय महिलाओं को होने वाले दर्द का मुख्य कारण योनि का बहुत ज्यादा टाइट होना है। ऎसा तब होता है जब योनि की मांसपेशियां खिंच जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। ऎसी स्थिति में संभोग के समय महिला को बहुत अधिक दर्द होता है। ऎसा उन स्त्रयों के साथ होने की संभावना रहती है जो सेक्स संबंधों को बहुत बुरा मानती हैं और संभोग के समय पुरूष के साथ सहयोग नहीं करती। इसका मनोवैज्ञानिक असर ये होता है कि संभोग के समय योनि की मांसपेशिया सिकुड जाती हैं और तेज दर्द होता है।
योनि में किसी भी तरह का इंफेक्शन भी संभोग के समय दर्द का एक बहुत बडा कारण है। अक्सर योनि के आकार में परिवर्तन हो जाता है जिसे एंड्रियोमेट्रियोसिस कहते हैं।  यदि आपको भी संभोग के दौरान दर्द होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
संभोग के दौरान होने वाले दर्द का एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। लडकियों की परवरिश बचपन से ही इस तरह से की जाती है कि सेक्स को लेकर उनके मन में डर बैठ जाता है। वह सेक्स के नाम से ही घबराने लगती हैं और उन्हें अपनी किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान यह भी सुनने को मिलता है कि पहली बार किया गया संभोग बहुत कष्टदायक होता है और इस दौरान खूब ब्लीडिंग भी होती है। लंबे समय तक यह भी माना जाता रहा है कि यदि पहली बार संभोग के दौरान ब्लीडिंग न हो तो लडकी पहले सेक्स कर चुकी है। ये तमाम बातें लडकी के मन में मनोवैज्ञानिक रूप से संभोग के प्रति डर पैदा कर देती है और इस तरह की लडकियों को पहली बार संभोग के दौरान अक्सर दर्द की शिकायत होती है।
दर्द न हो इसके लिए क्या करना चाहिएक् यदि आप चाहते हैं कि आपको संभोग के दौरान दर्द ना हो तो आपको कुछ सेक्स पोजीशंस का इस्तेमाल पहली बार संभोग के दौरान करना चाहिए और आपको अपने मन से संभोग में होने वाले दर्द व अन्य मिथों को दूर कर देना चाहिए। इन सबके बावजूद भी आपको संभोग के दौरान दर्द से गुजरना पड रहा है तो आप डॉक्टर ही सलाह लें।

6. कौमार्य  (कुवांरापन ) किसे कहते है ?
कोई लड़की या लड़का कुंवारा तब कहा जाता है जब उन्होंने कभी भी संभोग (योनि में लिंग का प्रवेश कराकर किया जाने वाला सेक्स) न किया हो। इसीलिए जब आप पहली बार योनि-संभोग करते हैं तो लोग कहते हैं कि ‘आपने अपना कौमार्य खो दिया है’। यह सुनिश्चित कर लें कि आपके साथी को इस बात का पता है कि आप पहली बार संभोग करने जा रहे हैं, जिससे आप कोई जल्दबाज़ी न करें और धीरे-धीरे तथा सौम्यता से आगे बढ़ें।

7. मैं बहुत जल्दी क्यों स्खलित हो जाता हूँ ?
सेक्स बहुत रोमांचक होता है, और वह भी पहली बार! कई लड़के न चाहते हुए भी जल्दी चरम आनंद (आर्गैज़्म) महसूस कर लेते हैं। इस बारे में चिंता न करें। जब आपको अधिक अनुभव हो जाएगा और आप अधिक तनावमुक्त रहेंगे तो आप स्खलन रोकना सीख जाते हैं। यदि आपको शर्मिंदगी महसूस होती है, तो इसे हल्के में लें। ऐसा कुछ कहें, जैसे कि, ‘आपने मुझे वास्तव में आनंद दे दिया!’ यदि आप ऐसी बातें कर हँस लेते हैं, तो ऐसा होना आपके लिए कोई समस्या नहीं बनेगी।

8. मुझे चरम आनंद ( आर्गैज़्म ) क्यों नहीं महसूस होता ?
लड़कियों को अक्सर संभोग के दौरान चरम आनंद महसूस नहीं होता। योनि में केवल लिंग के अंदर-बाहर करने से टिठनी उत्तेजित नहीं होती। यदि आपको चरम आनंद महसूस करने की इच्छा है तो अपनी टिठनी को स्वयं छूएं, या अपने साथी को ऐसा करने को कहें। केवल संभोग करने के समय ही आपको चरम आनंद महसूस करने का समय नहीं होता। आपके साथी संभोग के पहले या बाद में भी आपके टिठनी को उत्तेजित कर आपको चरम आनंद महसूस करा सकते हैं।

9. क्या पहली बार में ही कोई लड़की गर्भवती हो सकती है ?
जी हाँ, पहली बार में ही किसी लड़के के साथ संभेाग करने से लड़की गर्भवती हो सकती हैं। चाहे उनका पहले कभी मासिक धर्म हुआ हो अथवा नहीं। इसलिए हमेशा कंडोम का प्रयोग करें
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ओशो वाणी : सम्भोग से समाधि की ओर

एक बहुत अद्भुत व्‍यक्‍ति हुआ है। उस व्‍यक्‍ति का नाम था नसीरुद्दीन एक दिन सांझ वह अपने घर से बाहर निकलता था मित्रों से मिलने के लिए। तभी द्वार पर एक बचपन का बिछुड़ा मित्र घोड़े से उतरा। बीस बरस बाद वह मित्र उससे मिलने आया था। लेकिन नसीरुद्दीन ने कहा कि तुम ठहरो घड़ी भर मैंने किसी को बचन दिया है। उनसे मिलकर अभी लौटकर आता हूं। दुर्भाग्‍य कि वर्षो बाद तुम आये हो और मुझे घर से अभी जाना पड़ रहा है।, लेकिन मैं जल्‍दी ही लौट आऊँगा। उस मित्र ने कहां, तुम्‍हें छोड़ने का मेरा मन नहीं है, वर्षो बाद हम मिले है। उचित होगा कि मैं भी तुम्‍हारे साथ चलू। रास्‍ते में तुम्‍हें देखूँगा भी, तुमसे बात भी कर लुंगा। लेकिन मेरे सब कपड़े धूल में हो गये है। अच्‍छा होगा, यदि तुम्‍हारे पास दूसरे कपड़े हों तो मुझे दे दो। वह फकीर कपड़े की एक जोड़ी जिसे बादशाह ने उसे भेट की थी—सुंदर कोट था, पगड़ी थी, जूते थे। वह अपने मित्र के लिए निकाल लाया। उसने उसे कभी पहना नहीं था। सोचा था; कभी जरूरत पड़ेगी तो पहनूंगा। फिर वह फकीर था। वे कपड़े बादशाही थे। हिम्‍मत भी उसकी पहनने की नहीं पड़ी थी। मित्र ने जल्‍दी से वे कपड़े पहन लिए।

जब मित्र कपड़े पहन रहा था, तभी नसीरुद्दीन को लगा कि यह तो भूल हो गयी। इतने सुंदर कपड़े पहनकर वह मित्र तो एक सम्राट मालूम पड़ने लगा। और नसरूदीन उसके सामने एक फकीर, एक भिखारी मालूम पड़ने लगा। सोचा रास्‍ते पर लोग मित्र की तरफ ही देखेंगे,जिसके कपड़े अच्‍छे है। लोग तो सिर्फ कपड़ों की तरफ देखते है और तो कुछ दिखायी नहीं पड़ता है। जिनके घर ले जाऊँगा वह भी मित्र को ही देखेंगे, क्‍योंकि हमारी आंखे इतनी अंधी है। कि सिवाय कपड़ों के और कुछ भी नहीं देखती। उसके मन में बहुत पीड़ा होने लगी। कि यह कपड़े पहनाकर मैंने एक भूल कर ली। लेकिन फिर उसे ख्‍याल आया कि मेरा प्‍यारा मित्र है, वर्षों बाद मिला है। क्‍या अपने कपड़े भी मैं उसको नहीं दे सकता। इतनी नीच इतनी क्षुद्र मेरी वृति है। क्‍या रखा है कपड़ों में। यही सब अपने को समझाता हुआ वह चला, रास्‍ते पर नजरें उसके मित्र के कपड़ों पर अटकी रही। जिसने भी देखा, वहीं गोर से देखने लगा। वह मित्र बड़ा सुंदर मालूम पड़ रहा था। जब भी कोई उसके मित्र को देखता, नसरूदीन के मन में चोट लगती कि कपड़े मेरे है और देखा मित्र जा रहा है। फिर अपने को समझाता कि कपड़े क्‍या किसी के होते है, में तो शरीर तक को अपना नहीं मानता तो कपड़े को अपना क्‍या मानना है, इसमें क्‍या हर्ज हो गया है। समझाता-बुझाता अपने मित्र के घर पहुंचा। भीतर जाकर जैसे ही अन्‍दर गया, परिवार के लोगों की नजरें उसके मित्र के कपड़ों पर अटक गई। फिर उसे चोट लगी, ईर्ष्‍या मालूम हुई कि मेरे ही कपड़े और मैं ही उसके सामने दीन हीन लग रहा हूं। बड़ी भूल हो गई। फिर अपने को समझाया फिर अपने मन को दबाया। घर के लोगों ने पूछा की ये कौन है, नसरूदीन ने परिचय दिया। कहा, मेरे मित्र है बचपन के बहुत अद्भुत व्‍यक्‍ति है। जमाल इनका नाम है। रह गये कपड़े, सो मेरे है।

घर के लोग बहुत हैरान हुए। मित्र भी हैरान हुआ। नसरूदीन भी कहकर हैरान हुआ। सोचा भी नहीं था कि ये शब्‍द मुहँ से निकल जायेंगे। लेकिन जो दबाया जाता है, वह निकल जाता है। जो दबाओ, वह निकलता है; जो सप्रेम करो, वह प्रकट होगा। इसलिए भूल कर भी गलत चीज न दबाना। अन्‍यथा सारा जीवन गलत चीज की अभिव्‍यक्‍ति बन जाता है। वह बहुत घबरा गया। सोचा भी नहीं था कि ऐसा मुंह से निकल जाएगा। मित्र भी बहुत हतप्रभ रह गया। घर के लोग भी सोचने लगे। यह क्‍या बात कही। बाहर निकल कर मित्र ने कहा, अब मैं तुम्‍हारे साथ दूसरे घर न जाऊँगा। यह तुमने क्‍या बात कहीं। नसरूदीन की आंखों में आंसू आ गये। क्षमा मांगने लगा। कहने लगा भूल हो गई। जबान पलट गई। लेकिन जबान कभी नहीं पलटती है। ध्‍यान रखना, जो भी तर दबा हो वह कभी भी जबान से निकल जाता है। जबान पलटती कभी नहीं। तो वह कहने लगा क्षमा कर दो, अब ऐसी भूल न होगी। कपड़े में क्‍या रखा है। लेकिन कैसे निकल गई ये बात,मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि कपड़े किसके है। लेकिन आदमी वहीं नहीं कहता, जो सोचता है, कहता कुछ और है सोचता कुछ और है। कहता था मैंने तो कुछ सोचा भी नहीं, कपड़े का तो मुझ ख्‍याल भी नहीं आया। यह बात कैसे निकल गई। जब कि घर से चलने में और घर तक आने में सिवाय कपड़े के उसको कुछ भी ख्‍याल नहीं आया था। आदमी बहुत बेईमान हे। जो उसके भीतर ख्‍याल आता है। कभी कहता भी नहीं। और जो बहार बताता है, वह भीतर बिलकुल नहीं होता है। आदमी सरासर झूठ है। मित्र ने कहां—मैं चलता हूं तुम्‍हारे साथ लेकिन अब कपड़े की बात न उठाना। नसरूदीन ने कहा, कपड़े तुम्‍हारे ही हो गये। अब मैं वापस पहनूंगा भी नहीं। कपड़े में क्‍या रखा है। कह तो वह रहा था कि कपड़े में क्‍या रखा है, लेकिन दिखाई पड़ रहा था कि कपड़े में ही सब कुछ रखा है। वे कपड़े बहुत सुंदर थे। वे मित्र बहुत अद्भुत मालूम पड़ रहा था। फिर चले रास्‍ते पर। और नसरूदीन फिर अपने को समझाने लगा की कपड़े दे ही दूँगा मित्र को। लेकिन जितना समझता था, उतना ही मन कहता था कि एक बार भी तो पहने नहीं। दूसरे घर तक पहुंचे,संभलकर संयम से। संयमी आदमी हमेशा खतरनाक होता हे। क्‍योंकि संयमी का मतलब होता है कि उसने कुछ भीतर दबा रखा है। सच्‍चा आदमी सिर्फ सच्‍चा आदमी होता है। उसके भीतर कुछ भी दबा नहीं रहता है। संयमी आदमी के भीतर हमेशा कुछ दबा होता है। जो ऊपर से दिखाई देता है, ठीक उलटा उसके भीतर  दबा होता है। उसी को दबाने की कोशिश में वह संयमी हो जाता है। संयमी के भीतर हमेशा बारूद है, जिसमें कभी भी आग लग जाये तो बहुत खतरनाक है। और चौबीस घंटे दबाना पड़ता है उसे, जो दबाया गया है। उसे एक क्षण को भी फुरसत दी, छुट्टी की वह बहार आ जायेगा। इस लिए संयमी आदमी को अवकाश कभी नहीं होता। चौबीस घंटे जब तक जागता है। नींद में बहुत गड़बड़ हो जाती हे। सपने में सब बदल जाता है। और जिसको दबाया है वह नींद में प्रकट होने लगता है। क्‍योंकि नींद में संयम नहीं चलता। इसीलिए संयमी आदमी नींद में डरता है। आपको पता है, संयमी आदमी कहता है क्‍या सोना। इसके अलावा उसका कोई कारण नहीं है। नींद तो परमात्मा का अद्भुत आशीर्वाद है। लेकिन संयमी आदमी नींद से डरता है। क्‍योंकि जो दबाया है, वह नींद में धक्‍के मारता है। सपने बनकर आता है।

भूल का नियम है कि वह हमेशा अतियों पर होती है। एक्‍सट्रीम से बचो तो दूसरे एक्‍सट्रीम पर हो जाती है। भूल घड़ी के पैंडुलम की तरह चलती है। एक कोने से दूसरे कोने पर जाती है। बीच में नहीं रुकती। भोग से जायेगी तो एकदम त्‍याग पर चली जायेगी। एक बेवकूफी से छूटी दूसरी बेवकूफी पर पहुंच जायेगी। जो ज्‍यादा भोजन से बचेगा, वह उपवास करेगा। और उपवास ज्‍यादा भोजन से भी बदतर हे। क्‍योंकि ज्‍यादा भोजन भी आदमी दो एक बार कर सकता है। लेकिन उपवास करने वाला आदमी दिन भर मन ही मन भोजन करता है। वह चौबीस घंटे भोजन करता रहता है। एक भूल से आदमी का मन बचता है तो दूसरी भूल पर चला जाता है। अतियों पर वह डोलता है। एक भूल की थी कि कपड़े मेरे है। अब दूसरी भूल हो गई कि कपड़े उसी के है, तो साफ हो जाता है कि कपड़े उसके बिलकुल नहीं है। और बड़े मजे की बात है कि जोर से हमें वही बात कहनी पड़ती है, जो सच्‍ची नहीं होती है। अगर तुम कहो कि मैं बहुत बहादुर आदमी हूं तो समझ लेना कि तुम पक्‍के नंबर के कायर हो। अभी हिंदुस्‍तान पर चीन का हमला हुआ। सारे देश में कवि हो गये, जैसे बरसात में मेंढक पैदा हो जाते है। ‘हम सोये हुए शेर है, हमें मत छेड़ों।‘ कभी सोये हुए शेर ने कविता की है कि हमको मत छेड़ों, कभी सोये हुऐ शेर को छेड़ कर देखो तो पता चल जाएगा। कि छेड़ने का क्‍या मतलब होता है। लेकिन हमारा पूरा मुल्‍क कहने ला कि हम सोये हुऐ शेर है। हम ऐसा कर देंगे,वैसा कर देंगे। चीन लाखों मील दबा कर बैठ गया है और हमारे सोये शेर फिर से सो गये है। कविता बंद हो गई है। यह शेर होने का ख्‍याल शेरों को पैदा नहीं होता। वह कायरों को पैदा होता है। शेर-शेर होता है। चिल्‍ला चिल्‍लाकर कहने की उसे जरूरत नहीं होती।

कह तो दिया नसरूदीन ने कि कपड़े—कपड़े इन्‍हीं के है। लेकिन सुन कर वह स्‍त्री तो हैरान हुई। मित्र भी हैरान हुआ कि फिर वही बात। बाहर निकल कर उसे मित्र ने कहा कि क्षमा करो, अब मैं लौट जाता हूं। गलती हो गई है कि तुम्‍हारे साथ आया। क्‍या तुम्‍हें कपड़े ही दिखाई पड़ रहे है। नसरूदीन ने कहा, मैं खुद भी नहीं समझ पाता। आज तक जिंदगी में कपड़े मुझे दिखाई नहीं पड़े। यह पहला ही मौका है। क्‍या हो गया मुझे। मेरे दिमाग में क्‍या गड़बड़ हो गई। पहले एक भूल हो गई थी। अब उससे उलटी भूल हो गई। अब मैं कपड़ों की बात ही नहीं करूंगा। बस एक मित्र के घर और मिलना है फिर घर चल कर आराम से बैठे गे। और एक मौका मुझे दे दो। नहीं तो जिंदगी भी लिए अपराध मन में रहेगा कि मैंने मित्र के साथ कैसा दुर्व्‍यवहार किया। मित्र साथ जाने को राज़ी हो गया। सोचा था अब और क्‍या करेगा भूल। बात तो खत्‍म हो ही गई हे। दो ही बातें हो सकती थी। और दोनों बातें हो गई है। लेकिन उसे पता न था भूल करने वाले बड़े इनवैटिव होते है। नयी भूल ईजाद कर लेते है। शायद आपको भी पता न हो। वे तीसरे मित्र के घर गये। अब की बार तो नसरूदीन अपनी छाती को दबाये बैठा है कि कुछ भी हो जाये, लेकिन कपड़ों की बात न निकालूंगा। जितने जोर से किसी चीज को दबाओ, उतने जोर से वह पैदा होनी शुरू होती है। किसी चीज को दबाना उसे शक्‍ति देने का दूसरा नाम है। दबाओ तो और शक्‍ति मिलती है उसे। जितने जोर से आप दबाते है उस जोर में जो ताकत आपकी लगती है वह उसी में चली जाती है। जिस को आप दबाते हो। ताकत मिल गई उसे। अब वह दबा रहा है और पूरे वक्‍त पा रहा है कि मैं कमजोर पड़ता जा रहा हूं। कपड़े मजबूत होते जा रहे है। कपड़े जैसी फिजूल चीज भी इतनी मजबूत हो सकती है। कि नसरूदीन जैसा ताकतवर आदमी हारे जा रहा है उसके सामने। जो किसी चीज से न हारा था, आज उसे साधारण से कपड़े हराये डालते है। वह अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। लेकिन उसे पता नहीं है कि पूरी ताकत हम उसके खिलाफ लगाते है, जिससे हम भयभीत हो जाते है। जिससे हार जाते है, उससे हम कभी नहीं जीत सकते। ताकत से नहीं जीतना है, अभय से जीतना है, ‘फियरालेसनेस’ से जीतना है। बड़े से बड़ा ताकतवर हार जायेगा। अगर भीतर भय हो तो। ध्‍यान रहे हम दूसरे से कभी नहीं हारते, अपने ही भय से हारते है। कम से कम मानसिक जगत में तो यह पक्‍का है कि दूसरा हमें कभी नहीं हरा सकता,हम हमारा भय ही हराता है। नसरूदीन जितना भयभीत हो रहा है, उतनी ही ताकत लगा रहा है। और वह जितनी ताकत लगा रहा है, उतना भयभीत हुआ जा रहा है। क्‍योंकि कपड़े छूटते ही नहीं। वे मन में बहुत चक्‍कर काट रहे है। तीसरे मकान के भीतर घुसा है। लगता है वह होश में नहीं है। बेहोश है। उसे न दीवालें दिख रही है, न घर के लोग दिखायी पड़ रहे हे। उसे केवल वहीं कोट पगड़ी दिखाई पड़ रही है। मित्र भी खो गया है। बस कपड़े है और वह हे। हालांकि ऊपर से किसी को पता नहीं चलता है। जिस घर में गया, फिर आँख टिक गयीं उसके मित्र के कपड़ों पर। पूछा गया ये कौन है? लेकिन नसरूदीन जैसे बुखार में है। वह होश में नहीं है। दमन करने वाले लोग हमेशा बुखार में जीते है। कभी स्‍वस्‍थ नहीं होते। सप्रेशन जो है, वह मेंटल फिवर है। दमन जो है। वह मानसिक बुखार है। दबा लिया है और बुखार पकड़ा हुआ है। हाथ पैर कांप रहे है उसके। वह अपने हाथ पैर रोकने की बेकार कोशिश कर रहा है। जितना रोकता है वह उतने कांपते जा रहे है। कौन है यह?….यह तो अब उसे खुद भी याद नहीं आ रहा है। कौन है यह, शायद कपड़े है, सिर्फ कपड़े। साफ मालूम पड़ रहा है। कि कपड़े है लेकिन यह कहना नहीं है। लगा जैसे बहुत मुश्‍किल में पड़ गया है। उसे याद नहीं आ रहा कि क्‍या कहना है। फिर बहुत मुश्‍किल से कहां मेरे बचपन का मित्र है, नाम है फला। और रह गये कपड़े, सो कपड़े की तो बात ही नहीं करना है। वे किसी के भी हो, उनकी बात नहीं उठानी है। लेकिन बात उठ गई, जिसकी बात न उठानी हो उसी की बात ज्‍यादा उठती है।
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सेक्स से जुड़े ये 25 बातें नहीं जानते होंगे आप ?


1) मैथुन करते समय स्त्री की यौनि और छाती के अलावा नाक का भीतरी भाग भी फ़ूल जाता है।
2) मानव को यौवन की चरम अवस्था 17-18 वर्ष की आयु में प्राप्त हो जाती है।
3) एक बार के संभोग में पुरुष की 100 केलोरी दहन होती है।
4) करीब एक तिहाई औरतें 80 के बाद भी यौन-क्रिया में संलग्न रहती है।
5) एक बार के संभोग में जो वीर्य स्खलित होता है उसमें 2 से 5 मिलियन शुक्राणु होते हैं।
6) यौन क्रिया की चरम अवस्था (ओर्गास्म) के समय स्त्री-पुरुष दोनों की हृदय की धडकन 140 प्रति मिनिट हो जाती है।
7) स्त्रियां अपनी पूरे संतानोत्पत्ति काल में तीन हजार से भी ज्यादा बार सेक्स करती हैं। 40 वर्ष तक के पुरुषों के लिंग मैथुन के वक्त सिर्फ़ 10 सेकंड में खडे (इरेक्टेड) हो जाते हैं।
9) 41% पुरुष और ज्यादा बार संभोग की इच्छा रखते हैं जबकि केवल 29%
प्रतिशत महिलाएं रजामंद होती हैं। 
10) 15% पुरुष काम के समय ( आन ड्युटी) ही संभोग कर लेते हैं।
11) करीब 75% पुरुष प्रविष्ट करने के बाद तीन मिनिट में स्खलित हो जाते हैं।
12) पांच प्रतिशत युवा प्रतिदिन संभोग करते हैं जबकि 20% सप्ताह में तीन से चार बार सेक्स करते हैं।
13) सेक्स के बाद एक घंटे में शुक्राणु 7 इंच तक आगे बढ़ सकता है।
14) अधिकांश स्त्रिया पुरुष की खूबियों का आकलन करने में लिंग की साईज को नवें पायदान पर रखती हैं जबकि पुरुष लिंग की साईज को ज्यादा महत्व देते हुए तीसरे पायदान पर रखते हैं।
15) यौन विशेषज्ञों का मत है कि सेक्स की मस्तिष्क प्रशांतक शक्ति “वेलियम”
से 5 गुनी अधिक है।
16) टेंशन से मस्तिष्क की रक्त वाहिनिया संकुचित होकर सिर दर्द का कारण बनता है। सेक्स टेंशन को दूर कर सिर दर्द से मुक्ति देता है।
17) एक ड्राईवर पूरे जीवन में औसत 6 बार कार में ही सेक्स का लुत्फ़ लेता है।
18) स्त्री के शरीर में नर शुक्राणु 9 दिन तक जीवित रह सकते हैं।
19) 30% पुरुष शीघ्र पतन की गिरफ़्त में हैं जबकि 10% लोग “तनाव दोष”(इरेक्टाईल डिस्फ़न्क्शन) से पीडित है।
20) 82% महिलाएं अपने साथी के लिंग साईज से पूर्री तरह संतुष्ट हैं।
21) माईग्रेन से पीडित महिलाएं ज्यादा कामुक होती हैं।
22) ज्यादतर महिलाएं अंधेरे में सेक्स करना पसंद करती है।
23) किसी भी अन्य जगह के बजाय मर्द बिस्तर में ज्यादा झूंठ बोलते हैं। 
24) पुरुष अपने सामान्य जीवनकाल में 17 लिटर वीर्य स्खलित करता है।
25) सेक्स सक्रिय लोग संयम से रहने वले लोगों की बनिस्बत ज्यादा उम्र जीते हैं।
26) स्त्री की भगनासा मे पुरुष के लिंग की तुलना में दो गुने नाडी तंतु रहते हैं। भगनासा सहलाने से स्त्री तुरंत उत्तेजितहो जाती है
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सिर्फ लड़कियो के लिये ये पोस्ट, लड़के दुर रहे


प्रिय महिला मित्रो आप की एक अनजानी गलती आपकी जिंदगी नर्क बना सकती है
आज के दौर मे जो भी मोबाइल क्लीप ब्लु फिल्म एम एम एस आप देखती है
उस जगह आप भी हो सकती है जानिये कैसे
आप को जो भी करना है आप करो यार दोस्त बनावो उनके साथ सब कुछ करो मगर कभी भी कोई फोटो या विडियो ना बनावावो ना बनने दो आपका एक मिनट का बिरोध जो की थोड़ी देर के लिये बुरा तो लग सकता है आपके दोस्त को मगर आपकी जींदगी बचा सकता है 
मै मानती हु की आपके दोस्त अच्छे है और वो ऐसा कभी भी नही सोचते है और ना ही करेँगे लेकीन जब आप उन पलो को कैमरे मे कैद हो जाने देँगी फिर क्या होगा 
जब उनका मोबाइल चोरी हो जायेगा 
या आपका भरोसा उन पर है ना की उनके दोस्तो पर 
अगर उनका कोई दोस्त किसी बहाने से उनका फोन ले लेता है और वो क्लीप ब्लुटुथ के माध्यम से ले ले फिर क्या होगा
आपको पुरी दुनिया नही जानती है लेकीन एक हजार लोग तो होँगे ही जो आप को पहचानते है अगर किसी एक के भी हाथ लग गयी वो क्लिप तो आप सोचो क्या होगा
भगवान ना करे अगर कभी आपका रिश्ता उनसे खत्म होता है तो आप ब्लैकमेल का शिकार हो सकती है ये जितनी विडियो आप देखती है ऐसे ही बनी है कोई अपना विडियो जान के नही डालता है
अब अगर मान लीजिये की उनकी मेमोरी पासवर्ड प्रोटक्टेड है तो बाजार मे सिर्फ 20 रूपये मे मेमोरी अनलाक हो जाती है 
फिर आपकी विडियो किस किस के हाथ लगेगी वो क्या करेगा ये आप भी नही जानती है और ना ही आपके दोस्त समझदारी मे ही सुरछा है आपकी इज्जत आपके हाथ है याद रखे लड़को का कुछ नही जाता है हर हाल मे नुकसान आपका ही होना है.
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यौन क्रिया के बाद क्‍या चाहती हैं महिलाएं


आमतौर पर पुरुष संभोग के तुरंत बाद या तो सो जाते है, या फिर अपनी पार्टनर से दूर बैठ जाते हैं। ऐसा करने पर कई बार पार्टनर का मूड खराब भी हो जाता है। क्‍या आपके साथ भी ऐसा होता है? क्‍या आपकी पार्टनर भी प्‍यार की चरम सीमा तक पहुंचने के बाद रूठ जाती है। शायद इसमें आपकी भी गलती हो सकती है, क्‍योंकि महिलाएं यौन क्रिया के बाद भी आपका प्‍यार चाहती हैं।

कुछ बातें हम आपको बताएंगे, जिनका पालन कर आप अपने और अपनी पार्टनर के बीच सकारात्‍मक फर्क जरूर महसूस करेंगे।

1. सेक्‍स के तुरंत बाद कभी सोयें नहीं। इससे महिला को लगता है कि आप सिर्फ मतलब से उसके करीब आते हैं।

2. संभोग के बाद आप अपनी पार्टनर के साथ स्‍पून फिटिंग पोज़ीशन में लेट जायें जैसे दो चम्‍मच एक दूसरे में फिट हो जाते हैं। और अपने हाथों से हलके-हलके स्‍पर्श करते हुए प्‍यार की बाते करें। इससे महिला अपने आपको सुरक्षित महसूस करती है।

3. प्‍यार की चरम सीमा तक पहुंचने के बाद भी महिलाएं अपने पार्टनर से बातें करना पसंद करती हैं। ऐसे में यदि आप मीठा सा चुंबन लेंगे, तो उन्‍हें अच्‍छा लगेगा।

4. यदि आप खासतौर से अपनी पार्टनर के मन की बात जानना चाहते हैं कि वे सेक्‍स के बाद क्‍या चाहती है, तो स्‍पून फिटिंग पोज़ीशन में उनसे पूछें कि उन्‍हें कैसा लग रहा है। वो खुद ब खुद अपनी इच्‍छाएं बयान कर देंगी। उनकी इच्‍छाओं को पूरा करके आप अपने प्‍यार भरे जीवन में खुशियां दुगनी कर सकते हैं।

5. संभोग के बाद आप अपनी पार्टनर से पूछें कि उन्‍हें कैसा लगा, कौन सी यौन क्रिया में उन्‍हें सबसे ज्‍यादा आनंद आया, प्‍यार के वक्‍त उन्‍हें क्‍या चीज़ सबसे अच्‍छी लगी, आदि। उन बातों को अगली बार आज़माकर आप अपनी पार्टनर के और ज्‍यादा करीब जा सकते हैं।

6. ऐसा बहुत कम होता है कि महिला दोबारा संभोग के लिए कहे। महिलाएं कभी भी प्‍यार के बाद आराम नहीं चाहती, जबकि अधिकांश पुरुष इस क्रिया के बाद सोना पसंद करते हैं। यदि आपकी पार्टनर दोबारा संभोग के लिए कहे, तो मना मत करिये, क्‍योंकि ऐसा चांस जल्‍दी नहीं आता।
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महिलाएं सेक्‍स के दौरान क्‍यों करती है आह-आउच



सेक्‍स के दौरान कई ऐसी प्रकियाएं होती हैं जो एक दूसरे को आनंद देती है जिनमें से महिलाओं का सेक्‍स के दौरान आवाज निकालना भी है। अगर सेक्‍स के दौरान आपकी पार्टनर भी आह या उफ की आवाजें निकालती है तो ये एक साधारण प्रकिया है। इसका मतलब ये नहीं कि आपकी पाटर्नर संतुष्‍ट हो रही है। हां लेकिन कुछ केसेस में महिलाएं संतुष्‍टी के दौरान भी आवाजे निकालती हैं। ज्‍यादातर महिलाओं से इस बारे में पूंछा गया तो उनका जवाब बिल्‍कुल सीधा था वे ऐसा अपने पुरुष साथी को संतुष्‍ट करने के लिए करती है। जबकि कुछ का कहना था जब उनके साथी जब अधिक स्‍ट्रोक देते हैं तो वे आवाज निकालती हैं। सेक्‍स के दौरान ज्‍यादातर महिलाएं आह... आउच या फिर ओ मॉय गॉड की अवाज निकालती हैं ऐसा हम नहीं बल्‍कि महिलाओं के बीच किए गए सर्वे में पता चला है।
सेक्‍स के दौरान ज्‍यादातर आवाजें महिलाएं फोरप्‍ले या फिर मेल एजुकुलेशन के समय निकालती हैं। अगर आकड़ों पर नजर डालें तो 66 प्रतिशत महिलाएं अपने पार्टनर के आर्गज्म को और अधिक बढ़ाने के लिए इस तरह की आवाजें निकालती है वहीं दूसरी ओंर 92 प्रतिशत महिलाएं सेक्‍स के दौरान आवाजे निकालकर अपने पार्टनर को सेक्‍स की रफ्तार तेज करने का सकेंत देतीं हैं। ऐसा नहीं है कि सेक्‍स के दौरान केवल महिलाएं ही आवाज निकालती हैं पुरुष भी आवाज निकालते हैं लेकिन केवल एजुकुलेशन के समय जो साधारण सी बात है।

ओह बेबी- ओ बेबी शब्‍द का प्रयोग अक्‍सर पुरुष लोग करते हैं जिसका सीधा मतलब होता है पुरुष पाटर्नर को आप संतुष्‍ट कर रहीं हैं।
आउच- सेक्‍स करते समय जब पुरुष ज्‍यादा तेजी से स्‍ट्रोक देते हैं तो कुछ समय के लिए महिला पाटर्नर को दर्द होता है जिससे ये साउंड निकलता है।

आह- सेक्‍स के समय जब महिला पार्टनर पूरी तरह से इसे इंज्‍वाय कर रहीं हो तभी ये साउंड निकलता है।
येस- जब महिला पाटर्नर चरम सीमा में हो तब ये साउंड उनके मुहं से निकलता है। इस समय पुरुष पाटर्नर को पूरी तरह से एक्‍टीवेट रहना चाहिए।
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मासिक धर्म के दौरान संभोग ?


तमाम लोगों के लिये सेक्‍स एक आदत सी बन जाती है। कई बार ऐसा होता है कि बगैर संभोग किये उन्‍हें नींद नहीं आती, ऐसे में महिलाओं को खासी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है। मासिक धर्म और कभी कभी संक्रमण के कारण महीने में करीब एक सप्‍ताह तक वो सेक्‍स नहीं कर पाती हैं। तमाम पुरुष ऐसे हैं, जो मासिक धर्म के दौरान पत्‍नी से सेक्‍स नहीं करते, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जो उस दौरान भी नहीं मानते।
यदि आपके पति ऐसे हैं, तो आप उन्‍हें रोक तो नहीं सकतीं, लेकिन हां कुछ सावधानियां जरूर बरत सकती हैं। और हां कुछ बातें भी आपको जानना बहुत जरूरी है। वैसे चिकित्‍सकों की सलाह हमेशा से यही रहती है कि पीरियड के दौरान महिलाओं को संभोग से परहेज करना चाहिये।

जरूरी बातें
- मेंस्‍ट्यूरेशन यानी मासिक धर्म के दौरान आप गर्भवती नहीं हो सकतीं, यह बात दिमाग से बिलकुल निकाल दीजिये।
- ऐसे में संभोग करने से प्रेगनेंट होने के चांस ज्‍यादा रहते हैं।
- ऐसे में संभोग करने से इंफेक्‍शन का खतरा भी बहुत ज्‍यादा रहता है।
- सेक्‍सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ यानी यौन संक्रमित बीमारियां लगने की आशंका भी ज्‍यादा रहती है।
- बिना कंडोम के संभोग करने से इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा रहता है।
- मासिक धर्म के पहले दो दिन संभोग से महिलाओं को तीव्र दर्द होता है।

सावधानियां
- मासिक धर्म के दौरान संभोग करते वक्‍त कंडोम का प्रयोग कतई मत भूलें।
- महिलाएं संभोग से पहले अपने यौन अंगों को अच्‍छी तरह धुल जें।
- यदि आपके पार्टनर ने कंडोम का प्रयोग नहीं किया है, तो संभोग के तुरंत बाद उनसे अपना लिंग धुलने के लिये कहें। अन्‍यथा इंफेक्‍शन का खतरा रहता है।
- संभोग से पहले अपना सेनीटरी नैपकिन बदलें।
- यदि आपकी पार्टनर पीरियड से है और पहला या दूसरा दिन है, तो आप धीरे-धीरे संभोग करें।
- महिलाएं रति नि‍ष्‍पत्ति यानी संभोग की चरम सीमा तक जाने अथवा ऑर्गैज्म से बचें।
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मानव लिंग का आकार एक रिपोर्ट



एक प्रसिद्ध ब्रिटिश वैज्ञानिक रिचर्ड लिन ने मानव (पुरुष) के लिंग के आकार पर एक शोधपत्र प्रकाशित किया। इस शोध में 113 देशों के पुरुषों के प्राइवेट पार्ट के साइज का विश्लेषण किया गया है। इस आधार पर देशों की एक लिस्‍ट भी बनाई गई है। इस लिस्‍ट में भारत 110वें स्थान पर है। लिस्‍ट में 7.1 इंच के औसत 'साइज' के साथ कांगो सबसे ऊपर है। कोरिया और कंबोडिया (3.9 इंच) सबसे नीचे हैं। भारत इन्‍हीं दो देशों से ऊपर है। भारतीय पुरुषों का 'औसत साइज' 4 इंच बताया गया है। लेकिन इस पर सवाल उठ रहे हैं।
साल 2006 में भारत में कंडोम का साइज तय करने के लिए किए गए 'साइज सर्वे' की रिपोर्ट आई थी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा कराए गए सर्वे 'स्डटी ऑन प्रापर लेंथ एंड ब्रेड्थ स्पेसिफिकेसंस फॉर कंडोम बेस्ड एंथ्रोपोमेट्रिक मेजरमेंट' के बाद यह नतीजा निकला था कि भारतीय बाजार में मिलने वाले कंडोम पुरुषों के लिंग के साइज के अनुपात में बड़े होते हैं। आईसीएमआर के लिए सर्वे करने वाले डॉ. शर्मा ने अपनी शोध रिपोर्ट साल 2006 में भारत सरकार को सौंप दी थी।
हालांकि इसके बाद कंडोम बनाने वालों के लिए कोई भी दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए थे। ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट 1940 के अनुच्छेद 'आर' के मुताबिक भारत में कंडोम का साइज कम से कम 6.7 इंच रखना अनिवार्य है। बहरहाल, सर्वे में 1400 पुरुषों का डाटा लिया गया था जिसमें 18-50 आयुवर्ग के पुरुष शामिल थे। इससे पहले साल 2001 तक मुंबई में इकट्ठा किए गए (200 लोगों के) डाटा के मुताबिक 60 प्रतिशत भारतीय पुरुषों के प्राइवेट पार्ट की औसत लंबाई 4.4 से 4.9 इंच के बीच और 30 प्रतिशत की लंबाई 4 से 4.9 इंच बताई गई
रिचर्ड के सर्वे पर सवाल
डॉ. रिचर्ड द्वारा जारी डाटा के मुताबिक भारतीय पुरुषों के लिंग की औसत लंबाई चार इंच है। उन्‍होंने अपनी रिपोर्ट का आधार आईसीएमआर के सर्वे को बनाया है। इसलिए इस सर्वे को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। द ओपेन मैग्जीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईसीएमआर द्वारा कराए गए सर्वे के नतीजे ही विश्वसनीय नहीं थे। तो फिर इसे आधार बना कर किया गया कोई और सर्वे कैसे विश्‍वसनीय हो सकता है?
आईसीएमआर के सर्वे को बेहतर रेस्पांस नहीं मिल पाया था क्योंकि भारत में कोई भी पुरुष इस तरह के सर्वे के लिए तैयार हो जाये यह बात भी आसान नहीं है। आईसीएमआर के लिए सर्वे करने वाले डॉ० आर०एस० शर्मा के मुताबिक सर्वे के लिए आंकड़े इकट्ठा करने में उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। डॉ० शर्मा ने साल 2001 में आँकड़े इकट्ठा करना शुरू किया था। उन्हें इसमें पाँच साल लग गये थे। डॉ० शर्मा कहते हैं-"भारतीय पुरुषों के लिंग का औसत साइज निकालना बाकी देशों से भिन्न है क्योंकि यहाँ अलग-अलग जाति और नस्लों के लोग रहते हैं।" डॉ० शर्मा की टीम ने सात सेंटरों- पटना, गुवाहाटी, कटक, चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई और हुबली में पुरुषों के प्राइवेट पार्ट के साइज के सैंपल इकट्ठे किये थे।
सर्वे और उसकी मुश्किलें
चंडीगढ़ में डॉ० एस के सिंह ने यह सर्वे किया था। डॉ० सिंह 220 पुरुषों का सैंपल लेने में कामयाब रहे थे। पुरुषों के अंग का साइज मापने के लिए एक किट बनाई गई थी जो अंग की मोटाई और लंबाई मापती थी। इसमें दो पेपर स्ट्रिप थी जिनसे माप लिया जाता था। एक पुरुष के कम से कम तीन माप लिए जाते थे और फिर औसत को अंतिम माप मान लिया जाता था।
पुरुषों के अंग का माप लेना भी एक बड़ी समस्या थी। पहले आईआईटी खड़गपुर के एक प्रोफेसर ने अंग का माप लेने के लिए एक डिजिटल कैमरा विकसित किया लेकिन महँगा होने के कारण इसे अपनाया नहीं गया था। कई व्‍यावहारिक दिक्‍कतें भी पेश आई थीं। पहले तो पुरुषों को सर्वे में शामिल होने के लिए तैयार करना ही मुश्किल था। अगर किसी तरह तैयार भी किया जाता था तो माप देते वक्‍त वे सहज नहीं हो पाते थे। उन्‍हें इसके लिए बोल्‍ड मैग्‍जीन आदि दिखा कर तैयार किया जाता था। शादीशुदा पुरुषों को अपनी पत्नी को साथ लाने की इजाजत दी गई थी। इसके बावजूद सही माप लेने में कई मुश्किलें आती थीं। चंडीगढ़ में सर्वे करने वाले डॉ० सिंह तो पुरुषों को सर्वे में शामिल होने के लिए देशहित तक का वास्ता देते थे।
सर्वे में शामिल अहम देशों का औसत साइज
रिपब्लिक ऑफ कांगो - 7.1 इंच,
इक्वाडोर- 7 इंच,
घाना - 6.8 इंच,
कोलंबिया - 6.7 इंच,
आइसलैंड - 6.5 इंच,
इटली - 6.2 इंच,
दक्षिण अफ्रीका - 6 इंच,
स्वीडन - 5.9 इंच,
ग्रीस - 5.8 इंच,
जर्मनी - 5.7 इंच,
न्यूजीलैंड - 5.5 इंच,
यू०के० - 5.5 इंच,
कनाडा - 5.5 इंच,
स्पेन - 5.5 इंच,
फ्रांस - 5.3 इंच,
ऑस्ट्रेलिया - 5.2 इंच,
रूस - 5.2 इंच,
यूएसए - 5.1 इंच,
आयरलैंड - 5 इंच,
रोमानिया - 5 इंच,
भारत- 5 इंच,
चीन - 4.3 इंच,
थाइलैंड - 4 इंच,
दक्षिण कोरिया - 3.8 इंच,
उत्तर कोरिया - 3.8 इंच
कोच्चि की अलग कहानी
कोच्चि में भी औसत साइज मापने के लिए एक सर्वे किया गया था। इसमें 301 लोग शामिल हुए थे और इसके नतीजे सन 2007 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंपोटेंस रिसर्च में प्रकाशित हुए थे। इस सर्वे को सेक्स रोग विशेषज्ञ डॉ० के० प्रोमुदु ने किया था। डॉ० प्रोमुदु के सर्वे के मुताबिक औसत साइज 5.8 इंच लंबा पाया गया। हालांकि उन्होंने सर्वे सिर्फ केरल में किया था इसलिए इसे समूचे भारत का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि डॉ० प्रोमुदु के सर्वे को यदि मानक माना जाए तो इस सूची में भारत चीन समेत कई देशों से ऊपर हो जाता है।
इस तरह डॉ० लिन की रिसर्च में कई खामियाँ नजर आती हैं। लेकिन उनकी रिपोर्ट इस बात पर रोशनी जरूर डालती है कि दुनिया के अलग-अलग इलाकों के पुरुषों के 'साइज' में इतना फर्क क्यों हैं। उन्‍होंने इसे मानव जाति के विकास से जोड़ा है। उनके मुताबिक प्राचीन काल में पुरुषों में महिलाओं को गर्भवती कर अपनी नस्ल के विकास की होड़ रहती थी। इस होड़ में अपेक्षाकृत लंबे प्राइवेट पार्ट वाले पुरुष बाजी मार लेते थे। लेकिन जैसे-जैसे पुरुष जाति ने अफ्रीका से यूरोप, एशिया और अन्य द्वीपों में पलायन किया, उनके बीच महिलाओं को गर्भवती करने की होड़ कम हो गई। इस कारण से पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरॉन नाम का हारमोन भी कम होता गया। नतीजतन साइज छोटा होता चला गया।
डॉ० लिन की शोध के मुताबिक नीग्रॉयड्स का 'औसत साइज' 6.3 इंच होता है। ये अफ्रीका में ही रहने वाले पुरुषों के वंशज हैं जबकि कोकसॉड्स पुरुषों के मामले में यह आँकड़ा 5.4 इंच और मंगोलॉयड्स के मामले में 4.7 इंच है। ये उन पुरुषों के वंशज है जो अफ्रीका को छोड़कर यूरोप और एशिया में बस गए थे.
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लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कितना सही ?


1. लिंग बाहर निकल कर वीर्य स्खलन गर्भ से बचने का अचूक तरीका है
ये तरीका साधारण है, स्खलन से ठीक पहले लिंग बाहर खींच लिया जाये ताकि योनि के अंदर वीर्य न पहुंचेI ये तरीका कारगर तो हो सकता है लेकिन सौ फीसदी कामयाब नहींI
जब इससे तरीके का प्रयोग सही तरीके से किया जाये तब भी 100 में से 4 महिलाओं को गर्भ ठहर ही जाता हैI और जिन लोगों ने इस काम में दक्षता हासिल नहीं की है, उन् लोगों में गर्भ ठहरने का हर साल का प्रतिशत 27 तक पाया गयाI यदि पुरुष सही समय पर लिंग बाहर खींच भी ले तो भी गर्भ ठहरने की पूरी सम्भावना को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि सेक्स के दौरान संभव है की थोड़ी मात्रा में वीर्य का रिसाव हो रहा हो और आप अनभिज्ञ होंI यही छोटी मात्रा का रिसाव गर्भ की वजह बन सकता हैI

2 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना आसान क्रिया है
यह सुनने में आसान भले ही लगता हो, लेकिन असल में उतना आसान नहीं है, खासकर उनके लिए जो हाल ही मैं ये तरीका अपनाने लगे हैंI इसके लिए दोनों साथियों में सही तालमेल की ज़रूरत होती हैI अनचाहे गर्भ के खतरे से सुरक्षा के लिए ज़रूरी है की आप कोई और विश्वसनीय तरीका अपनाएंI

3 : सही समय पर लिंग खींच लेने के लिए पुरुषों पर भरोसा किया जा सकता है
वो जोड़े जिनमे आत्म-नियंत्रण, अनुभव और विश्वास हो, इस तरीके का उपयोग सही तरीके से कर सकते हैंI अगर तीनो में से एक भी चीज़ की कमी हो तो बेहतर है की कोई और तरीका अपनाया जायेI जो पुरुष इस तरीके का प्रयोग करते हैं, उन्हें इस बात का सही अंदाज़ा होना चाहिए की कब उनका स्खलन होने वाला है, क्यूंकि गलती की गुंजाइश बहुत काम हैI इसलिए यह तरीका अनुभवहीन या शीघ्रपतन से जूझ रहे पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं हैI क्यूंकि अगर सही समय पर लिंग बाहर न निकला जाये तो गर्भ ठहर सकता हैI

4 : लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना कारगर नहीं है
इस तरीके को अक्सर असरदार तरीका नहीं मन जाता जबकि सच ये है की 60 प्रतिशत जोड़ों ने इसका प्रयोग कभी न कभी ज़रूर किया हैI
हालाँकि गटमाकर संस्थान, न्यू यॉर्क द्वारा की गयी रिसर्च से पता चलता है की अगर लिंग को सही समय बाहर निकल लिया जाये तो अनचाहे गर्भ से 96 फ़ीसदी तक बचा जा सकता हैI कंडोम की मदद से इस बचाव की संख्या है 98 फीसदीI ज़्यादा फर्क नहीं, है ना?
सही तरीके से अंजाम दिया जाये तो ये अवश्य एक कारगर तरीका हो सकता हैI बात ये है की हर बार इसे सही अंजाम देना शायद आसान नहीं हैI लेकिन फिर भी, कोई तरीका इस्तेमाल ना करने से बेहतर ये तरीका ही हैI

5 : इसका प्रयोग सिर्फ गैर ज़िम्मेदार लोग करते हैं
हाल ही के एक अमरीकी अध्यन से पता चलता है की 5 फीसदी लोग गर्भ से बचाव के लिए केवल इसी तरीके का प्रयोग करते हैं, 15-44 साल की 60 फीसदी महिलाओं ने इस तरीके का इस्तेमाल कभी ना कभी किया हैI कहानी का सार ये है कि हर उम्र के लोग गर्भ से बचने के लिए इसका प्रयोग करते हैंI

6 : रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु नहीं होते
हर पुरुष को जाने अनजाने में थोड़ा वीर्य का रिसाव हो सकता हैI कई रिसर्च इस बात कि पुष्टि करती हैं कि रिसाव वाले वीर्य में शुक्राणु मौजूद नहीं होते, लेकिन ये रिसाव पहले के बचे हुए वीर्य के साथ बाहर आकर गर्भ का कारण बनने में सक्षम अवश्य हैI इसलिए बेहतर है कि सेक्स से पहले पेशाब किया जाये और लिंग को अच्छी तरह धोकर साफ़ किया जायेI

7 : इस तरीके के इस्तेमाल से सेक्स संक्रमण का खतरा नहीं है
नहीं! इस तरीके से सेक्स संक्रमण का खतरा पूरी तरह से हैI कंडोम ही सेक्स संक्रमण से बचने का सही तरीका हैI

8 : किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं
किताबी तौर पर तो किसी तैयारी कि ज़रूरत नहीं हैI लेकिन फिर भी, सेक्स से पहले यह बेहतर होगा कि पेशाब के ज़रिये बचा खुचा शुक्राणु वाला वीर्य फ्लश कर दिया जायेI लिंग को साफ़ कर लिया जायेI यदि स्खलन महिला के शरीर के ऊपर किया गया है तो उसे भी अच्छी तरह से साफ़ कर लेना ज़रूरी है.
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